द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
महद्युद्धं तदासीत्तु द्रोणस्य निशि भारत |
६८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
महद्युद्धं तय़ोरासीद्घोररूपं विशां पते |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
महद्वलं धार्तराष्ट्रस्य राज्ञः; को वै शक्तो हन्तुमक्षीय़माणः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
महद्वलं व्यूढरथाश्वनागं; सुरासुरव्यूहसमं वभूव ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२२
भीष्म उवाच
महद्वाक्यमसन्दिग्धं पुष्कलार्थपदं शुचि ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
महद्वैशसमस्माकं क्षत्रिय़ाणां च संय़ुगे ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५७
धृतराष्ट्र उवाच
महद्वो भय़मागामि न चेच्छाम्यथ पाण्डवैः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
महद्व्यसनमापन्ना शिखिना परिवारिता ||
७९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
महर्द्धिरृद्धो वृद्धात्मा महाक्षो गरुडध्वजः ||
५१ ख
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिं काश्यपं द्रष्टुमथ कण्वं तपोधनम् ||
२५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
महर्षिं परिपप्रच्छ कृतप्रज्ञो वृहस्पतिम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९३
भीष्म उवाच
महर्षिं परिपप्रच्छ वामदेवं यशस्विनम् ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
महर्षिः कपिलाचार्यः कृतज्ञो मेदिनीपतिः |
७० क
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
महर्षिकल्पो नृपतिः स्वर्गाग्र्यफलभुग्विभुः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिगणसम्वाधं व्राह्म्या लक्ष्म्या समन्वितम् |
२५ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
१
जनमेजय़ उवाच
महर्षिणाभ्यनुज्ञातो व्यासेनाद्भुतकर्मणा ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
महर्षित्वमथासाद्य सशरीरगतिर्भवेत् ||
१३० ख
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
महर्षिभिः परिवृतो रौद्रं वाक्यमुवाच ह ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिभिर्मोक्षपरैर्यतिभिर्निय़तेन्द्रिय़ैः |
३० क
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
महर्षिभिश्चाध्युषितं पश्येदं भ्रातृभिः सह ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिभ्यो ददौ खड्गमृषय़ो वासवाय़ तु ||
६५ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिमतमाज्ञाय़ महर्षिरिदमव्रवीत् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिरनुकम्पार्थमव्रवीद्वाष्पगद्गदम् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
महर्षिरपि चैतद्वै मारीचः काश्यपोऽव्रवीत् ||
६१ ख
वन पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिरेष यद्व्रूय़ात्तच्छ्रद्धेय़मनन्यथा ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
महर्षिर्गौतमश्चापि तिलदानैर्दिवं गताः ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२९
समुद्र उवाच
महर्षिर्जमदग्निस्ते यदि राजन्परिश्रुतः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
महर्षिर्भगवांस्तेन पूर्वमासीद्विमानितः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०७
गुरुरु उवाच
महर्षिर्भगवानत्रिर्वेद तच्छुक्रसम्भवम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
महर्षिर्भगवान्गर्गस्तस्य सांवत्सरोऽभवत् ||
११७ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
महर्षिर्भगवान्व्यासः कृत्वेमां संहितां पुरा |
४६ क
वन पर्व
अध्याय
१९२
मार्कण्डेय़ उवाच
महर्षिर्विश्रुतस्तात उत्तङ्क इति भारत |
८ क
वन पर्व
अध्याय
९५
लोमश उवाच
महर्षिर्वीर्यवानेष क्रुद्धः शापाग्निना दहेत् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भीष्म उवाच
महर्षिर्व्रह्मसङ्काशः सर्वं तस्मै ततोऽव्रवीत् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
महर्षिवचनं श्रुत्वा तानुवाच महाद्युतिः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
महर्षिशापात्सौदासः पुरुषादत्वमागतः ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिसुरगन्धर्वानुवाचेदं पितामहः ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२१
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षिस्तु भरद्वाजो हविर्धाने चरन्पुरा |
३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षी सहितौ तत्र दर्शय़ामासतुस्तदा ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
महर्षीणां कथय़तां कारणं तस्य जन्म च ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम् |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षीणां मतं ज्ञात्वा ततः सा सरितां वरा |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
महर्षीणामिदं गुह्यं सर्वपापप्रमोचनम् |
८६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
महर्षीणामिदं जप्यं पावनानां तथोत्तमम् |
६५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
महर्षीन्हंसरूपेण प्रेषय़ामास तत्र वै ||
९० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८०
भरद्वाज उवाच
महर्षे मनसि व्यग्रे तस्माज्जीवो निरर्थकः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षे मम पुत्रोऽय़ं कुन्त्यां जातो महाभुजः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
महर्षे यत्त्वय़ा प्रोक्तं वेदवादविचक्षण ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५२
वासुदेव उवाच
महर्षे विदितं नूनं सर्वमेतत्तवानघ ||
१६ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
सूर्य उवाच
महर्षे शिरसस्त्राणं छत्रं मद्रश्मिवारणम् |
१४ क