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अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
एवं तु वचनं श्रुत्वा भृगोस्तथ्यं प्रतर्दनः |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
एवं तु वर्तमानस्य तस्य वृत्तिं दुरात्मनः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ६०
वृहदश्व उवाच
एवं तु विलपन्ती सा राज्ञो भार्या महात्मनः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
एवं तु विविधा वाचो जय़युक्ताः पुनः पुनः |
६८ क
वन पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तु व्रुवतस्तस्य मैत्रेय़स्य विशां पते |
२८ क
वन पर्व
अध्याय २०३
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं तु सूक्ष्मे कथिते धर्मव्याधेन भारत |
१ क
वन पर्व
अध्याय १४८
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तुष्टो भविष्यामि श्रद्धास्यामि च ते वचः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते क्षत्रिय़ा राजन्ये व्यतीता महारणे ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
एवं ते जीवितं दद्यामेष युद्धजितो विधिः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय ५५
विदुर उवाच
एवं ते ज्ञातय़ः सर्वे मोदमानाः शतं समाः ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते धर्मराजस्य श्रुत्वा वचनमर्थवत् |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते निहता राजञ्शतं पञ्च च कीचकाः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते न्यवसंस्तत्र पाण्डवा भरतर्षभाः ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते न्यवसंस्तत्र प्रच्छन्नाः कुरुनन्दनाः |
२ क
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते न्यवसंस्तत्र प्रच्छन्नाः पुरुषर्षभाः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते न्यवसंस्तत्र सोत्कण्ठाः पुरुषर्षभाः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
एवं ते पण्डवाः सर्वे पुरस्कृत्य शिखण्डिनम् |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते पुरुषव्याघ्राः पाण्डवा मातृनन्दनाः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
एवं ते पुरुषव्याघ्राः पाण्डवा युद्धनन्दिनः |
४३ क
सभा पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते पुरुषव्याघ्राः सर्वे व्याय़तवाहवः |
४६ क
स्त्री पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते प्रय़युर्वीरा वीक्षमाणाः परस्परम् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय १४१
युधिष्ठिर उवाच
एवं ते भाषमाणस्य वलं भीमाभिवर्धताम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३४
युधिष्ठिर उवाच
एवं ते भाषमाणस्य वलं सौभद्र वर्धताम् |
२७ क
विराट पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते भीरु वध्यन्ते ये त्वां क्लिश्यन्त्यनागसम् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
एवं ते वध्यमानास्तु हतशेषा महागजाः |
३७ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते वर्तमानस्य लोके कीर्तिर्भविष्यति |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
एवं ते वहुधा राजन्प्रमृद्नन्तः परस्परम् ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४२
सनत्सुजात उवाच
एवं ते वान्तमश्नन्ति स्ववीर्यस्योपजीवनात् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
एवं ते विरथाः पञ्च कृपः शल्यश्च मारिष |
१२१ क
आदि पर्व
अध्याय १३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते विलपन्ति स्म वारणावतका जनाः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२४
भीष्म उवाच
एवं ते संविदं कृत्वा विवुधा ऋषय़स्तथा |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते समय़ं कृत्वा कुरुपाण्डवसोमकाः |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते समय़ं कृत्वा गङ्गय़ा वसवः सह |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १८
सूत उवाच
एवं ते समय़ं कृत्वा दासीभावाय़ वै मिथः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते समय़ं कृत्वा न्यवसंस्तत्र पाण्डवाः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
एवं ते समय़ं कृत्वा सर्वे तत्र महारथाः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
एवं ते सहसा राजन्धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२४
भीष्म उवाच
एवं तेनापि कौन्तेय़ वाग्दोषाद्देवताज्ञय़ा |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एवं तेनाभिष्टुतावश्विनावाजग्मतुः |
७१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तेषां कथय़तामौत्सुक्यमभवत्तदा |
८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
एवं तेषां तदा द्रौणिरन्तकः समपद्यत ||
७३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
एवं तेषां तदा युद्धे संसक्तानां जय़ैषिणाम् |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय १७९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तेषां विलपतां विप्राणां विविधा गिरः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तेषामहं सम्यक्षप्तानां राजसत्तम |
४१ क
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
एवं तेषु नराग्र्येषु निर्यत्सु गजसाह्वय़ात् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
एवं तेऽपि महाव्यूहं प्रतिव्यूह्य सुदुर्जय़म् |
३८ क
सभा पर्व
अध्याय ५७
विदुर उवाच
एवं तेऽहं वदामीदं प्रय़तः कुरुनन्दन ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय २०४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तैः समय़ः पूर्वं कृतो नरदचोदितैः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तैश्चोदितो राजन्स विप्रः पुरुषर्षभैः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
एवं तौ तत्र सम्भूतावुभौ शूद्रमुनी तदा |
३३ क