कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
महेश्वरेण क्रुद्धेन त्रैलोक्यस्य हितैषिणा ||
१२१ ख
वन पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
महेश्वरेण यो राजन्न जीर्णो ग्रस्तमूर्तिमान् |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
महेश्वरो महातेजाश्चराचरगुरुः प्रभुः ||
१९० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
माण्डव्य उवाच
महेश्वरो महाराज कृत्तिवासा महाद्युतिः |
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
महेश्वरोऽपि पार्थेन श्रूय़ते योधितः पुरा |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
महेषुधी चाक्षय़ौ दिव्यरूपौ; शस्त्राणि दिव्यानि च हव्यवाहात् ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२१
धृतराष्ट्र उवाच
महेष्वासं नरव्याघ्रं द्विषतामघवर्धनम् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
महेष्वासं नरव्याघ्रं नोग्रं कश्चिदवारय़त् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
महेष्वासं नरव्याघ्रं भीष्मं शान्तनवं यय़ौ ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
महेष्वासं पराक्रान्तं नरव्याघ्रमवारय़न् ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
महेष्वासं महावीर्यं महासत्त्वं महाभुजम् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
महेष्वासः शूरतमः कुरूणां; दुःशासनं कुशलं तात पृच्छेः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
९४
गङ्गो उवाच
महेष्वासमिमं राजन्राजधर्मार्थकोविदम् |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
महेष्वासवरैर्गुप्तं द्रोणानीकं विभित्सवः ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
महेष्वासा राजपुत्रा भ्रातरः पञ्च केकय़ाः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
महेष्वासा राजपुत्रा भ्रातरः पञ्च केकय़ाः |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
महेष्वासाः स्थपतय़ः सांवत्सरचिकित्सकाः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
महेष्वासेन रौद्रेण पाण्डवा अभ्ययुञ्जत ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
महेष्वासैर्वृतो राजन्महेष्वासो व्यवस्थितः ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
महेष्वासो महीभर्ता श्रीनिवासः सतां गतिः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
महेष्वासो रथिनामुत्तमो यः; सहामात्यः कुशलं तस्य पृच्छेः ||
२१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
महेष्वासो हतः शेते नद्या हृत इव द्रुमः ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
महेष्वासोऽन्वगात्पश्चाद्युय़ुत्सुः सात्यकिस्तथा ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
महोत्साहं महावाहुं दीर्घराजीवलोचनम् |
३० क
विराट पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
महोत्साहा भविष्यन्ति पाण्डवा ह्यतितेजसः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
महोत्साहा महात्मानो धार्मिकाः सत्यवादिनः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
महोत्साहा महावीर्याः परस्परवधैषिणः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
महोत्साहो महावीर्यो महासत्त्वपराक्रमः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
महोत्साहो विनीतात्मा सुक्रतुर्नैषधो नलः ||
१७५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१
सूत उवाच
महोदधिः सतिमितिमिङ्गिलस्तथा; महोर्मिमान्वहुमकरो झषालय़ः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
महोदधिगुणाभ्यासाल्लवणत्वं निगच्छति ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
महोदधिमिवापूर्णमापगाभिः समन्ततः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
महोदधिमिवापूर्णमापगाभिः समन्ततः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
धृतराष्ट्र उवाच
महोदधिरिवाक्षोभ्यो रामो दाशरथिर्यथा ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
महोदरं महाकाय़ं द्वीपिचर्मनिवासिनम् |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
महोदरं महेष्वासं नाराचेन स्तनान्तरे |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
महोदरस्तु समरे भीमं विव्याध पत्रिभिः |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
महोदरस्य तल्लग्नं जङ्घाय़ां वै यदृच्छय़ा |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
महोदय़ो ह्यलर्कश्च ऐलश्चैव नराधिपः |
४५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
महोपनिषदं चैव योगमास्थाय़ वीर्यवान् |
११२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
महोरग वराहाद्य हरिकेश विभो जय़ |
४७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
महोरगः कृतवैरोऽर्जुनेन; किरीटमासाद्य समुत्पपात ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
महोरगगणाश्चैव सुपर्णाश्चोरगादय़ः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
महोर्मिणमिवोद्धूतं श्वसनेन महार्णवम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
महोर्मिनद्धं सुमहत्तिमिनेव नदीमुखम् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
महोल्काप्रतिमा घोरास्तत्र तत्र विशां पते ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
महोल्काभ्यां यथा राजन्सार्चिषः स्नेहविन्दवः ||
८६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
महोल्केव च भीष्मस्य मूर्धदेशाज्जनाधिप |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१५
सूत उवाच
महौघवलमश्वानामुत्तमं जवतां वरम् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
महौघवेगं समरे वारय़ामास पाण्डवः ||
२९ ख