आदि पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
महात्मा जनिता लोके पुत्रस्तव महावलः |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
महात्मा द्रुपदः श्रीमान्सह पुत्रेण संय़ुगे ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महात्मा सर्वभूतश्च विरूपो वामनो मनुः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६९
भीष्म उवाच
महात्मा सुव्रतो दान्तः सर्वत्रैवानपाश्रितः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
महात्मानं कृतास्त्रं च विचरामीह दुःखिता ||
८१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
महात्मानं महादेवं विशालाक्षं सनातनम् ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
महात्मानो गताः स्वर्गं शिष्टात्मानो जितेन्द्रिय़ाः ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
महात्मानो यदूनां च ये जाता विपुले कुले ||
१०० ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
महादंष्ट्रा ह्रस्वदंष्ट्राश्चतुर्दंष्ट्रास्तथापरे |
९५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
महादण्डश्च तस्य स्याद्यस्याग्निर्वै दिवा भवेत् |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महादन्तो महाकर्णो महामेढ्रो महाहनुः ||
८३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महादन्तो महादंष्ट्रो महाजिह्वो महामुखः ||
८५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२३
कुन्त्यु उवाच
महादानानि दत्तानि पीतः सोमो यथाविधि ||
१७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
महादानानि दत्तानि श्राद्धानि च पुनः पुनः |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
महादानानि विप्रेभ्यो ददतामौर्ध्वदैहिकम् ||
१४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
महादुःखपरीतात्मा वभूव जनमेजय़ ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
महादृतिरिवाध्मातः पापो भवति नित्यदा |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९६
भीष्म उवाच
महादृतिरिवाध्मातः स्वकृतेन विवर्धते ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
महादेव इति ख्यातस्तदाप्रभृति शङ्करः ||
६३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
महादेवं तोषय़ामास चैव; साक्षात्सुय़ुद्धेन महानुभावः |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
महादेवं पशुपतिं पर्युपासन्त भारत ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
महादेवं प्रति यय़ौ पुरं नागाह्वय़ं प्रति ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
महादेवं महात्मानमीशानं जटिलं शिवम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
महादेवः सर्वमेधे महात्मा; हुत्वात्मानं देवदेवो विभूतः |
१२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
महादेवप्रसादः स कुरु कार्यमनन्तरम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
महादेवप्रसादाच्च गाणपत्यमवाप्नुय़ात् ||
७० ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
महादेवप्रसादाद्धि गच्छेत परमां गतिम् ||
२१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
महादेववराच्छक्रं वर्षार्वुदमय़ोधय़त् ||
५३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
महादेवस्ततस्तस्मिन्वृत्ते यज्ञे यथाविधि |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
महादेवस्य रोषाच्च आपो नष्टाः पुराभवन् |
६४ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
महादेवस्य सांनिध्यं तत्रैव भरतर्षभ ||
८४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
महादेवादृते सौम्य सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||
९४ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
महादेवान्तकाभ्यां च कामात्क्रोधाच्च भारत |
६६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
महादेवाय़ कृष्णाय़ त्र्यम्वकाय़ानघाय़ च |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
महादेवाय़ भीमाय़ त्र्यम्वकाय़ च शम्भवे |
५० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
महादेवेन तुष्टेन क्षत्रिय़ाणां क्षय़ङ्करः |
१३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
महादेवेन दिष्टं ते पुत्रजन्म नराधिप |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
महादेवेन युद्धं च किरातवपुषा सह |
१०७ क
वन पर्व
अध्याय
४६
धृतराष्ट्र उवाच
महादेवेन वाहुभ्यां यत्समेत इति श्रुतिः ||
३९ ख
विराट पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
महादेवोऽपि पार्थेन श्रूय़ते युधि तोषितः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
महादोषः संनिपातस्ततो व्यङ्गः स उच्यते ||
३२ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
महादोषकरस्तत्र खादको न तु घातकः ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
व्यास उवाच
महादोषेण मे कार्यं न स्वर्गेण सुखेन वा ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
महाद्युतेर्महाराज वहुभिः पन्नगैर्वृतम् |
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
महाद्युतय़ेऽनङ्गाय़ सर्वाङ्गाय़ प्रजावते ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
महाद्रुमाणां निर्यासा वहवश्चौषधीरसाः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
महाद्रुमाणां शिखरेषु तस्थु; र्मनोरमां वाचमुदीरय़न्तः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
महाद्रय़ः प्रविगलिताग्रसानवः; परस्परं द्रुतमभिहत्य सस्वनाः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
महाद्विपमिवारण्ये मृगेन्द्र इव कर्षति ||
५९ ख