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द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण छादय़ामास सर्वतः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण तलशव्देन चार्जुनः ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण परस्परमवर्षताम् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण पाण्डवं समवाकिरत् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण पाण्डवं समवाकिरत् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण प्रत्यगृह्णादभीतवत् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण युय़ुधानमुपाद्रवन् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय २७१
मार्कण्डेय़ उवाच
महता शरवर्षेण राक्षसौ सोऽभ्यवर्षत |
२२ क
वन पर्व
अध्याय २३०
वैशम्पाय़न उवाच
महता शरवर्षेण राधेय़ः प्रत्यवारय़त् ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण वारय़ामास संय़ुगे ||
५८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
महता शरवर्षेण वारय़ामासतुर्वलात् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय २३१
वैशम्पाय़न उवाच
महता शरवर्षेण सोऽभ्यवर्षदरिन्दमः ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
महता शिरसा राजन्ग्रस्तजङ्घो महोदरः |
५ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
महता शोकजालेन प्रणुन्नोऽस्मि द्विजोत्तम |
४६ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
महता शोकमोहेन सहसाभिपरिप्लुतः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
महता श्रेय़सा युक्ता यशसा च स्म वर्धिताः |
३३ क
सभा पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
महता संनिपातेन क्षत्रिय़ान्तकरेण ह |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
महता साय़कौघेन छादय़ामास वीर्यवान् ||
३९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
महता सिंहनादेन गङ्गामभिमुखो यय़ौ ||
१९ ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
महता सिंहनादेन द्रावय़न्तः पृथग्जनम् |
४८ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
महता हर्षजेनाथ नादेन कुरुपुङ्गवाः ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
महतां चैव भूतानां सर्वेषामिह यः पतिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
महतां भूतसङ्घानां श्रुत्वा नाशं च पार्थिव |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
महतां सपताकानामादित्यसमतेजसाम् |
४२ क
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
महतामपविद्धानि कलापानिषुधीस्तथा ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
महतामपि काय़ानां सूक्ष्माणां च महोदधौ ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
महती देवता ह्येषा नररूपेण तिष्ठति ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८२
नारद उवाच
महतीं धुरमादत्ते तामुद्यम्योरसा वह ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
महते योऽपकाराय़ नरस्य प्रभवेन्नरः |
५२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
महतो मृत्युसम्वाधादुत्तरन्नौरिवार्णवात् ||
३९ ख
विराट पर्व
अध्याय ५०
अर्जुन उवाच
महतो रथवंशस्य नानाध्वजपताकिनः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
महत्कार्यं तु कर्तव्यं युष्माभिर्द्विजसत्तमाः |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
दुर्योधन उवाच
महत्कार्यं समाय़त्तं प्रसीद द्विजसत्तम ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
महत्कृतं कर्म धनञ्जय़ेन; कर्तुं यथा नार्हति कश्चिदन्यः ||
१३० ग
शान्ति पर्व
अध्याय २११
भीष्म उवाच
महत्तरं दुःखमभिप्रपन्ना; हित्वामिषं मृत्युवशं प्रय़ान्ति ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
महेश्वर उवाच
महत्त्वं योगिनां चैव महामाय़त्वमेव च |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
महत्त्वात्तस्य दण्डस्य नीतिर्विस्पष्टलक्षणा ||
७९ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
महत्त्वाद्भारवत्त्वाच्च महाभारतमुच्यते |
२०९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
महत्त्वान्नान्वपद्येतां रोदस्योरन्तरं यथा |
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
महत्त्वे च गुरुत्वे च ध्रिय़माणं ततोऽधिकम् ||
२०८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
महत्त्वेन च संय़ुक्तो वैष्णवेन नरो भुवि |
१३६ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
महत्पुण्यमवाप्नोति देवलोकं च गच्छति ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
महत्प्राप्नोति पुरुषो व्रह्म व्रह्मणि विन्दति ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
महत्प्रार्थय़से नूनं तेनासि हरिणः कृशः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
व्रह्मो उवाच
महत्फलं प्राप्नुते स द्विजाय़; दत्त्वा दोग्ध्रीं विधिनानेन धेनुम् |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
महत्यथापराह्णे तु घनैः सूर्य इवावृतः |
४० क
उद्योग पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
महत्यनर्थे निर्वन्धी वलवांश्च विशेषतः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
महत्यपररात्रे तु तव पुत्रस्य मारिष |
४ क
वन पर्व
अध्याय २५३
वैशम्पाय़न उवाच
महत्यरण्ये मृगय़ां चरित्वा; पुरा शृगालो नलिनीं विगाहते ||
१९ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
महत्या सेनय़ा गुप्तं पीडय़ामास सङ्गतः ||
३८ ख