आदि पर्व
अध्याय
१३३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सर्वान्कुरून्वृद्धानभिवाद्य यतव्रताः |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
१४
कृष्ण उवाच
एवं सर्वान्वशे चक्रे जरासन्धः शतावरान् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
२०२
नारद उवाच
एवं सर्वान्समादिश्य पूर्वतीरे महोदधेः |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सर्वास्त्रविदुषोरस्त्रय़ुद्धमवर्तत |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
एवं सर्वास्ववस्थासु सान्त्वपूर्वं समाचरन् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५०
नारद उवाच
एवं सर्वे मानवाः प्राणनान्ते; गत्वावृत्ता देववद्राजसिंह ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२०
नारद उवाच
एवं सर्वे समस्तास्ते राजानः सुकृतैस्तदा |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
एवं सर्वेषु कार्येषु विमृश्य पुरुषस्ततः |
७० क
वन पर्व
अध्याय
२७७
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं सर्वेषु तीर्थेषु धनोत्सर्गं नृपात्मजा |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८०
भृगुरु उवाच
एवं सर्वेषु भूतेषु गूढश्चरति संवृतः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३८
व्यास उवाच
एवं सर्वेषु भूतेषु गूढोऽऽत्मा न प्रकाशते |
५ क
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
एवं सर्वेषु भूतेषु भूतात्मा न प्रकाशते |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
एवं सर्वेषु विततौ प्राणापानौ हि देहिषु ||
२८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१७८
भृगुरु उवाच
एवं सर्वेषु विहितः प्राणापानेषु देहिनाम् |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४५
सनत्सुजात उवाच
एवं सर्वेषु वेदेषु व्राह्मणस्य विजानतः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
शकुनिरु उवाच
एवं सर्वेऽनुसञ्चिन्त्य प्रय़युर्यत्र सैनिकाः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
एवं सवाहनं सर्वमाविग्नमभवद्वलम् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
एवं सा धर्मराजस्य वध्यमाना महाचमूः |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
एवं सा निश्चय़ं कृत्वा भृशं शोकपराय़णा |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
एवं सा परिनिश्चित्य जगाम नगराद्वहिः |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सा रजनी तेषामाश्रमे पुण्यकर्मणाम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
एवं सा वहुला सेना कलिङ्गानां तरस्विनाम् |
६० क
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सा संस्तुता तेन वरं लव्ध्वा महानदी |
२४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
३
विदुर उवाच
एवं सांसिद्धिके लोके किमर्थमनुतप्यसे ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सांसिद्धिके लोके सर्वं दण्डे प्रतिष्ठितम् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं साध्याश्च रुद्राश्च वसवः पितरस्तथा |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय
१९६
द्रोण उवाच
एवं सान्त्वसमाय़ुक्तं द्रुपदं पाण्डवैः सह |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
एवं सामानि गास्यन्तीत्युक्त्वा धौम्योऽपि गच्छति ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
व्यास उवाच
एवं सारस्वतमृषिमपान्तरतमं तदा |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
एवं साशोकवृक्षं तमार्ता त्रिः परिगम्य ह |
१०३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सिद्धः स भगवानार्ष्टिषेणः प्रतापवान् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
दुर्योधन उवाच
एवं सिद्धाव्रुवन्वाचो भविष्यति च तत्तथा ||
८० ख
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सिद्धिः परा प्राप्ता अरुन्धत्या विशुद्धय़ा |
४७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
एवं सिसृक्षुर्भूतानि ददर्श प्रथमं विभुः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
एवं सुकलिलं युद्धमासीत्क्रव्यादहर्षणम् |
७२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११३
वृहस्पतिरु उवाच
एवं सुखसमाय़ुक्तो रमते विगतज्वरः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
एवं सुतपसा चैव हव्यकव्यैस्तथैव च |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
एवं सुतुमुले युद्धे वर्तमाने भय़ावहे |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
एवं सुदुर्विदो धर्मो मन्दप्रज्ञैर्विशेषतः ||
३ ग
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सुरद्विषोऽनेकान्वलवानातताय़िनः |
७० क
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सुरमणीय़ानि वनान्युपवनानि च |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
गङ्गो उवाच
एवं सुवर्णमुत्पन्नमपत्यं जातवेदसः |
७८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
एवं सुवलपुत्रस्य त्रिसाहस्रान्हय़ोत्तमान् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
एवं सुविहिता राजन्द्वारका भूरिदक्षिणैः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं सुय़ुद्धे पार्थेन जिताहं मधुसूदन |
१०३ क
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं सेन्द्रं जगत्सर्वं श्वेतपर्वतसंस्थितम् |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
एवं सेन्द्रा वसिष्ठेन रक्षितास्त्रिदिवौकसः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
एवं सोमे तथा वाय़ौ भूम्याकाशशरीरगः |
१२० क
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
एवं सोऽभ्यपतद्देशान्वहून्सगजकच्छपः |
४ क