शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
मोघं दुर्योधनश्चक्रे तत्राभूद्विस्मय़ो महान् ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
वृहस्पतिरु उवाच
मोघमन्नं विन्दति चाप्यचेताः; स्वर्गाल्लोकाद्भ्रश्यति नष्टचेष्टः |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
मोघमस्य प्रहारं तं चिकीर्षुर्भरतर्षभ ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
मोघान्कुर्वञ्शरांस्तस्य मण्डलानि विदर्शय़न् ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
मोघान्कुर्वञ्शरांस्तस्य मण्डलान्यचरल्लघु ||
५८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
कपिल उवाच
मोघान्यगुप्तद्वारस्य सर्वाण्येव भवन्त्युत |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
मोघेष्टा मोघसङ्कल्पा मोघज्ञाना विचेतसः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
मोचय़ामास तं शापमास्तीकः सुमहाय़शाः ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
मोचय़ामास तुरगान्वितुन्नान्कङ्कपत्रिभिः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
मोचय़ेय़ं मृत्युपाशात्संरव्धान्कुरुसृञ्जय़ान् |
८१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
मोदकैः पाय़सेनाथ मांसापूपैस्तथैव च |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
मोदकैः पाय़सेनाथ मांसैश्चोपाहरद्वलिम् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
मोदते च सुखं स्वर्गे देवगन्धर्वपूजितः |
८४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
मोदन्ते पुण्यकर्माणो विहरन्तो यशस्विनः ||
२८ ख
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
मोदापुरं वामदेवं सुदामानं सुसङ्कुलम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
मोदय़न्सर्वभूतानि गन्धमादनसम्भवः |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
मोमुह्यमानां तां तत्र जगृहुः पञ्च पाण्डवाः |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
मोमुह्यमानां ते तत्र जगृहुः कीचका भृशम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५४
भीष्म उवाच
मोह ईर्ष्यावमानश्चेत्येतद्दान्तो न सेवते ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
मोहं तमसि संसक्तं लोभमर्थेषु संश्रितम् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६१
गन्धर्व उवाच
मोहं नृपतिशार्दूल गन्तुमाविष्कृतः क्षितौ ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
मोहजं नाशय़ामास हेतुभिर्मोक्षदर्शनैः ||
१५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८४
पराशर उवाच
मोहजाता रतिर्नाम समुपैति नराधिप ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
मोहजालस्य योनिर्हि मूढैरेव समागमः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
मोहजालावृतो दुःखमिह चामुत्र चाश्नुते ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
मोहनं सर्वसैन्यस्य युधि भीष्मस्य पातनम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
मोहनीं सर्वशत्रूणां हिताय़ त्रिदिवौकसाम् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
मोहनीभिः पिपासाभिर्लताभिः परिवेष्टितः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२००
व्याध उवाच
मोहनीय़ैर्विय़ोनीषु त्वधोगामी च किल्विषैः ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
मोहमभ्यागमन्सर्वे कृपप्रभृतय़ो रथाः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
मोहमापद्यते दैन्याद्यथा कुपुरुषस्तथा ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
मोहमेव निय़च्छन्ति कर्मणा ज्ञानवर्जिताः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२
शौनक उवाच
मोहरागसमाक्रान्त इन्द्रिय़ार्थवशानुगः ||
६१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
मोहश्चापि कलिङ्गानामाविवेश परन्तप |
७८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
मोहात्करोति यो विघ्नं स मृतो जाय़ते कृमिः ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
मोहात्तव सपुत्रस्य वधाच्छान्तनवस्य च |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
मोहात्पपात गाण्डीवमावापश्च करादपि ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
मोहात्मकं तमस्तेषां रज एषां प्रवर्तकम् |
४ क
सभा पर्व
अध्याय
५५
विदुर उवाच
मोहात्मा तप्यसे पश्चात्पक्षिहा पुरुषो यथा ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२२
वासुदेव उवाच
मोहात्सन्नश्च कौन्तेय़ रथोपस्थ उपाविशम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११३
वृहस्पतिरु उवाच
मोहादधर्मं यः कृत्वा पुनः समनुतप्यते |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
मोहादैश्वर्यलोभाच्च पापा मतिरजाय़त ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३८
श्रीभगवानु उवाच
मोहाद्गृहीत्वासद्ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
मोहाद्दुर्योधनः कृष्णं यन्न वेत्तीह माधवम् ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
मोहाद्वा यदि वा लोभान्नैवाशाम्यत वैशसम् ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
मोहानुवर्ती सततं पापो द्वेष्टि च पाण्डवान् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२७
व्राह्मण उवाच
मोहान्धकारतिमिरं लोभव्यालसरीसृपम् ||
१ ख