chevron_left  arrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
य आङ्गारं हि नृपतिं मरुत्तमसितं गय़म् |
८१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३१
कुन्त्यु उवाच
य आत्मनः प्रिय़सुखे हित्वा मृगय़ते श्रिय़म् |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
य आत्मनापत्रपते भृशं नरः; स सर्वलोकस्य गुरुर्भवत्युत |
१०२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५६
सञ्जय़ उवाच
य आत्मनो दुश्चरितादशुभं प्राप्नुय़ान्नरः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
य आत्मनो दुश्चरितादशुभं प्राप्नुय़ान्नरः |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४४
सनत्सुजात उवाच
य आवृणोत्यवितथेन कर्णा; वृतं कुर्वन्नमृतं सम्प्रय़च्छन् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
भीष्म उवाच
य आवृणोत्यवितथेन कर्णा; वृतं व्रुवन्नमृतं सम्प्रय़च्छन् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४४
सनत्सुजात उवाच
य आशय़ेत्पाटय़ेच्चापि राज; न्सर्वं शरीरं तपसा तप्यमानः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
य आसीच्छरणं काले पाण्डवानां महात्मनाम् |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
य इच्छेत्पुरुषोऽत्यन्तमात्मानं निरुपद्रवम् |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
य इच्छेत्सफलं जन्म जीवितं श्रुतमेव च |
६४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
युधिष्ठिर उवाच
य इच्छेत्सिद्धिमास्थातुं देवतां कां यजेत सः ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
य इच्छेन्मोक्षमास्थातुमुत्तमां वृत्तिमाश्रय़ेत् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
य इदं कथय़ेद्विद्वानहन्यहनि भारत |
९५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
य इदं कथय़ेन्नित्यं व्राह्मणेभ्यः समाहितः |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
य इदं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति |
६८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
य इदं वेद तत्त्वेन स वेद प्रभवाप्ययौ |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७३
भीष्म उवाच
य इदं व्राह्मणो नित्यं वदेद्व्राह्मणसंसदि |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
य इदं शृणुय़ान्नित्यं मनोश्चरितमादितः |
५४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
य इदं शृणुय़ान्नित्यं यश्चापि परिकीर्तय़ेत् |
१२२ क
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
य इदं श्रावय़ेद्विद्वान्यश्चेदं शृणुय़ान्नरः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
य इदं श्रावय़ेद्विद्वान्व्राह्मणानिह पर्वसु |
२८ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
य इदं श्रावय़ेद्विद्वान्सदा पर्वणि पर्वणि |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
य इदं सर्वमादत्ते तस्माच्छक्र स्थिरो भव |
५६ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
य इदं हास्तिनपुरं मापय़ामास |
३६ ग
वन पर्व
अध्याय २७०
मार्कण्डेय़ उवाच
य इमं दारुणं कालं न जानीषे महाभय़म् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
य इमं मामकं देहं भूतग्रामः समाश्रितः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
य इमं शुचिरध्याय़ं पठेत्पर्वणि पर्वणि |
२०६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
य इमं श्रावय़ेच्छ्राद्धे भूमिदानस्य संस्तवम् |
९१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
य इमं श्रावय़ेद्विद्वान्संसिद्धिं प्राप्नुय़ात्पराम् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
य इमां कुण्डिकां भिन्द्यात्त्रिविष्टव्धं च ते हरेत् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
य इमां पृथिवीं कृत्स्नां चर्मवत्समवेष्टय़त् ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
य इमां पृथिवीं कृत्स्नां चर्मवत्समवेष्टय़त् |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
य इमां पृथिवीं कृत्स्नामेकच्छत्रां प्रशास्ति ह |
१३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
य इमां पृथिवीं राजन्दग्धुं सर्वां समुद्यतः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
य इमां पृथिवीं सर्वां विजित्य सहसागराम् ||
८७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
य इमां व्याहृतिं वेद व्राह्मणो व्रह्मसंश्रितः |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
य इमां सागरापाङ्गां कृत्स्नां भोक्ष्यति मेदिनीम् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १११
भीष्म उवाच
य इमान्सकलाँल्लोकांश्चर्मवत्परिवेष्टय़ेत् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७
युधिष्ठिर उवाच
य इमामखिलां भूमिं शिष्यादेको महीपतिः |
३ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
य इमे पापगन्धेऽस्मिन्देशे सन्ति सुदारुणे |
४४ क
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
य इमे पृथिवीपालाः करदास्तव पार्थिव |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४८
युधिष्ठिर उवाच
य इमे पृथिवीपालाः शेरते पृथिवीतले |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
य इमे मां यदुश्रेष्ठ योद्धुकामा रणाजिरे ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय २७६
मार्कण्डेय़ उवाच
य इमे वज्रिणः सेनां जय़ेय़ुः समरुद्गणाम् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७
अगस्त्य उवाच
य इमे व्रह्मणा प्रोक्ता मन्त्रा वै प्रोक्षणे गवाम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
य इष्ट्वा मनुजेन्द्रेण द्रुपदेन महामखे |
११२ क
वन पर्व
अध्याय १०९
लोमश उवाच
य इह व्याहरेत्कश्चिदुपलानुत्सृजेस्तदा ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४
व्यास उवाच
य ईजे हय़मेधानां शतेन विधिवत्प्रभुः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
य ईर्ष्युः परवित्तेषु रूपे वीर्ये कुलान्वय़े |
४० क