chevron_left  महाद्विपमिवारण्येarrow_drop_down
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
महाद्विपमिवारण्ये सिंहेन महता हतम् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
महाद्विपस्कन्धगतः पिङ्गलः प्रिय़दर्शनः |
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
महाद्विपेनेव वने मत्तेन हरिय़ूथपम् ||
५० ग
सभा पर्व
अध्याय ६७
शकुनिरु उवाच
महाधनं ग्लहं त्वेकं शृणु मे भरतर्षभ ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
कृष्ण उवाच
महाधनं शिल्पिवरैः प्रय़त्नतः; कृतं यदस्योत्तमवर्म भास्वरम् |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
महाधनानि दिव्यानि महान्ति च लघूनि च ||
८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
महाधनुर्ज्यातलनेमिघोषं; तनुत्रनानाविधशस्त्रहोमम् ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
कृष्ण उवाच
महाधनुर्मण्डलनिःसृतैः शितैः; क्रिय़ाप्रय़त्नप्रहितैर्वलेन च |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
महाधनुर्मण्डलमध्यगावुभौ; सुवर्चसौ वाणसहस्ररश्मिनौ |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १३८
सञ्जय़ उवाच
महाधनैराभरणैश्च दिव्यैः; शस्त्रैः प्रदीप्तैरभिसम्पतद्भिः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८४
धृतराष्ट्र उवाच
महाध्वजपताकाश्च क्रिय़न्तां सर्वतोदिशम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
महाध्वजेन सिंहेन हेमकेसरमालिना |
५७ क
सभा पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
महाध्वरे महावुद्धिस्तस्थौ स वहुमानतः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
महानखो महारोमा महाकेशो महाजटः |
८६ क
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
महानगं यः कुरुते समुद्रं; वेलैव तं वारय़त्यप्रमेय़म् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ४६
सूत उवाच
महानतिक्रमो ह्येष तक्षकस्य दुरात्मनः |
४० क
वन पर्व
अध्याय २०९
मार्कण्डेय़ उवाच
महानत्यर्थमहितस्तथा भरतसत्तम ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
महानदी च कौरव्य तथा मणिजला नदी |
३० ख
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
महानदी च तत्रैव तथा गय़शिरोऽनघ |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
महानदी चर्मराशेरुत्क्लेदात्सुस्रुवे यतः |
११६ क
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
महानदीं गय़ां चैव गङ्गामपि च भारत ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
महानदीं हि पारज्ञस्तप्यते न तरन्यथा |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय १११
वैशम्पाय़न उवाच
महानदीनितम्वांश्च दुर्गांश्च गिरिगह्वरान् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १९
सूत उवाच
महानदीभिर्वह्वीभिः स्पर्धय़ेव सहस्रशः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
महानद्यामुपस्पृश्य तर्पय़ेत्पितृदेवताः |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
व्राह्मण उवाच
महानधर्मो भविता तव राजन्मृषाकृतः ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय ६९
वृहदश्व उवाच
महानध्वा च तुरगैर्गन्तव्यः कथमीदृशैः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११३
धृतराष्ट्र उवाच
महानपनय़ः सूत ममैवात्र विशेषतः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
कृप उवाच
महानपनय़स्त्वेष तव नित्यं हि सूतज |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३६
विदुर उवाच
महानप्येकजो वृक्षो वलवान्सुप्रतिष्ठितः |
६० क
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
महानभूत्ततः शव्दो वंशानामिव दह्यताम् ||
३४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
महानसं व्राह्मणानां भविष्याम्यर्थवान्पुनः |
५ क
वन पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
महानसव्यापृतैश्च तथान्यैः परिचारकैः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय ७३
वृहदश्व उवाच
महानसाच्छृतं मांसं समादाय़ैहि भामिनि ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
महानसे तदान्नं तु साधय़ामास पाण्डवः ||
५ ख
मौसल पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
महानसेषु सिद्धेऽन्ने संस्कृतेऽतीव भारत |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३५
व्रह्मो उवाच
महानात्मा तथाव्यक्तमहङ्कारस्तथैव च |
३७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४०
व्रह्मो उवाच
महानात्मा मतिर्विष्णुर्विश्वः शम्भुश्च वीर्यवान् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
महानात्मा मतिर्व्रह्मा विश्वः शम्भुः स्वय़म्भुवः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
महानासीत्समुद्धूतस्तस्य सैन्यस्य निस्वनः ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
महानासो महाकम्वुर्महाग्रीवः श्मशानधृक् |
८४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
महानिति च योगेषु विरिञ्च इति चाप्युत ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
महानिर्घातघोषश्च सम्प्रहारस्तय़ोरभूत् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
महानिलेनाग्निमिवापविद्धं; यज्ञावसाने शय़ने निशान्ते ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
महानुभावः कालान्ते रौद्रीं भीरुविभीषणाम् ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय १९०
वैशम्पाय़न उवाच
महानुभावा किल सा सुमध्यमा; वभूव कन्यैव गते गतेऽहनि ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
महानुभावो नरराजसत्कृतो; दुरासदस्तीक्ष्णविषो यथोरगः ||
२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
महानुभावो मत्स्यस्य ध्वज उच्छिश्रिय़े तदा ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १००
नारद उवाच
महानुभावय़ा नित्यं मातले विश्वरूपय़ा ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
महानृषिश्च कपिलस्तथर्षिस्तारकाय़नः |
५५ क