वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
महागङ्गामुदीक्षस्व पुण्यां देवनदीं शुभाम् |
८५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
महागङ्गामुपस्पृश्य कृत्तिकाङ्गारके तथा |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
महागज इवास्रावी प्रभञ्जन्विविधान्द्रुमान् ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
महागज इवोद्दामश्चिक्रीड वलवद्वली |
५४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
महागजमहाग्राहः पताकाशैवलाकुलः ||
५० ख
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
महागजमिवारण्ये व्याधेन विनिपातितम् ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
महागजाभ्राकुलमस्त्रतोय़ं; वादित्रनेमीतलशव्दवच्च |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
महागजाविवासाद्य विषाणाग्रैः परस्परम् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
महागजाविवासाद्य विषाणाग्रैः परस्परम् |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
महागमान्दूरगमान्गणितानर्वुदं हय़ान् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
महागम्भीरनिर्घोषा नभो नादय़ती तदा ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
महागिरौ वेणुवनं निशि प्रज्वलितं यथा |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महागीतो महानृत्तो ह्यप्सरोगणसेवितः |
११४ क
वन पर्व
अध्याय
३५
युधिष्ठिर उवाच
महागुणं हरति हि पौरुषेण; तदा वीरो जीवति जीवलोके ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
महागुणो वधो राजन्न तु निन्दा कुजीविका ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
महाग्रहाविव क्रूरौ युगान्ते समुपस्थितौ ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
महाग्राहगृहीतेव वातवेगभय़ार्दिता |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
महाघोराणि कर्माणि कृत्वा लज्जन्ति वै न च ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
महाघोषं महामेघं दर्दुरः प्रतिनर्दसि |
४३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
महाचमूकक्षवराभिपन्नं; महाहवे भीष्ममहादवाग्निम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
महाचापानि धुन्वन्तो जलदा इव विद्युतः |
१७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
महाजगरवक्त्राश्च हंसवक्त्राः सितप्रभाः ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
महाजठरपादाङ्गास्तारकाक्षाश्च भारत |
८० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५२
युधिष्ठिर उवाच
महाजना ह्युपावृत्ता राजधर्मं समाश्रिताः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
महाजलधरान्व्योम्नि मातरिश्वा विवानिव ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
महाजवं महाकाय़ं महामाय़मरिन्दमम् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
महाजालसमाकृष्टान्स्थले मत्स्यानिवोद्धृतान् |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
महाझषस्येव मुखं प्रपन्नाः; प्रभद्रकाः कर्णमभि द्रवन्ति |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
महातपस्वी भगवानुग्रतेजा महातपाः |
३२ ग
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
महातपस्वी स्वाध्याय़सम्पन्नो मत्तपोवीर्यसम्भृतो मच्छुक्रं पीतवत्यास्तस्याः कुक्षौ संवृद्धः |
१५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महातपा घोरतपा अदीनो दीनसाधकः |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
पराशर उवाच
महातपा महातेजा महाय़ोगी महाय़शाः |
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
महातपा महातेजा वाल एव गुणैर्युतः ||
४५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
महाता शरवर्षेण भृशं तं समवाकिरत् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
महातेजा महावाहुर्यः स राजा महाय़शाः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
६५
मेनको उवाच
महातेजाः स भगवान्सदैव च महातपाः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४३
भीष्म उवाच
महातेजाः सर्वगः सर्वसिंहः; कृष्णो लोकान्धारय़ते तथैकः |
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
महात्मनः शङ्खचक्रासिपाणे; र्विष्णोर्जिष्णोर्वसुदेवात्मजस्य |
४८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
महात्मनश्चागमने विदित्वा; प्रय़ोजनं केशवमित्युवाच ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
युधिष्ठिर उवाच
महात्मना भगवता रामेण यदुपुङ्गव |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
महात्मनां च गुह्यानि न वक्तव्यानि कर्हिचित् ||
१०८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
महात्मनां च चरितं श्रोतव्यं नित्यमेव ते ||
१४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
पराशर उवाच
महात्मनां समुत्पत्तिस्तपसा भावितात्मनाम् ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
महात्मने क्षितिपते तत्सुवर्णमवाप्स्यसि |
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
अगस्त्य उवाच
महात्मने तदर्थं च नास्माभिर्विनिपात्यते ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
महात्मनेऽग्निपुत्राय़ महावलपराक्रमौ ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
महात्मनो मुखात्तस्य विवृतात्पुरुषोत्तम ||
११३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९८
याज्ञवल्क्य उवाच
महात्मभिरनुप्रोक्तां कालसङ्ख्यां निवोध मे ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
महात्मभिर्धर्मभृतां वरिष्ठै; र्महर्षिभिर्भूषितमग्निकल्पैः ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
महात्मा चारुसर्वाङ्गः कम्वुग्रीवो महाभुजः |
२८ क