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शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
एवं तौ विचरन्तौ तु न्यघ्नतां वै परस्परम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तौ समनुज्ञातौ पावकेन महात्मना |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय २०४
नारद उवाच
एवं तौ सहितौ भूत्वा सर्वार्थेष्वेकनिश्चय़ौ |
२५ क
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तौ स्वर्णविकृतान्विमुञ्चन्तौ महाशरान् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं त्यक्त्वा शरीरं तु परमे तपसि स्थितः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
एवं त्रिदशलोकेऽपि प्राप्यन्ते वहवश्छलाः ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं त्रिरात्रमभवत्तद्युद्धं भरतर्षभ |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३१
श्रीभगवानु उवाच
एवं त्रय़ीधर्ममनुप्रपन्ना; गतागतं कामकामा लभन्ते ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय ५३
शकुनिरु उवाच
एवं त्वं मामिहाभ्येत्य निकृतिं यदि मन्यसे |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
एवं त्वक्चक्षुषी जिह्वा नासिका चैव पञ्चमी |
३३ क
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं त्वजनय़द्धिष्ण्यान्वेदोक्तान्विवुधान्वहून् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
भीष्म उवाच
एवं त्वमपि कौन्तेय़ श्रुत्वा वाणीमिमां मम |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
एवं त्वमपि कौरव्य पृथिव्यामपराजितः |
६१ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
एवं त्वमपि कौरव्य विधिनानेन सुव्रत |
९० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५१
निषादा ऊचुः
एवं त्वमपि धर्मात्मन्पुरुषाग्निः प्रतापवान् ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८
शल्य उवाच
एवं त्वमपि राजेन्द्र राज्यं प्राप्स्यसि भारत |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
काक उवाच
एवं त्वमुच्छिष्टभृतो धार्तराष्ट्रैर्न संशय़ः |
५५ ख
विराट पर्व
अध्याय ८
सुदेष्णो उवाच
एवं त्वां वासय़िष्यामि यथा त्वं नन्दिनीच्छसि |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
एवं त्वामपि धर्मात्मन्प्रय़ाचेऽहं कृताञ्जलिः |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
एवं त्वामभिजानन्ति तपसा भाविता नराः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७८
भृगुरु उवाच
एवं त्विह स सर्वत्र प्राणेन परिपाल्यते |
५ क
वन पर्व
अध्याय २०३
व्याध उवाच
एवं त्विह स सर्वत्र प्राणेन परिपाल्यते |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १२
धृतराष्ट्र उवाच
एवं त्वय़ा कुरुश्रेष्ठ वर्तितव्यं प्रजाहितम् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
एवं त्वय़ि समाधाय़ धर्मराजं नरोत्तमम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
एवं त्वय़ेच्छाम कृतं महर्षे; महार्णवं पीय़मानं महात्मन् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय ६८
वृहदश्व उवाच
एवं तय़ा यथोक्तं वै गत्वा राजानमव्रवीत् |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
एवं तय़ोः संवदतोः क्रिय़ास्तस्य महात्मनः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
एवं तय़ोः संवदतोः फल्गुनो निशितैः शरैः |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तय़ोक्तो भगवान्नीहारमसृजत्प्रभुः |
५९ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तय़ोर्महाराज दीर्घकालो व्यतिक्रमत् |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
एवं दग्धा धार्तराष्ट्रस्य सेनां; युधिष्ठिरः क्रोधदीप्तोऽनुवीक्ष्य ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
एवं दग्धा भगवता दानवाः स्वेन तेजसा |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
एवं दण्डं च कोशं च मित्रं भूमिं च लप्स्यसे |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
एवं दण्डस्य कौरव्य लोकेऽस्मिन्वहुरूपता ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
एवं दत्त्वा वरं देवो वन्द्यमानः सुरर्षिभिः |
७१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२४
भीष्म उवाच
एवं दत्त्वा वरं राज्ञे सर्वे तत्र दिवौकसः |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
एवं दत्त्वा वरान्देवो मम देवी च भारत |
९ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
एवं दत्त्वा वरान्राजन्रामस्य पितरस्तदा |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२२
मैत्रेय़ उवाच
एवं दत्त्वा श्रुतवति फलं दाता समश्नुते ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
एवं दश दिशः सर्वास्तिर्यगूर्ध्वं च भारत |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
एवं दश दिशो भीष्मः शरजालैः समन्ततः |
२७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
एवं दशविधो ज्ञेय़ः पार्थिवो गन्ध इत्युत ||
४२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं दानसमाधानं मार्गमातिष्ठतो नृप |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १३
जरत्कारुरु उवाच
एवं दारक्रिय़ाहेतोः प्रय़तिष्ये पितामहाः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं दिवाकरात्प्राप्य दिवाकरसमद्युतिः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
महेश्वर उवाच
एवं दीर्घाय़ुषां मार्गः सुवृत्तानां सुकर्मणाम् |
५८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८
शल्य उवाच
एवं दुःखमनुप्राप्तमिन्द्रेण सह भार्यया |
१० क
विराट पर्व
अध्याय १८
द्रौपद्यु उवाच
एवं दुःखशताविष्टा युधिष्ठिरनिमित्ततः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
एवं दुःशासनवलं वध्यमानं किरीटिना |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं दुर्योधनः कर्णः शकुनिश्चापि सौवलः |
४२ क