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शान्ति पर्व
अध्याय २१४
भीष्म उवाच
मुनिश्च स्यात्सदा विप्रो दैवतं च सदा भजेत् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
मुनींश्च धारय़न्तीह प्रजाश्चैवापि कर्मणा |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
मुनींश्चैवाभिवाद्याथ यमुनातीर्थमागमत् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
मुनीनामप्यहं व्यासः कवीनामुशना कविः ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय १८८
वैशम्पाय़न उवाच
मुने भार्गव यद्वृत्तं युगादौ प्रभवाप्ययौ ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ४६
मन्त्रिण ऊचुः
मुनेः क्षुत्क्षाम आसज्य स्वपुरं पुनराय़यौ ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
मुनेः पार्श्वगतो नित्यं शारभ्यं सुखमाप्तवान् ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
मुनेः समादधानस्य प्रथमं ध्यानमादितः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११८
सञ्जय़ उवाच
मुनेरिवारण्यगतस्य तस्य; न तत्र कश्चिद्वधमभ्यनन्दत् ||
५० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४२
व्रह्मो उवाच
मुनेर्जनपदत्यागादध्यात्माग्निः समिध्यते ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय २४६
व्यास उवाच
मुनेस्त्यागविशुद्ध्या तु तदन्नं वृद्धिमृच्छति ||
१० ख
मौसल पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
मुनय़ः क्रोधरक्ताक्षाः समीक्ष्याथ परस्परम् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
मुनय़ः सत्यनिरता मुनय़ः सत्यविक्रमाः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
मुनय़ः सत्यशपथास्तस्मात्सत्यं विशिष्यते |
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
मुनय़श्च महाभागाः सिद्धाश्चैवोर्ध्वरेतसः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
मुनय़ो धर्मसहिता धृतात्मानो जितेन्द्रिय़ाः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
मुनय़ो वालखिल्याश्च ये चान्ये देवतागणाः ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
मुमुक्षमाणास्त्वत्तश्च न वय़ं व्राह्मणव्रुवाः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय २३७
दुर्योधन उवाच
मुमुचुः शरवर्षाणि गन्धर्वान्प्रत्यनेकशः ||
१० ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
मुमुचुः शरवर्षाणि धनञ्जय़वधैषिणः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
मुमुचुः शरवृष्टिं च पाण्डवस्य रथं प्रति ||
१४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
मुमुचुः शोणितं भूरि धातूनिव महीधराः ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
मुमुचुः सूर्यरश्म्याभाञ्शतशः फल्गुनं प्रति ||
४४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
मुमुचुः सैन्धवा राजंस्तदा गाण्डीवधन्वनि ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १६८
अर्जुन उवाच
मुमुचुर्दानवा माय़ामग्निं वाय़ुं च मानद ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
मुमुचुर्देवय़ोषाश्च पुष्पवर्षमनुत्तमम् ||
८३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
मुमुचुश्च महाभागः स्वस्त्यात्रेय़श्च वीर्यवान् ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
मुमुचुश्चाश्रु शोकार्ताः सुषुपुश्चापि सैन्धवाः ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
मुमुचुश्चास्रमत्युष्णं दुःखशोकसमन्विताः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
मुमुचुस्ते महानादं तव पुत्रे निपातिते ||
५१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
मुमुदे तच्च लव्ध्वा स कैलासं धनदो यथा ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय २१०
मार्कण्डेय़ उवाच
मुमुदे परमप्रीतः सह पुत्रैर्महाय़शाः ||
१९ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
मुमुदे भरतश्रेष्ठ प्रसादात्तस्य वै मुनेः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय २७९
मार्कण्डेय़ उवाच
मुमुदे सा च तं लव्ध्वा भर्तारं मनसेप्सितम् ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
मुमूर्षवः पाण्डवाग्नौ प्रदीप्ते; समानीता धार्तराष्ट्रेण सूत ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
सञ्जय़ उवाच
मुमूर्षुर्युय़ुधानेन विरथोऽसि विसर्जितः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ९४
सञ्जय़ उवाच
मुमूर्षुर्हि नरः सर्वान्वृक्षान्पश्यति काञ्चनान् |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ५५
विदुर उवाच
मुमूर्षोरौषधमिव न रोचेतापि ते श्रुतम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
मुमोच कर्णमुद्दिश्य तत्प्रजज्वाल वै भृशम् ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोच गाण्डीवं दुःखात्तत्पपाताथ भूतले ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३९
वाय़ुरु उवाच
मुमोच च जगद्दुःखाद्वरुणं चैव हैहय़ ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
मुमोच तनय़े वीरे मम रुक्मिणिनन्दने ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
मुमोच तीक्ष्णं नाराचं यमदण्डसमद्युतिम् ||
३८ ग
आदि पर्व
अध्याय ११६
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोच दुःखजं शव्दं पुनः पुनरतीव ह ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितांस्तीक्ष्णान्नाराचान्पञ्चविंशतिम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्वाणाञ्जिघांसुः शिनिपुङ्गवम् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्वाणाञ्ज्वलितान्पन्नगानिव ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्वाणाञ्शैनेय़स्य रथं प्रति ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्वाणान्पीडय़न्सुमहावलः |
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्वाणान्पुत्राणां तव मर्मसु ||
५ ख