शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
ममेय़मिति मोहात्त्वं राजश्रिय़मभीप्ससि ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
ममैतदिति नैकस्य मनुष्येष्ववतिष्ठते |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
ममैतद्वचनं धर्म्यं कर्तुमर्हस्यनिन्दिते ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
ममैतानि सदा गर्भे पृश्निगर्भस्ततो ह्यहम् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
ममैतास्तनवः श्रेष्ठा जाता धर्मगृहे द्विज |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११९
व्यास उवाच
ममैव कीट तत्कर्म येन त्वं न प्रमुह्यसे ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ममैव च प्रहारेण जीविताद्व्यवरोपितः ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
ममैव तान्यपत्यानि मम शुक्रं हुतं हि तत् ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
ममैव तान्यपत्यानि वरुणो ह्यवशात्मकः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
ममैव त्वं तवैवाहं ये मदीय़ास्तवैव ते |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४५
सनत्सुजात उवाच
ममैव यूय़मात्मस्था न मे यूय़ं न वोऽप्यहम् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५०
कुन्त्यु उवाच
ममैव वचनादेष करिष्यति परन्तपः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
१८७
देव उवाच
ममैव विद्धि रूपाणि सर्वाण्येतानि सत्तम ||
२० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
ममैव ह्यपराधेन कुलमग्र्यं विनाशितम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
वासुदेव उवाच
ममैवं क्लिश्यमानस्य नारदोभय़तः सदा |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
ममैवं धिक्कृतस्येह कर्णेनाहवशोभिना ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३७
श्रीभगवानु उवाच
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
ममैवानुचरो नित्यं भवितासीति चाव्रवीत् ||
५६ ग
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ममैवाय़ं लक्ष्यभूतः पूर्वमेव परिग्रहः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९२
वसिष्ठ उवाच
ममैवैतानि जाय़न्ते वाधन्ते तानि मामिति ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
६९
शकुन्तलो उवाच
ममैवोद्रिच्यते जन्म दुःषन्त तव जन्मतः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
ममैष भारः सर्वो हि हनिष्यामि यतव्रतम् ||
६७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२११
वैशम्पाय़न उवाच
ममैषा भगिनी पार्थ सारणस्य सहोदरा |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
ममैषा सुप्रिय़ा भार्या नैनामुत्स्रष्टुमुत्सहे ||
१९ ग
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
मम्लुर्माल्यानि देवानां शेमुस्तेजांसि चैव हि |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
मम्लुश्च वहवो राजंश्चुकूजुश्चापरे तथा ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
मरणं चान्धतामिस्रं तामिस्रं क्रोध उच्यते |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
मरणं जन्म दुःखं च सुखं च स विमुञ्चति ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८७
पराशर उवाच
मरणं जन्मनि प्रोक्तं जन्म वै मरणाश्रितम् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
११०
पाण्डुरु उवाच
मरणं जीवितं चैव नाभिनन्दन्न च द्विषन् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
मरणं ते सुखं मन्ये तिर्यग्योनौ हि वर्तसे ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३६
व्रह्मो उवाच
मरणं त्वन्धतामिस्रं तामिस्रं क्रोध उच्यते ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
मरणं धर्मतत्त्वज्ञ न मां शङ्कितुमर्हसि ||
१८१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
मरणं प्रतिगच्छन्ति भोक्तुं सुकृतदुष्कृतम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
मरणं प्राप्तवान्मूढो यथैवोपहतेन्द्रिय़ः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२९७
युधिष्ठिर उवाच
मरणं मानुषो भावः परिवादोऽसतामिव ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९४
वामदेव उवाच
मरणान्तमिदं सर्वं नेह किञ्चिदनामय़म् |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
मरणाय़ महावुद्धिं दीक्षय़ित्वा विकत्थसे ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
मरणे जन्मनि तथा मध्ये चाविशते नरम् ||
५४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
मरणोत्पातजं दुःखमाहुर्धर्मविदो जनाः ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
मरिष्याम्यधनस्येह जीवितार्थो न विद्यते ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
मरीचिः कश्यपं तात पुत्रं चासृजदग्रजम् |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
मरीचिः शिचुका चैव विद्युत्पर्णा तिलोत्तमा |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
मरीचिपाः फेनपाश्च तथैव मृगचारिणः ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
मरीचिभिरिवार्कस्य संस्यूतो जलदो महान् ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
वसिष्ठ उवाच
मरीचिभ्यो मरीचिस्तु मारीचः कश्यपो ह्यभूत् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
मरीचिमत्र्यङ्गिरसौ पुलस्त्यं पुलहं क्रतुम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
मरीचिमादितः कृत्वा सर्वे चैवाथ भार्गवाः |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
मरीचिमृषिमत्रिं च पुलस्त्यं पुलहं क्रतुम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
मरीचिरङ्गिरा अत्रिः पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः ||
२० ख