द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्वाणान्पुनर्द्रौणेर्महोरसि ||
१०७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्वाणान्राक्षसेषु महावलः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
मुमोच निशितान्सङ्ख्ये साय़कान्सव्यसाचिनि ||
११ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
कण्व उवाच
मुमोच पत्राणि तदा गुरुभारप्रपीडितः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
मुमोच परमक्रुद्धस्तस्मिन्घोरे निशाचरे ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
मुमोच परिघं घोरं सोमदत्तस्य मूर्धनि ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
मुमोच परिघं घोरं सोमदत्तस्य वक्षसि ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
मुमोच पुष्पवर्षं च समागलितपादपः ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
मुमोच भरतश्रेष्ठ निशाचरवलं प्रति ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
मुमोच भरतश्रेष्ठ यथा वर्षं सहस्रदृक् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोच भुजवीर्येण विक्रम्य कुरुनन्दनः |
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
मुमोच भुजवीर्येण वैडूर्यविकृताजिराम् ||
७५ ख
वन पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
मुमोच माय़ाविहितं शरजालं महत्तरम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
मुमोच वज्रं सङ्क्रुद्धः शक्रस्त्रिशिरसं प्रति ||
२२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
मुमोच वलवन्नादं वलं हत्वेव वासवः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
मुमोच वाणं तरसा प्रद्युम्नाय़ महावलः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
मुमोच वाणं त्वरितो मर्मभेदिनमाहवे ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
मुमोच वाणांस्त्वरितः पुनरन्यान्दुरासदान् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
मुमोच वाणान्कौरव्य प्रद्युम्नाय़ महावलः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
मुमोच वाणान्दीप्ताग्रानहीनाशीविषानिव ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
मुमोच वाणान्दीप्ताग्रानहीनाशीविषानिव ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
मुमोच वाणान्विशिखान्महात्मा; वधाय़ राजन्सूतपुत्रस्य सङ्ख्ये ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोच वाष्पं दाशेय़ी पुत्रं दृष्ट्वा चिरस्य तम् ||
२३ ग
आदि पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोच वाष्पं शनकैः सभार्यो भृशदुःखितः ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
मुमोच वै चपलमुदग्रवेगव; न्महाप्रभं परनगरावदारणम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
मुमोच शक्तिं राजेन्द्र महासेनो महावलः ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
मुमोच शतशः क्रुद्धो गभस्तीनिव भास्करः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
मुमोच शरवर्षाणि चित्राणि च वहूनि च ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
मुमोच षट्शतान्वाणान्गृहीत्वैकमिव द्रुतम् ||
१४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
मुमोच समरे भीष्मः शरान्पार्थरथं प्रति ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
मुमोच समरे वीरः शरान्पार्थरथं प्रति ||
५७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोच सर्वं वर्माणि मुक्त्वा चैनानवासृजत् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
मुमोच सात्वतो राजन्स्वर्णपुङ्खं शिलाशितम् ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोच साय़कान्दीप्तानहीनाशीविषानिव ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
मुमोचाकर्णपूर्णेन धनुषा शरमुत्तमम् |
१३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
मुमोचाकर्णपूर्णेन धनुषा शरमुत्तमम् |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
४६
सूत उवाच
मुमोचाश्रूणि च तदा नेत्राभ्यां प्रततं नृपः |
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
मुमोचास्त्रं महाराज वाय़व्यं पृतनामुखे ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४३
भीष्म उवाच
मुमोद स्वर्गमास्थाय़ सहभार्यः सशिष्यकः ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
मुमोह दुःखाद्दुर्धर्षा निपपात च भूतले ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
मुमोह सरथिस्तस्य रथशक्त्या समाहतः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
मुमोह सहसा रामो भूमौ च निपपात ह ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
मुरं च नरकं चैव शास्ति यो यवनाधिपौ |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
मुरं हत्वा विनिहत्यौघराक्षसं; निर्मोचनं चापि जगाम वीरः ||
७७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
भीष्म उवाच
मुरजा डिण्डिमाश्चैव प्रावाद्यन्त सहस्रशः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
मुरुं चाचलसङ्काशमवधीत्पुष्करेक्षणः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
मुषिता इव वार्ष्णेय़ द्रोणपुत्रेण पाण्डवाः ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
मुष्टिं मुष्टिं ततः सर्वे दर्भाणां तेऽभ्युपाहरन् |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
मुष्टिदेशे धनुस्तस्य चिच्छेद त्वरय़ान्वितः ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
मुष्टिदेशे महाराज तत उच्चुक्रुशुर्जनाः ||
११ ख