आदि पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रावकथय़ंस्ते विप्राः प्रीतमानसाः |
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रावपि तथा युध्यमानौ वलोत्कटौ |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रावपि तथा हय़ारोहैः सुसंवृतौ |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रावभिक्रुद्धावुभावप्यभ्यधावताम् ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रेण कौरव्य पाण्डवा अभ्ययुञ्जत ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रेण वीरेण रथमारोपय़त्तदा ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ च भीमं च राजानं च युधिष्ठिरम् ||
१५७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रौ च भीमस्य चित्तज्ञावन्वमोदताम् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
कुन्त्यु उवाच
माद्रीपुत्रौ च वक्तव्यौ क्षत्रधर्मरतावुभौ |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीपुत्रौ च वक्तव्यौ क्षत्रधर्मरतौ सदा |
७७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ च विक्रान्तौ त्रिदशानामिवेश्वरौ ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ च शकुनिं सात्यकिश्च महारथः ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ च शकुनिं सात्यकिश्च महावलः |
६५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ च संरव्धौ द्वाभ्यां द्वाभ्यामताडय़त् ||
३१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ च संरव्धौ शरैरर्दय़तां मृधे ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ च सहितौ द्रौपदेय़ाश्च दंशिताः |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ ततः शूरौ व्यतिक्रम्य महारथौ |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ तथा शूरौ द्रौपद्याः पञ्च चात्मजाः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
माद्रीपुत्रौ तु रथिनौ द्वावेव पुरुषर्षभौ |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ तु शकुनिमुलूकं च महारथौ |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ तु संरव्धौ भीमसेनं च पाण्डवम् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ तु समरे मातुलं मातृनन्दनौ |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
माद्रीपुत्रौ पुष्पफले समृद्धे; मूलं त्वहं व्रह्म च व्राह्मणाश्च ||
४६ ख
सभा पर्व
अध्याय
५८
शकुनिरु उवाच
माद्रीपुत्रौ प्रिय़ौ राजंस्तवेमौ विजितौ मय़ा |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ शतेनाजौ विव्याध निशितैः शरैः ||
५४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
माद्रीपुत्रौ सरभसौ कृतास्त्रौ युद्धदुर्मदौ |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
माद्रीपुत्रौ सृञ्जय़ाश्चापि सर्वे; पुरा युद्धात्साधु तस्य प्रदानम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
माद्रीसुतः शिरो यन्तुः सशिरस्त्राणमच्छिनत् ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीसुतस्ततः प्राय़ाद्विजय़ी दक्षिणां दिशम् ||
३७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीसुतस्तत्परिगृह्य वाक्यं; धर्मेण धर्मप्रतिमस्य राज्ञः |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
माद्रीसुतस्तस्य समुद्यतं तं; प्रासं सुवृत्तौ च भुजौ रणाग्रे |
५६ क
वन पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीसुताभ्यां सहितः किरीटी; सुष्वाप तामावसतिं प्रतीतः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
माद्रीसुताभ्यामुक्ते तु स्वमते कुरुनन्दनः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
माद्रीसुतौ केकय़राजपुत्राः; पाञ्चालपुत्राः सह धर्मराज्ञा ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
माद्रीसुतौ चापि रणाजिमध्ये; सर्वा दिशः सम्पतन्तौ स्मरन्ति |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
माद्रीसुतौ पुष्पफले समृद्धे; मूलं कृष्णो व्रह्म च व्राह्मणाश्च ||
६६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
माधवस्तु भृशं विद्धो राक्षसेन रणे तदा |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
माधवस्तु रणे राजन्कुरुराजस्य धन्विनः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
माधवस्तु रणे विद्धो धर्मपुत्रेण मारिष |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
माधवस्तु वचः श्रुत्वा फल्गुनस्य महात्मनः |
७० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
माधवस्तु सुसङ्क्रुद्धो राक्षसं नवभिः शरैः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
माधवस्य तु विद्धस्य तोमरेण महारणे |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
नारद उवाच
माधवाः कुकुरा भोजाः सर्वे चान्धकवृष्णय़ः |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
माधवाः कुरुशार्दूल परां मुदमवाप्नुवन् ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११६
नारद उवाच
माधवी गालवं विप्रमन्वय़ात्सत्यसङ्गरा ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
माधवी च पुनर्दीप्तां परित्यज्य नृपश्रिय़म् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११५
नारद उवाच
माधवी जनय़ामास पुत्रमेकं प्रतर्दनम् ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
माधवी शुभवक्त्रा च तीर्थनेमिश्च भारत |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११९
नारद उवाच
माधवीं प्रेक्ष्य राजानस्तेऽभिवाद्येदमव्रुवन् ||
२० ख