आदि पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
महाभिषं तु तं दृष्ट्वा नदी धैर्याच्च्युतं नृपम् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
महाभिषश्च विख्यातो निमिराजस्तथाष्टकः ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
महाभिषस्तु राजर्षिरशङ्को दृष्टवान्नदीम् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
महाभुजगसङ्काशा वाहवः परिघोपमाः ||
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
महाभुजा ह्रस्वभुजा ह्रस्वगात्राश्च वामनाः |
९३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
महाभूतविनाशान्ते प्रलय़े प्रत्युपस्थिते |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४७
व्रह्मो उवाच
महाभूतविशाखश्च विशेषप्रतिशाखवान् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
महाभूतशतोद्भासी नभसोऽपि विशिष्यते ||
४१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
महाभूतसमाय़ुक्तं वुद्धिसंय़मनं रथम् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
महाभूता भूमिकम्पे चतुरः सागरान्पृथक् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
२०१
व्याध उवाच
महाभूतात्मकं व्रह्मन्नातः परतरं भवेत् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
महाभूतात्मकं सर्वं महद्यत्परमाणु यत् ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
महाभूताधिपतय़े रुद्राणां पतय़े तथा |
९१ क
वन पर्व
अध्याय
२०१
व्याध उवाच
महाभूतानि खं वाय़ुरग्निरापस्तथा च भूः |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
महाभूतानि नित्यानि भूताधिपतिसंश्रय़ात् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
महाभूतानि पञ्चेति तान्याहुर्भूतचिन्तकाः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
महाभूतानि पञ्चैव षष्ठं तु मन उच्यते ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
महाभूतानि पञ्चैव सर्वभूतेषु भूतकृत् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
व्यास उवाच
महाभूतानि पञ्चैव सर्वभूतेषु भूतकृत् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
महाभूतानि भूतात्मा महात्मा पुरुषोत्तमः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
महाभूतानि भूतानां सर्वेषां प्रभवाप्ययौ ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
व्यास उवाच
महाभूतानि भूतानां सागरस्योर्मय़ो यथा ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
महाभूतानि भूतेषु सागरस्योर्मय़ो यथा ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२०२
व्राह्मण उवाच
महाभूतानि यान्याहुः पञ्च धर्मविदां वर |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
महाभूतानि सर्वाणि पूर्वसृष्टिः स्वय़म्भुवः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
महाभूतानि सृष्ट्वाथ तद्गुणान्निर्ममे पुनः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०५
गुरुरु उवाच
महाभूतानीन्द्रिय़ाणि गुणाः सत्त्वं रजस्तमः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
महाभूतान्यहङ्कारो वुद्धिरव्यक्तमेव च |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४५
व्रह्मो उवाच
महाभूतारविष्कम्भं निमेषपरिवेष्टनम् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
महाभूतेषु नानात्वमिन्द्रिय़ार्थेषु मूर्तिषु |
४९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
महाभोगा महाकाय़ाः पर्वताभोगभोगिनः ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
नारद उवाच
महाभोगे कुले जन्म प्रेत्य प्राप्नोति भारत ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
महाभोगे कुले देवि धनधान्यसमाचिते ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
महाभोगो महाकोशो धनी भवति मानवः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
महाभौमः खलु प्रासेनजितीमुपय़ेमे सुय़ज्ञां नाम |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
महाभ्रकूटाचलशृङ्गसंनिभै; र्गजैरनेकैरिव वज्रपातितैः |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
महाभ्रघननिर्घोषं सर्वरत्नविभूषितम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
महाभ्रघनसङ्काशं सलिलोपहितं शुभम् |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
महाभ्रजालमतुलं मातरिश्वेव सन्ततम् ||
३२ ख
विराट पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
महाभ्रजालैरिव संवृतो रवि; र्यथानलो भस्मवृतश्च वीर्यवान् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
महाभ्रैरिव शैलेन्द्रौ युय़ुधाते महावलौ ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
महाभय़ा वैतरणीव दुस्तरा; प्रवर्तिता योधवरैस्तदा नदी |
५० क
सभा पर्व
अध्याय
५२
युधिष्ठिर उवाच
महाभय़ाः कितवाः संनिविष्टा; माय़ोपधा देवितारोऽत्र सन्ति |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
महाभय़े वीतभय़ः कृतास्त्रः; समागमे शत्रुवलावमर्दी |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
महाभय़े सम्प्रवृत्ते रथस्थं; विवर्तमानं समरे कृतास्त्रम् |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
महाभय़े सारथिमित्युवाच; भीमश्चमूं वारय़न्धार्तराष्ट्रीम् |
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७७
भीष्म उवाच
महाभय़ेषु च नरः कीर्तय़न्मुच्यते भय़ात् ||
२४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
महामकरवक्त्राश्च तिमिवक्त्रास्तथैव च |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२०८
मार्कण्डेय़ उवाच
महामखेष्वाङ्गिरसी दीप्तिमत्सु महामती |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
महामतिरचिन्त्यात्मा सत्यधर्मरतः सदा ||
२५ ख