आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
महाप्रज्ञा वुद्धिमती देवी धर्मार्थदर्शिनी |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
उमो उवाच
महाप्रज्ञास्तथैवान्ये ज्ञानविज्ञानदर्शिनः ||
४५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४०
व्रह्मो उवाच
महाप्रभार्चिः पुरुषः सर्वस्य हृदि निश्रितः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२३
सञ्जय़ उवाच
महाप्रभावा वहवस्त्वय़ा तुल्याधिकापि वा |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
महाप्रभावे वरदे निपातिते; लोकश्रेष्ठे शान्तनवे महौजसि |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
महाप्रभावो व्रह्मर्षिर्देवान्रोषसमन्वितः ||
३३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
महाप्रसादा ऋजवो दृढभक्ता जितेन्द्रिय़ाः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
महाप्रसादान्व्रह्मण्यान्स्वराष्ट्रपरिरक्षिणः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महाप्रसादो दमनः शत्रुहा श्वेतपिङ्गलः |
१३५ क
विराट पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
महाप्रसादो व्रह्मण्यः सत्यवादी च पार्थिवः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
महाप्रस्थानमातिष्ठन्मुच्यते सर्वकिल्विषैः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४३
भीष्म उवाच
महाप्रस्थानमाश्रित्य प्रय़यौ संशितव्रतः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४५
भीष्म उवाच
महाप्रस्थानमाश्रित्य लुव्धकः पक्षिजीवनः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
महाप्रस्थानिकं तस्मादूर्ध्वं सप्तदशं स्मृतम् |
२३० क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
महाप्रस्थानिकं पर्व स्वर्गारोहणिकं ततः ||
६८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
महाप्राज्ञ कुले जातः साध्वेतत्कर्तुमर्हसि |
७ क
सभा पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
महाप्राज्ञः सोमको यज्ञसेनः; कन्यां पाञ्चालीं पाण्डवेभ्यः प्रदाय़ |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
महाप्राज्ञाः सर्वशास्त्रावदाता; धनुर्भृतां मुख्यतमाः पृथिव्याम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
महाफलमनन्तं च भवतीति विनिश्चय़ः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
महाफलविधिर्दाने श्रुतस्ते भरतर्षभ |
५९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
महाभाग कथं यज्ञेष्वागमो नृपते स्मृतः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
६५
मेनको उवाच
महाभागं वसिष्ठं यः पुत्रैरिष्टैर्व्ययोजय़त् |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
श्रीरु उवाच
महाभागा भवत्यो वै शरण्याः शरणागताम् |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
महाभागानमितधीर्व्रह्मा लोकपितामहः |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
महाभागान्देवकल्पान्सत्यार्जवपराय़णान् ||
५१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
महाभागो महातेजा महासत्त्वो महावलः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
महाभागो महावीर्यो महावुद्धिर्भविष्यति ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
महाभाग्यं गवां चैव तथा धर्मविनिश्चय़म् |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
युधिष्ठिर उवाच
महाभाग्यं गवां चैव तन्मे व्रूहि पितामह ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
महाभाग्यं च नृपतेर्भारतस्य यशस्विनः |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
युधिष्ठिर उवाच
महाभाग्यं च यत्तस्य नामानि च महात्मनः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
महाभाग्यं दण्डनीत्याः सिद्धैः शव्दैः सहेतुकैः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
महाभाग्यं परं तेषामृषीणामनुचिन्त्य ते |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
महाभाग्यं परं राज्ञां कीर्त्यमानं मय़ा शृणु |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
भीष्म उवाच
महाभाग्यं विभो व्रूहि मुण्डिनेऽथ कपर्दिने ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
महाभाग्यं हि भीष्मस्य प्रभावश्च महात्मनः |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
५६
जनमेजय़ उवाच
महाभारतमाख्यानं कुरूणां चरितं महत् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
महाभारतमाख्यानं कृतवानिदमुत्तमम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५३
शौनक उवाच
महाभारतमाख्यानं पाण्डवानां यशस्करम् |
३२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
महाभारतमाख्यानं यः पठेत्सुसमाहितः |
५३ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
महाभारतमाख्याय़ पश्चात्सन्ध्यां प्रमुच्यते ||
३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
महाभारतय़ुद्धं तत्कथान्ते पितुरग्रतः ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८२
अर्जुन उवाच
महाभारतय़ुद्धे यत्त्वय़ा शान्तनवो नृपः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
युधिष्ठिर उवाच
महाभारतय़ुद्धे हि कोटिशः क्षत्रिय़ा हताः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२२६
वैशम्पाय़न उवाच
महाभिजनसम्पन्नं भद्रे महति संस्थितम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
महाभिजनसम्पन्नस्तेजसा प्रज्वलन्निव ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
महाभिजनसम्पन्ना श्रीमत्याय़तलोचना |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
महाभिजनसम्पन्ना सर्वकामैः सुपूजिता |
४४ क
विराट पर्व
अध्याय
१८
द्रौपद्यु उवाच
महाभिजनसम्पन्नो वृत्तवाञ्शीलवानिति ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
महाभिष इति ख्यातः सत्यवाक्सत्यविक्रमः ||
१ ख