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शान्ति पर्व
अध्याय १३०
भीष्म उवाच
मार्दवादथ लोभाद्वा ते व्रूय़ुर्वाक्यमीदृशम् ||
१५ ग
वन पर्व
अध्याय २०६
व्याध उवाच
मारय़त्यकृतप्रज्ञं वालं क्रुद्ध इवोरगः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
मारय़न्ति विकर्मस्थं लुव्धा मृगमिवेषुभिः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
मालका मल्लकाश्चैव तथैवापरवर्तकाः |
६१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
मालवं त्रिभिरेकेन पार्थं षड्भिर्वृकोदरम् ||
५८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
मालवा मद्रकाश्चैव द्रविडाश्चोग्रविक्रमाः |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
मालवास्तुण्डिकेराश्च रथानामय़ुतैस्त्रिभिः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
मालवैर्दाक्षिणात्यैश्च आवन्त्यैश्च समन्वितः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
मालव्यां मालवा नाम शाश्वताः पुत्रपौत्रिणः |
५८ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
माला इव समासक्ताः शैलानां शिखरेषु च ||
६२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
मालाकार इवारामे न यथाङ्गारकारकः ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय ५५
विदुर उवाच
मालाकार इवारामे स्नेहं कुर्वन्पुनः पुनः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७२
भीष्म उवाच
मालाकारोपमो राजन्भव माङ्गारिकोपमः |
२० क
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
मालिनी जनय़ामास पुत्रमेकं विभीषणम् |
८ क
विराट पर्व
अध्याय ८
द्रौपद्यु उवाच
मालिनीत्येव मे नाम स्वय़ं देवी चकार सा |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
मालिनीमभितो राजन्नदीं पुण्यां सुखोदकाम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
माल्यं च जलकुम्भांश्च ज्वलितं च हुताशनम् ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
माल्यगन्धानलङ्कारान्वस्त्राणि विविधानि च |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
माल्यजप्यनमस्कारैर्गन्धैरुच्चावचैरपि |
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
माल्यदामपरिक्षिप्ता विधिवत्क्रिय़तेऽपि च ||
२० ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
माल्यदामभिरासक्तै राजवेश्माभिसंवृतम् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
माल्यदामवता राजा श्वेतच्छत्रेण धार्यता |
१८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
माल्यप्रवरसंय़ुक्ते धूपैश्चूर्णैश्च वासिते ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
माल्यानि च महार्हाणि रत्नानि विविधानि च ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
माल्यानि च सुगन्धीनि तानि राजा ददौ ततः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ११३
विभाण्डक उवाच
माल्यानि चैतानि न वै मुनीनां; स्मृतानि चित्रोज्ज्वलगन्धवन्ति ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
माल्यैर्गन्धैश्च विविधैः पूजय़ित्वा यथाविधि |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
माल्यैश्च विविधैर्युक्तं युक्तं वार्ष्णेय़पार्थय़ोः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
मावमंस्था न तपसामसाध्यं नाम किञ्चन ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
अर्जुन उवाच
मावमंस्था ममास्त्राणि मावमंस्था धनुर्दृढम् |
५२ क
वन पर्व
अध्याय १२४
च्यवन उवाच
मावमंस्था महात्मानौ रूपद्रविणवत्तरौ |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
मावमंस्था महावाहो कर्णमाहवशोभिनम् ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
मावमंस्था मय़ा कर्म दुष्कृतं कृतमित्युत ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
मावमंस्था वचो मह्यं गुरुस्तव गुरोर्ह्यहम् ||
९८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
भीष्म उवाच
मावमंस्था वचो मह्यं शममिच्छामि वः सदा ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
अर्जुन उवाच
मावमंस्था वलं वाह्वोर्मावमंस्था धनञ्जय़म् ||
५२ ख
सभा पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
मावमंस्थाः परान्राजन्नास्ति वीर्यं नरे नरे |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय १४०
भीम उवाच
मावमंस्थाः पृथुश्रोणि मत्वा मामिह मानुषम् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
मावमंस्थाः स्त्रिय़ः पुत्र मा च विप्रान्कदाचन |
७३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
मावेल्लकास्तुण्डिकेराः सावित्रीपुत्रकाञ्चलाः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
माषपुष्पसवर्णास्तमवहन्वाजिनो रणे ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
माषवर्णास्तु जवना वृहन्तो हेममालिनः |
४५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
मासः समधिको ह्येषामतीतो वसतां वने ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
मासः स्मृतो रात्र्यहनी च त्रिंश; त्संवत्सरो द्वादशमास उक्तः |
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
मासजातस्तु ते वीर पिता भवति भारत |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१४
भीष्म उवाच
मासपक्षोपवासेन मन्यन्ते यत्तपो जनाः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
मासमात्रेण सञ्जज्ञे कन्या चैका शताधिका ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
मासमेकं तु गङ्गाय़ां समौ स्यातां न वा समौ ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
मासमेकं फलाहारो द्वितीय़ं सलिलाशनः |
५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
मासमेकं विजह्रुस्ते ससैन्यान्तःपुरा वने |
७ क