आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
महारथा महात्मानः सर्वैः समुदिता गुणैः ||
१७१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
महारथा महावाहुमन्वय़ुः शस्त्रपाणय़ः ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
४४
शकुनिरु उवाच
महारथा महेष्वासाः कृतास्त्रा युद्धदुर्मदाः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
महारथा हि वहवो यतिष्यन्त्यस्य निर्जय़े |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१७५
व्राह्मणा ऊचुः
महारथाः कृतास्त्राश्च समुपैष्यन्ति भूमिपाः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
महारथाः पञ्च धनञ्जय़ाच्युतौ; शरैः शरीरान्तकरैरताडय़न् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
महारथाः पार्थमशक्नुवन्त; स्तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
१३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
दुर्योधन उवाच
महारथाः समाख्याताः कुलपुत्रास्तनुत्यजः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
महारथाः समाख्याताः कुलपुत्रास्तनुत्यजः |
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
महारथाः समाख्याताः कुलपुत्रास्तनुत्यजः ||
७३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
महारथाः समाख्याताश्चित्रवर्माय़ुधध्वजाः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
महारथाञ्शरैर्विद्ध्वा वारय़ित्वा महारथः |
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
महारथानां वीराणां कन्या चैकाथ दुःशला ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
महारथानुपक्रीडन्वृष्णीनां कीर्तिवर्धनः ||
१५८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
महारथान्नागवरान्हय़ांश्च; पदातिमुख्यानपि च प्रमथ्य |
७८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
महारथे नरव्याघ्रे किमु आसीन्मनस्तदा ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
महारथेनासुकरं महत्कर्म करिष्यति ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
महारथेषु छन्नेषु मासा दश समत्ययुः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
महारथैः सम्परिवार्यमाणं; ददर्श भीष्मः कपिराजकेतुम् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
महारथैरन्धकवृष्णिभोजैः; सौराष्ट्रकैर्नैरृतैरात्तशस्त्रैः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
महारथैर्भूः शुशुभे विचूर्णितैः; पुरैरिवामित्रहतैर्नराधिप ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
महारथो मगधराड्विश्रुतो यो वृहद्रथः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
महारथो महावाहुर्महावेगैर्महावलः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
महारथौ च पाञ्चाल्यौ युधामन्यूत्तमौजसौ |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
महारथौ तौ परिवार्य सर्वतः; सुरासुरा वासवशम्वराविव ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
महारथौ महावीर्यौ मतौ मे पुरुषर्षभौ ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
महारथौ समाख्यातावुभौ पुरुषमानिनौ ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
महारथौघविपुलः समुद्र इव पर्वणि |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
५६
विदुर उवाच
महाराज प्रभवस्त्वं धनानां; पुरा द्यूतान्मनसा यावदिच्छेः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५६
सञ्जय़ उवाच
महाराज मनुष्येषु निन्द्यं यः सर्वमाचरेत् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
महाराज मनुष्येषु निन्द्यं यः सर्वमाचरेत् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
महाराज महारण्ये मामिहैकाकिनीं सतीम् |
२४ क
सभा पर्व
अध्याय
५५
विदुर उवाच
महाराज विजानीहि यत्त्वां वक्ष्यामि तच्छृणु |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
महाराजेति सततं लोकनाथेति चासकृत् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७०
भीष्म उवाच
महाराजो मम पिता शन्तनुर्भरतर्षभः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
महाराजो वाह्लिकः प्रातिपेय़ः; कच्चिद्विद्वान्कुशली सूतपुत्र ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
महाराज्ये च पितरं धृतराष्ट्रं जनेश्वरम् ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
महाराज्ये स्थितो दीप्ते न स्त्रिय़ं हन्तुमर्हसि |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महारूपो महाकाय़ः सर्वरूपो महाय़शाः |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५१
धृतराष्ट्र उवाच
महार्चिरनिलोद्धूतस्तद्वद्धक्ष्यति मामकान् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
महार्णव इव क्षुव्धः समाजः सोऽभवत्तदा ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
महार्णवगतां शीघ्रं नय़ेत्पार्थिव पत्तनम् ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७९
भरद्वाज उवाच
महार्णवविमुक्तत्वादन्यत्सलिलभाजनम् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११०
गालव उवाच
महार्णवस्य च रवैः श्रोत्रे मे वधिरीकृते |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
महार्णवे नौरिव वाय़ुय़ुक्ता; दानं गवां तारय़ते परत्र ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
महार्थं लघुसंय़ुक्तं कर्तुमर्हसि माधव ||
८४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
महार्थमत्यर्थतपःप्रय़ुक्तं; तदुच्यमानं हि मय़ा निवोध ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
ऋषय़ ऊचुः
महार्थवत्सत्पुरुषेण सङ्गतं; तस्मात्सन्तं न जिघांसेत धीरः ||
२४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
महार्हनानामुकुटा मुण्डाश्च जटिलाः परे |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
महार्हमणिपत्रैश्च काञ्चनप्रभकेसरैः |
२१ क