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वन पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
एष प्रत्यागतो मन्त्री धृतराष्ट्रस्य संमतः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
एष प्रवृत्तको धर्मो निवृत्तकमथो शृणु ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
एष प्रसाद्य शिरसा मय़ा सार्धमरिन्दम |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
सुधन्वो उवाच
एष प्रह्राद पुत्रस्ते मय़ा दत्तो विरोचनः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
एष प्रय़ाति त्वरितो क्रोधाविष्टो युधिष्ठिरः |
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
एष प्रय़ात्याधिरथिः सात्यकेः स्यन्दनं प्रति |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
एष भद्रे मय़ा मुक्तो भर्ता ते कुलनन्दिनि |
५५ क
सभा पर्व
अध्याय ५०
दुर्योधन उवाच
एष भारः सत्त्ववतां नय़ः शिरसि धिष्ठितः ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
एष भारत युद्धस्य पृष्ठं संशमय़िष्यति ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७८
भीष्म उवाच
एष भार्गवदाय़ादो मुनिः सत्यो दृढव्रतः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
शल्य उवाच
एष भीमो जय़प्रेप्सुर्युधि तिष्ठति वीर्यवान् ||
६३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
एष भीमो दृढक्रोधो वृतः पार्थ समन्ततः |
१०५ क
द्रोण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
एष भीमो दृढक्रोधो हीनः पाण्डवसृञ्जय़ैः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय ६६
अर्जुन उवाच
एष भीमो महावाहुर्भीमवेगपराक्रमः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
एष भीमो रणश्लाघी वृतः सोमकपाण्डवैः |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
एष भीमो रणे क्रुद्धो धार्तराष्ट्रान्महारथान् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
एष भीमोऽभिय़ात्युग्रः पुनरावर्त्य वाहिनीम् ||
२६ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
एष भीष्मं तथा द्रोणं गौतमं शल्यमेव च |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
एष भीष्मः शान्तनवो देवैः सर्वैर्निवारितः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
एष भीष्मः शान्तनवो योद्धुकामो धनञ्जय़म् |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
एष भीष्मः सुसङ्क्रुद्धो वार्ष्णेय़ मम वाहिनीम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
एष भूतपतिस्तात स्वध्यक्षश्च प्रकीर्तितः |
३८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
व्रह्मो उवाच
एष भूतादिकः सर्गः प्रजानां च प्रजापतिः ||
१० ग
वन पर्व
अध्याय १८९
मार्कण्डेय़ उवाच
एष भूतो भविष्यश्च धर्मस्ते समुदीरितः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
एष भ्राता सखा चैव तव कृष्ण धनञ्जय़ः |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
एष भ्रान्ते रथे तिष्ठन्भल्लेनापहरच्छिरः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
एष मद्रान्वशे कृत्वा कुरूंश्च सह केकय़ैः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
एष मां भ्रातृभिः सार्धं सुशर्माह्वय़तेऽच्युत ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एष माता पिता चैव युष्माकं च पितामहः |
६९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
एष माता पिता चैव सर्वेषां प्राणिनां हरिः |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय १९
गान्धार्यु उवाच
एष माधव पुत्रो मे विकर्णः प्राज्ञसंमतः |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
एष मामनुरक्तो हि राजंस्त्वां चैव नित्यदा ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
एष मार्गः प्रदिष्टो मे येनेदं निर्मितं जगत् ||
४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २६६
भीष्म उवाच
एष मार्गो हि मोक्षस्य प्रसन्नो विमलः शुचिः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७८
भृगुरु उवाच
एष मार्गोऽथ योगानां येन गच्छन्ति तत्पदम् |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
एष माय़ाप्रतिच्छन्नः करूषार्थे तपस्विनीम् |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
एष मुख्यतमो धर्मः क्षत्रिय़स्येति नः श्रुतम् |
९२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
वसिष्ठ उवाच
एष मुञ्चति तत्त्वं हि क्षिप्रं वुद्धस्य लक्षणम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ७५
दमय़न्त्यु उवाच
एष मुञ्चतु मे प्राणान्यदि पापं चराम्यहम् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
एष मुष्टिरिषीकाणां मय़ास्त्रेणाभिमन्त्रितः |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
एष मूर्धावसिक्तानामग्रे गत्वा परन्तपः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
एष मूलं ह्यनर्थानां दुर्योधनमते स्थितः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५१
सूर्य उवाच
एष मूलफलाहारः शीर्णपर्णाशनस्तथा |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
वासुदेव उवाच
एष मूलमनर्थानां पाण्डवानां महारथः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ७३
देवय़ान्यु उवाच
एष मे दक्षिणो राजन्पाणिस्ताम्रनखाङ्गुलिः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
भीष्म उवाच
एष मे दास्यति धनं प्रभूतं शीघ्रमेव च ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५२
व्राह्मण उवाच
एष मे निश्चय़ः साधो कृतः कारणवत्तरः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
श्रीरु उवाच
एष मे निहितः पादो योऽय़ं भूमौ प्रतिष्ठितः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
श्रीरु उवाच
एष मे निहितः पादो योऽय़ं सत्सु प्रतिष्ठितः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
श्रीरु उवाच
एष मे निहितः पादो योऽय़मग्नौ प्रतिष्ठितः |
२६ क