वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
भ्राता वै राक्षसेन्द्रस्य चतुर्भिः सचिवैः सह ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
भ्राता शत्रुः क्लिन्नपाणिर्वय़स्य; आत्मा ह्येकः सुखदुःखस्य वेत्ता ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुः क्षेत्रेषु कल्याणमपत्यं जनय़िष्यति ||
१५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
भ्रातुः पितृष्वसेय़स्य व्यपनेष्यामि दारुक ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय
९९
व्यास उवाच
भ्रातुः पुत्रान्प्रदास्यामि मित्रावरुणय़ोः समान् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुः प्रिय़मभीप्सन्वै चकार सुमहद्वपुः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
भ्रातुः सर्वैर्गुणैस्तुल्यो रथी पाण्डवमभ्ययात् ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
भ्रातुरन्वेषणं कृत्वा धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
भ्रातुरस्य हितं वाक्यं शृणु धर्मज्ञसत्तम |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
भ्रातुरागमनं चैव चिन्तय़न्पर्यतप्यत ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुरेतद्वचः श्रुत्वा धार्तराष्ट्रः सुय़ोधनः |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय
४०
अर्जुन उवाच
भ्रातुर्निय़ोगाज्ज्येष्ठस्य संवत्सरमिदं व्रतम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुर्निय़ोगात्तु युधिष्ठिरस्य; वनादसौ वारणमत्तगामी |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०८
भीष्म उवाच
भ्रातुर्भार्या च तद्वत्स्याद्यस्या वाल्ये स्तनं पिवेत् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
भ्रातुर्भार्यां तु दुर्वुद्धिर्यो धर्षय़ति मोहितः |
६७ क
आदि पर्व
अध्याय
१३९
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुर्वचनमाज्ञाय़ त्वरमाणेव राक्षसी |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
भ्रातुर्वचनमाज्ञाय़ त्वरमाणो वृकोदरः |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुर्वचनमाज्ञाय़ पाण्डवा धर्मचारिणः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुर्वचनमाज्ञाय़ भीमसेनो घटोत्कचम् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१८३
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुर्वचस्तत्प्रसमीक्ष्य सर्वे; ज्येष्ठस्य पाण्डोस्तनय़ास्तदानीम् |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातुर्विचित्रवीर्यस्य विवाहाय़ोपचक्रमे |
४६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
भ्रातुर्विचित्रवीर्यस्य समाज्ञापय़त प्रभुः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भ्रातुर्वीरस्य स्वैस्तुरङ्गैर्विशिष्टा; मुदा युक्ताः सहदेवं वहन्ति ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
भ्रातुस्तद्वचनं श्रुत्वा पाण्डवः श्वेतवाहनः |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
भ्रातुस्तद्वचनं श्रुत्वा पुत्रो दुःशासनस्तव |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
४४
सूत उवाच
भ्रातुस्त्वरितमागम्य यथातथ्यं तपोधन ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृज्येष्ठः स्थितो राज्ये विन्दसे किं न शोभनम् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३२
व्रह्मो उवाच
भ्रातृणां तव सर्वेषां न शोकं कर्तुमर्हसि ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृत्वं त्वं पुरस्कृत्य वरं वरय़ भारत ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
धृतराष्ट्र उवाच
भ्रातृत्वं दर्शितं पूर्वं घृणी चापि स सूतजः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृत्वात्सौहृदाच्चापि करिष्यामि तव प्रिय़म् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृन्प्रति चकर्षाथ सोऽस्त्रपातादचेतसम् ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृपद्मवनात्तस्मान्मदोत्कट इव द्विपः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
भ्रातृभावेन पृथिवीं भुङ्क्ष्व पाण्डुसुतैः सह ||
५१ ख
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः पञ्चभिः कृष्णो वृतः शक्र इवामरैः ||
९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः पितृभिः पुत्रैरुपकीर्णां वसुन्धराम् ||
५६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५२
धृतराष्ट्र उवाच
भ्रातृभिः श्वशुरैः पुत्रैरुपपन्नो महारथैः ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय
१९
द्रौपद्यु उवाच
भ्रातृभिः श्वशुरैः पुत्रैर्वहुभिः परवीरहन् |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः समय़ं कृत्वा क्षान्तवान्धर्मवत्सलः |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
धृतराष्ट्र उवाच
भ्रातृभिः सह कौन्तेय़ निवोधेदं वचो मम |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः सह कौन्तेय़ यत्त्वां वक्ष्यामि कौरव ||
९ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः सह कौन्तेय़ः शुना चैव युधिष्ठिरः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः सह कौन्तेय़स्त्रीन्मेधानाहरिष्यति ||
६५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः सह कौन्तेय़ो ददर्शाश्रममण्डलम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः सह कौरव्य शय़ानं निम्नगासुतम् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
भ्रातृभिः सह पुत्रैश्च सोऽभ्यरक्षत पृष्ठतः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
भ्रातृभिः सह पुत्रैश्च सोऽभ्यरक्षद्युधिष्ठिरम् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातृभिः सह राजेन्द्र कृष्णय़ा चानय़ा सह ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
भ्रातृभिः सह राजेन्द्र शूरः सत्यपराक्रमः |
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
कुन्त्यु उवाच
भ्रातृभिः सहितः श्रीमांस्त्रीन्मेधानाहरिष्यति ||
५ ख