chevron_left  मोहाल्लुव्धस्यarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय १२५
दुर्योधन उवाच
मोहाल्लुव्धस्य पापस्य जिह्माचारैस्ततस्ततः ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
मोहाविष्टांश्च ते पुत्रानपश्यत्स महारथः |
४९ क
भीष्म पर्व
अध्याय २९
श्रीभगवानु उवाच
मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम् ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
मोहितं वीक्ष्य राजानं नीलमभ्रचय़ोपमम् |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
मोहितः शरजालेन कर्तव्यं नाभ्यपद्यत ||
७६ ख
वन पर्व
अध्याय १९
सूत उवाच
मोहितश्च रणे शूरो रक्ष्यः सारथिना रथी ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
मोहितश्चास्मि देवेश तुभ्यं रूपविपर्ययात् |
१६६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
मोहिताः खल्वनेनैव हृच्छय़ेन प्रवेशिताः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
मोहिताः परमास्त्रेण क्षय़ं जग्मुः परस्परम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
मोहिताः शरवर्षेण भारद्वाजस्य संय़ुगे |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
मोहितो दैवय़ोगेन मृत्युपाशपुरस्कृतः |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३९
युधिष्ठिर उवाच
मोहेन परमाविष्टा दैवादिष्टेन पार्थिव |
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पुत्र उवाच
मोहेन हि समाविष्टः पुत्रदारार्थमुद्यतः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २९१
वैशम्पाय़न उवाच
मोहेनाभिपरीताङ्गी स्मय़माना पुनः पुनः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
मोहोऽप्रकाशस्तामिस्रमन्धतामिस्रसञ्ज्ञितम् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६३
सञ्जय़ उवाच
मोहय़न्तौ मनुष्याणां चक्षूंषि च मनांसि च ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
मोहय़न्धृतराष्ट्रस्य पुत्राणां वुद्धिनिस्रवम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
मोहय़न्निव नाराचैर्जय़द्रथवधेप्सय़ा ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
मोहय़न्पाण्डुपुत्राणां व्यूढं सैन्यं महाहवे ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
मोहय़न्समरे द्रौणिं माय़ावी राक्षसाधिपः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
मोहय़न्सर्वभूतानि द्रोणो हन्ति वलानि नः ||
५८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
मोहय़ामास च तदा कालान्तकय़मोपमः ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
मोहय़ामास तत्कालमश्वसेनस्त्वमुच्यत ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
भीष्म उवाच
मोहय़ामास देवेन्द्रं माय़ाय़ुद्धेन सर्वतः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
मोहय़ामास दैतेय़ान्सर्वान्सौभनिवासिनः ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
मोहय़ामास समरे विद्ध्वा परपुरञ्जय़ः ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
मोहय़ित्वा कृपं द्रोणं द्रौणिं च स वृहद्वलम् |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
मोहय़ित्वा च तां सेनां भीमसेनधनञ्जय़ौ |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
मोहय़ित्वा ततः सैन्यं भारद्वाजः प्रतापवान् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
मोहय़ित्वा परान्द्रोणो युधिष्ठिरमुपाद्रवत् ||
६४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
मोहय़ित्वा रणे पार्थान्वज्रहस्त इवासुरान् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय १६८
अर्जुन उवाच
मोहय़िष्यन्दानवानामहं माय़ामय़ं वलम् ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
मौञ्जाय़नो वाय़ुभक्षः पाराशर्यश्च सारिकौ ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
मौनव्रतधरं शान्तं सद्यो मन्युवशं यय़ौ ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४८
नागभार्यो उवाच
मौनाज्ज्ञानफलावाप्तिर्दानेन च यशो महत् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
मौनाद्धि स मुनिर्भवति नारण्यवसनान्मुनिः |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
मौनाद्ध्यानाच्च योगाच्च विद्धि भारत माधवम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६६
भीष्म उवाच
मौनेन वहुभाष्यं च शौर्येण च भय़ं जय़ेत् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
वैश्रवण उवाच
मौर्ख्यादज्ञानभावाच्च दर्पान्मोहाच्च भारत |
५४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
मौर्ख्याद्येन पिता वृद्धः प्रत्याख्यातो जनार्दन |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
मौर्वीं धनुर्ध्वजं चैव युगानीषास्तथैव च |
२३ क
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
मौर्वीकृतकिणौ वृत्तौ खड्गाय़ुधगदाधरौ ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
मौर्वीघोषस्तनय़ित्नुः पृषत्कपृषतो महान् |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय २३
युधिष्ठिर उवाच
मौर्वीभुजाग्रप्रहितान्स्म तात; दोधूय़मानेन धनुर्धरेण |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
मौर्वीमेखलिनो वीराः सहस्रशतदक्षिणाः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय २५२
द्रौपद्यु उवाच
मौर्वीविसृष्टाः स्तनय़ित्नुघोषा; गाण्डीवमुक्तास्त्वतिवेगवन्तः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
मौर्वीश्च यन्त्राणि च साय़कांश्च; सर्वे समादाय़ जघन्यमीय़ुः ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
मौर्व्या तलत्रैर्न्यवधीत्कशय़ा वाजिनो यथा ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
मौर्व्यां तु युज्यमानाय़ां वलिना पाण्डवेन ह |
१९ क