अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
लोकय़ात्रा च द्रष्टव्या धर्मश्चात्महितानि च |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
लोकय़ात्रा न चैव स्यादथ चेद्वेत्थ शंस नः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०८
भीष्म उवाच
लोकय़ात्रा समाय़त्ता भूय़सी तेषु पार्थिव ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२३
युधिष्ठिर उवाच
लोकय़ात्रा हि कार्त्स्न्येन त्रिष्वेतेषु प्रतिष्ठिता ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
लोकय़ात्रां च पश्यन्तो धर्ममात्महितानि च |
८६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
लोकय़ात्रामिहैके तु धर्ममाहुर्मनीषिणः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
लोकय़ात्रार्थमेवेह धर्मप्रवचनं कृतम् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५१
भीष्म उवाच
लोकय़ात्रार्थमेवेह धर्मस्य निय़मः कृतः |
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
लोकय़ात्राविधानं च दानधर्मफलागमः |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
लोकय़ात्राविधानं च सम्भूतं दृष्टवानृषिः ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
लोकय़ात्राविधानार्थं सञ्जाय़ेते युगे युगे ||
८१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७९
भीष्म उवाच
लोकय़ात्राश्रय़श्चैव शव्दो वेदाश्रय़ः कृतः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
लोकय़ोरुभय़ोर्भ्रष्टो ह्यन्तराले व्यवस्थितः ||
३२ ख
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
लोचनैरनुजग्मुस्ते तमा दृष्टिपथात्तदा |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
लोड्यते रथिभिः श्रेष्ठैस्तत्र तत्रैव भारत ||
५५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
लोड्यमानं तथा दृष्ट्वा पाण्डवानां वलार्णवम् |
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
लोड्यमानं महारण्यं तत्यजुश्च महामृगाः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
लोडय़न्तमनीकानि द्विपं पद्मसरो यथा |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
लोडय़ामास दुःषन्तः सूदय़न्विविधान्मृगान् ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
लोध्राणां च शुभाः पार्थ गौतमौकःसमीपजाः ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय
२०
भीमसेन उवाच
लोपामुद्रा तथा भीरु वय़ोरूपसमन्विता |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
लोपामुद्रा समागम्य भर्तारमवृणीत वै ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
९५
लोमश उवाच
लोपामुद्रां ततः प्रादाद्विधिपूर्वं विशां पते ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
लोपामुद्राभिगमनमपत्यार्थमृषेरपि ||
११४ ख
वन पर्व
अध्याय
९५
लोमश उवाच
लोपामुद्राभिगम्येदं काले वचनमव्रवीत् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
९४
लोमश उवाच
लोपामुद्रेति तस्याश्च चक्रिरे नाम ते द्विजाः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६६
भीष्म उवाच
लोभं मोहं च सन्तोषाद्विषय़ांस्तत्त्वदर्शनात् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२६२
मार्कण्डेय़ उवाच
लोभं सौवीरके कुर्यान्नारी काचिदिति स्मरे ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
लोभः प्रज्ञानमाहन्ति प्रज्ञा हन्ति हता ह्रिय़म् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३६
श्रीभगवानु उवाच
लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
लोभक्रोधपरा मूढाः कामसक्ताश्च मानवाः |
१७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
४
विदुर उवाच
लोभक्रोधमदोन्मत्तो नात्मानमववुध्यते ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५३
भीष्म उवाच
लोभक्षय़ाद्दिवं प्राप्तास्तथैवान्ये जनाधिपाः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
लोभजानि तथा राजन्वन्धनानि वलान्विताः |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
लोभप्रजनसंय़ुक्ता निर्विशेषा ह्यकिञ्चनाः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५३
भीष्म उवाच
लोभप्रभवमज्ञानं वृद्धं भूय़ः प्रवर्धते |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०८
भीष्म उवाच
लोभमेको हि वृणुते ततोऽमर्षमनन्तरम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
लोभमोहतृणच्छन्नां कामक्रोधसरीसृपाम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८५
भृगुरु उवाच
लोभमोहपरित्यक्ता मानवा निरुपद्रवाः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
लोभमोहपरीताश्च मिथ्याधर्मध्वजावृताः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
लोभमोहसमापन्नं न दैवं त्राय़ते नरम् ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
लोभमोहसमाविष्टः पुत्रप्रीत्या जनाधिप |
३३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
लोभमोहसमाय़ुक्तास्ते वै निरय़गामिनः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
लोभमोहादिभिर्भावैस्ततो नो भय़माविशत् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६५
भीष्म उवाच
लोभमोहाभिभूतस्य रागद्वेषान्वितस्य च |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
लोभमोहाभिभूताश्च त्यक्ता देवैस्ततो नराः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
लोभमोहाभिभूतास्ते पुत्रास्तं गौतमादय़ः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८५
भृगुरु उवाच
लोभश्चार्थकृतो नॄणां येन मुह्यन्ति पण्डिताः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
लोभस्य ज्ञाननाशस्य द्रोहस्यात्याहितस्य च ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
लोभस्य वशमापन्नाः सर्वे भारतसत्तम ||
१७ ख