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वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षस्ते भविता राजन्कस्माच्चित्कालपर्ययात् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
मोक्षस्यापि त्रिवर्गोऽन्यः प्रोक्तः सत्त्वं रजस्तमः |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७१
युधिष्ठिर उवाच
मोक्षहेतुरभूत्कृष्णस्तदप्यवधृतं मय़ा ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षार्थं तस्य राष्ट्रस्य जुहाव पुनराहुतिम् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षार्थं मानुषाल्लोकाद्यथावत्कृतवत्यहम् ||
४१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षार्थं रक्षसां तेषामूचुः प्रय़तमानसाः ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षार्थं राक्षसानां च नदीं तां प्रत्यचोदय़न् ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षार्थमकरोद्यत्नं व्राह्मणैः सहितः पुरा |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
मोक्षार्थो विस्तरेणापि भूय़ो वक्ष्यामि तच्छृणु ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
मोक्षाश्मनिशितेनेह छिन्नस्त्यागासिना मय़ा ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८५
भृगुरु उवाच
मोक्षाश्रमं यः कुरुते यथोक्तं; शुचिः सुसङ्कल्पितवुद्धिय़ुक्तः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ४९
सूत उवाच
मोक्षाय़ भुजगेन्द्राणामास्तीको द्विजसत्तमः ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
मोक्षितं पार्षतं दृष्ट्वा द्रोणपुत्रं च पीडितम् ||
५४ ख
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षितश्चासि धर्मज्ञैः पाण्डवैर्न च लज्जसे ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय २३६
जनमेजय़ उवाच
मोक्षितस्य युधा पश्चान्मानस्थस्य दुरात्मनः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३६
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षिता घोषय़ात्राय़ां पर्याप्तं तन्निदर्शनम् ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षिता भीमसेनेन जगाम नगरं प्रति ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
मोक्षिता व्यसनाद्घोराद्वय़मद्य त्वय़ाच्युत ||
११४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
मोक्षितो नरकादस्मि भवता मुनिसत्तम |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय ६६
विराट उवाच
मोक्षितो भीमसेनेन गावश्च विजितास्तथा ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
मोक्षिभिः संस्तुतो नित्यं प्रभुर्नाराय़णो हरिः ||
८ ग
शल्य पर्व
अध्याय ४९
सिद्धा ऊचुः
मोक्षे गार्हस्थ्यधर्मे वा किं नु श्रेय़स्करं भवेत् ||
५९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
मोक्षे ते भावितां वुद्धिं श्रुत्वाहं कुशलैषिणी |
१८७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
मोक्षे निवेशय़ मनो भूय़श्चाप्युपधारय़ ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०१
भीष्म उवाच
मोक्षे प्रय़ाणे चलने पानभोजनकालय़ोः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
मोक्षे हि त्रिविधा निष्ठा दृष्टा पूर्वैर्महर्षिभिः |
३८ क
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
मोक्षो न नूनं कालाद्धि विद्यते भुवि कस्यचित् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
मोक्षो नाराय़णास्त्रस्य पर्वानन्तरमुच्यते ||
५८ ख
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षो वा परमं श्रेय़ एष राजन्सुखार्थिनाम् |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
मोक्ष्यन्ते वारुणाः पाशास्तवेमे कालपर्ययात् |
११० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
मोक्ष्यसे व्रूहि मे प्रश्नं केनास्मि हरिणः कृशः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २३२
युधिष्ठिर उवाच
मोक्षय़ध्वं धार्तराष्ट्रं ह्रिय़माणं सुय़ोधनम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६९
भीष्म उवाच
मोक्षय़ानमिदं कृत्स्नं विदुषां हारितोऽव्रवीत् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षय़ामास तं माता निगीर्य भुजगात्मजा ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २३५
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षय़ामास तान्सर्वान्गन्धर्वान्प्रशशंस च ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३
शौनक उवाच
मोक्षय़ामास भुजगान्दीप्तात्तस्माद्धुताशनात् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षय़ामास योगेन ते मुक्ताः प्राद्रवन्भय़ात् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षय़ामास वीभत्सुर्मय़ं तत्र महासुरम् |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय १६८
गन्धर्व उवाच
मोक्षय़ामास वै घोराद्राक्षसाद्राजसत्तमम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय ६०
वृहदश्व उवाच
मोक्षय़ित्वा च तां व्याधः प्रक्षाल्य सलिलेन च |
२८ क
मौसल पर्व
अध्याय ९
व्यास उवाच
मोक्षय़ित्वा जगत्सर्वं गतः स्वस्थानमुत्तमम् ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षय़ित्वा ततो राष्ट्रं प्रतिगृह्य पशून्वहून् |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
मोक्षय़ित्वा प्रहारं तं सुतस्तव स सम्भ्रमात् |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
मोक्षय़ित्वा स भुजगान्सर्पसत्राद्द्विजोत्तमः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १४९
कुन्त्यु उवाच
मोक्षय़िष्यति चात्मानमिति मे निश्चिता मतिः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय २०९
वर्गो उवाच
मोक्षय़िष्यति शुद्धात्मा दुःखादस्मान्न संशय़ः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय १३९
राक्षस्यु उवाच
मोक्षय़िष्यामि वः कामं राक्षसात्पुरुषादकात् ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय २३३
वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षय़िष्यामि विक्रम्य स्वय़मेव सुय़ोधनम् ||
१८ ख
विराट पर्व
अध्याय ६०
अर्जुन उवाच
मोघं तवेदं भुवि नामधेय़ं; दुर्योधनेतीह कृतं पुरस्तात् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४६
भीष्म उवाच
मोघं ते जीवितं राजन्परिक्लिष्टं च जीवसि |
१२ क