वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
महता कालय़ोगेन प्रकृतिं यास्यतेऽर्णवः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४८
भीष्म उवाच
महता कोपवेगेन कुपिते प्रपितामहे ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१२४
लोमश उवाच
महता घोररूपेण लोकाञ्शव्देन नादय़न् ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
महता चतुरङ्गेण वलेनागाद्युधिष्ठिरम् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
महता तपसा देवस्तपिष्ठः सेवितो मय़ा |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महता तपसा प्राप्तस्तण्डिना व्रह्मसद्मनि ||
१६५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
महता तपसा सिद्धाः सुराणां भय़वर्धनाः |
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
महता तपसोग्रेण कृत्वाश्रममनिन्दिता ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
महता त्वथ खेदेन आरुह्याश्वं नराधिपः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१३५
यवक्रीरु उवाच
महता निय़मेनाहं तप्स्ये घोरतरं तपः ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
महता परिमर्देन वशे चक्रे दुरासदान् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२४८
वैशम्पाय़न उवाच
महता परिवर्हेण राजय़ोग्येन संवृतः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
महता मेघघोषेण रथेनादित्यवर्चसा |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
महता मेघजालेन नानारूपेण वज्रभृत् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
महता मेघनादेन रथेनाति विराजत ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
महता मेघनादेन रथेनादित्यवर्चसा ||
१८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
महता मेघवर्णेन नागानीकेन पृष्ठतः ||
८४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
महता रथघोषेण दिवं भूमिं च नादय़न् |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
महता रथघोषेण पाण्डवः सत्यविक्रमः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
महता रथघोषेण पृथिवीमनुनादय़न् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
महता रथघोषेण हय़चारेण चाप्युत |
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन तेऽभ्यरक्षन्पितामहम् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन परिगृह्य वलं तव ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन परिवव्रुः पितामहम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
महता रथवंशेन परिवार्य वृकोदरम् ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
महता रथवंशेन परिवार्य समन्ततः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन पार्थस्यावारय़न्दिशः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
महता रथवंशेन मुख्यारिघ्नो महारथः ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन वारय़ामास माधवम् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
दुर्योधन उवाच
महता रथवंशेन शरजालैश्च मामकैः |
४२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन संवृतो रथिनां वरः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन समन्तात्परिवारितः |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन सर्वतः पर्यवारय़न् ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन सौभद्रं पर्यवारय़त् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
महता रथवंशेन हैडिम्वं पर्यवारय़न् ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
उत्तर उवाच
महता राजपुत्रेण मन्त्रय़ज्ञविदा सता ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
महता राजभोग्येन परिवर्हेण संवृतः |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१२७
सोमक उवाच
महता लघुना वापि कर्मणा दुष्करेण वा ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
महता वलचक्रेण परराष्ट्रावमर्दिना |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
महता वलचक्रेण परराष्ट्रावमर्दिना ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
महता वलय़ोगेन तदा लोकः प्रसीदति ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
महता वातवर्षेण त्रासितास्ते वनौकसः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२७
व्यास उवाच
महता विधिदृष्टेन वलेनाप्रतिघातिना |
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
महता शङ्खनादेन रथनेमिस्वनेन च |
५८ क
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
महता शरजालेन समन्तात्पर्यवारय़त् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण अभ्यवर्षन्नरिन्दमम् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण गजः प्रतिगजं यथा ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण छादय़न्तो महारथाः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण छादय़न्तो वृकोदरम् ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण छादय़ामास संय़ुगे ||
३६ ख