सभा पर्व
अध्याय
५३
शकुनिरु उवाच
महामतिर्यश्च जानाति द्यूतं; स वै सर्वं सहते प्रक्रिय़ासु ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२०८
मार्कण्डेय़ उवाच
महामतीति विख्याता सप्तमी कथ्यते सुता ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२३
कामन्द उवाच
महामना भवेद्धर्मे विवहेच्च महाकुले |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
८४
धृतराष्ट्र उवाच
महामना महावीर्यो महामात्रो जनार्दनः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३२
भीष्म उवाच
महामनाश्चैव भवेद्विवहेच्च महाकुले ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
महामात्रा महामात्रैस्ताडिताः शरतोमरैः |
४६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
महामात्रैस्तमावव्रुर्मेघा इव दिवाकरम् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
महामारुतवेगेन रुग्णा इव महाद्रुमाः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
महामारुतवेगेन समुद्रमिव पर्वसु |
७१ क
वन पर्व
अध्याय
३५
युधिष्ठिर उवाच
महामाय़ः शकुनिः पार्वतीय़ः; सदा सभाय़ां प्रवपन्नक्षपूगान् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महामूर्धा महामात्रो महानेत्रो दिगालय़ः |
८३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
महामेघनिभश्चापि निर्घोषः श्रूय़ते जनैः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महामेघनिवासी च महाघोरो वशीकरः |
७९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
महामेघानिव वहूञ्शैलावस्तोदय़ावुभौ ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
महामेघाविवोदीर्णौ मिश्रवातौ हिमात्यये |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
महामेघो यथा वर्षं विमुञ्चन्गन्धमादने ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
महामेघोपमं दृष्ट्वा तं स भीतोऽभवद्गजः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
महामेरुर्महाकाशो जलदः कुमुदोत्तरः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
महामेरुर्महाभाग शिवो व्रह्मविदां गतिः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
महामेरोर्गिरेः शृङ्गात्प्रच्युतो गन्धमादनम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२
शौनक उवाच
महामोहमुखे मग्नो नात्मानमववुध्यते ||
६६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
महारङ्गानुरक्तानि वस्त्राणीव चकाशिरे ||
६८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
महारजतसङ्काशा जाय़न्ते तत्र मानवाः |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
महारणगतः पार्थो यच्च नासीत्पराङ्मुखः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
मार्कण्डेय़ उवाच
महारण्यगतश्चापि तपस्तेपे महाव्रतः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
महारण्यनिवासश्च न तस्य स्मर्तुमर्हसि ||
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१२
वासुदेव उवाच
महारण्यनिवासश्च न तस्य स्मर्तुमिच्छसि ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
महारथं त्वत्सदृशं न कञ्चिदनुशुश्रुम ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
महारथं भारत दुष्प्रधर्षं; शरौघिणं प्रतपन्तं नरेन्द्रान् |
७७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
महारथः कृतिमान्क्षिप्रहस्तो; दृढाय़ुधो दृढमुष्टिर्दृढेषुः |
९१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
महारथः समाख्यातः सर्वय़ुद्धविशारदः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
महारथः समाख्यातः सेव्यः स्तव्यश्च वन्दिनाम् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
महारथः समाज्ञातो महाराज महाधनुः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
महारथत्वं सङ्ख्यातुं शक्यं क्षत्रस्य कौरव ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
महारथत्वं सम्प्राप्तास्तथान्ये वसुधाधिपाः ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
महारथप्रय़ुक्ताश्च द्रोणद्रौणिप्रचोदिताः ||
४१ ख
विराट पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
महारथमनुप्राप्तं दृष्ट्वा गाण्डीवधन्विनम् ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
महारथमहाद्वीपां शङ्खदुन्दुभिनिस्वनाम् |
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
महारथशतावर्तां भूमिरेणूर्मिमालिनीम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
महारथश्च राजन्य एष्टव्यः शत्रुतापनः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
महारथसमाख्यातं द्रोणाय़ोद्यन्तमाहवे |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
धृतराष्ट्र उवाच
महारथसमाख्यातं पृथिव्यां प्रवरं रथम् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
महारथसमाख्याता दुर्योधनहितैषिणः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
महारथसमाख्याता धृष्टद्युम्नस्य संमताः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
महारथसमाख्यातौ क्षत्रिय़प्रवरौ युधि ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
महारथसमाज्ञातैर्हतानां पुत्रनप्तृभिः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
महारथसहस्रस्य समं कर्मार्जुनोऽकरोत् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
महारथसहस्राणि जघ्नुरन्योन्यमाहवे |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
महारथस्ततः कार्ष्णिः सञ्जग्राह महागदाम् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
महारथा महात्मानः सर्वे पाञ्चालसत्तमाः |
११ क