उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
युद्धे समागमिष्यन्ति तुमुले कवचह्रदे ||
४८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
युद्धे सहिष्ये हिमवानिवाचलो; धनञ्जय़ं क्रुद्धममृष्यमाणम् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
युद्धे सुकृतिनां लोकानिच्छन्तो वसुधाधिपाः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
युद्धे सुमनसो भूत्वा शिविराय़ैव जग्मिरे ||
७४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
युद्धे सुसदृशस्तात यमस्य वरुणस्य च ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
युद्धे ह्ययं रुद्रकल्पस्त्वं च व्रह्मसमोऽनघ |
१२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
युद्धे ह्यर्जुनमासाद्य स्वस्तिमान्को व्रजेद्गृहान् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
युद्धे ह्याशीविषाकारान्राजपुत्रान्रणे वहून् |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१
कृष्ण उवाच
युद्धेन वाधेय़ुरिमांस्तथैव; तैर्वध्यमाना युधि तांश्च हन्युः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
धृतराष्ट्र उवाच
युद्धेषु कुशलं वीरं कुलपुत्रं तनुत्यजम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
युद्धेषु नाम दिव्येषु वर्तमानेषु सञ्जय़ |
२२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
युद्धेष्वपवदिष्यन्ति योधा नूनं वृकोदरम् |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
युद्धेष्वपि प्रवृत्तानां ध्रुवौ जय़पराजय़ौ |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
युद्धेऽन्योन्यं समासाद्य ततक्षतुररिन्दमौ ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
युद्धेऽभ्यषिञ्चद्विजय़ो गार्ध्रपत्रैः शिलाशितैः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
युद्धोपकरणैश्चान्यैस्तत्र तत्र प्रकाशितैः |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
युद्ध्वा च सुचिरं कालं पाण्डवैः सह भारत ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
युद्ध्वा चित्रैर्विविधैः शस्त्रपूगै; र्दिव्यैर्वीरो मानुषै राक्षसैश्च |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९९
इन्द्र उवाच
युद्धय़ज्ञाधिकारस्थो भवतीति विनिश्चय़ः ||
१३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
युधामन्युं च विक्रान्तमुत्तमौजसमेव च ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युं चतुःषष्ट्या त्रिंशता चैव सात्यकिम् |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युं महेष्वासं गौतमोऽभ्यपतद्रणे |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युः कृपं विद्ध्वा धनुरस्याशु चिच्छिदे |
५० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युः शिखण्डी च द्रौपदेय़ाः प्रभद्रकाः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युः सहामात्यं दुर्योधनमय़ोधय़त् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
युधामन्युर्धनुः शीघ्रं शरावापं च संय़ुगे ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युश्च विक्रान्तः शिखण्डी चापराजितः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
युधामन्युश्च विक्रान्तो रथोदारो नरर्षभः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
युधामन्युस्तु सङ्क्रुद्धः शरांस्त्रिंशतमाय़सान् |
२७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
युधामन्युस्तु सम्प्राप्तो मत्त्वा तं रक्षसा हतम् |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
युधामन्यो रथं तूर्णमारुरोह परन्तपः ||
३३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
युधामन्योर्ध्वजं सूतं छत्रं चापातय़त्क्षितौ |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६३
धृतराष्ट्र उवाच
युधि गाण्डीवधन्वानं को नु युध्येत वुद्धिमान् ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
युधि चाप्यवमानो मे न कर्तव्यः कथञ्चन |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
युधि तिष्ठाम संनह्य समेतान्वृष्णिपाण्डवान् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
युधि धुर्यमविक्षोभ्यमनीकधरमच्युतम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
युधि नानाप्रहरणैरन्योन्यमभिवर्षतोः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
युधि निर्जित्य पार्थेन द्रोणाय़ प्रतिपादिता ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
युधि निर्जित्य पुरुषानाहारं नित्यमाचरन् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
युधि निर्जित्य वः सर्वान्भक्षय़िष्ये गतज्वरः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
युधि पञ्चजनं हत्वा पातालतलवासिनम् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
युधि फल्गुनवाणानां सूर्याग्निसमतेजसाम् |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
युधि वा निहताः सम्यगपि तिर्यग्गता नृप ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
युधि सत्याभिसन्धेन वासुदेवेन रक्षिताः |
६ ख
वन पर्व
अध्याय
२४०
दानवा ऊचुः
युधि सम्प्रहरिष्यन्तो मोक्ष्यन्ति कुरुसत्तम |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर इति ख्यातः पाण्डोः प्रथमजः सुतः ||
६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर इदं चैनां मधुरं वाक्यमव्रवीत् ||
२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिर गतिं कां ते गताः पुरुषसत्तमाः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
युधिष्ठिर तथा युक्तो नाधिवन्धेन योक्ष्यसे ||
२५ ख