शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
योद्धा नय़विपश्चिच्च स मन्त्रं श्रोतुमर्हति ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
योद्धा पार्थश्च शीघ्रास्त्रः को नु तेन समो भवेत् ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
योद्धारं नाधिगच्छामि तुल्यरूपं जनाधिप ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
योद्धारं वृणुतादित्याः स तान्हन्ता सुरेतरान् ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
योद्धुं नाशक्नुवद्राजन्यथापूर्वमरिन्दम ||
११० ख
वन पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
योद्धुकामश्च पार्थेन सततं यो महावलः |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
योद्धुकामे स्थिते राजन्हन्तुमन्योन्यमञ्जसा ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
२९३
वैशम्पाय़न उवाच
योद्धुमाशंसते नित्यं फल्गुनेन महात्मना ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
योधचन्द्रोदय़ोद्भूतः कुरुराजमहार्णवः |
२७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
योधमुख्या महावीर्याः पाण्डूनां कर्णमाहवे |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
योधव्रतसमाख्याताश्चक्रुः कर्माण्यभीतवत् ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
योधव्रातवतीं सङ्ख्ये वहन्तीं यमसादनम् ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
योधा योधान्समासाद्य मुष्टिभिर्व्यहनन्युधि |
६२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
योधांश्च स्वान्परान्वापि नाभ्यजानञ्जिघांसय़ा |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
योधांस्त्वमप्लवे हित्वा पितृलोकं गमिष्यसि ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
योधाः परिपतन्ति स्म यथामिषकृते खगाः ||
६७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
योधाः परिपतन्ति स्म वमन्तो रुधिरं व्रणैः ||
७८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
योधाः पर्यपतन्राजञ्शतशोऽथ सहस्रशः ||
६४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
योधाः प्रहरणैः शुभ्रैः स्वेष्वनीकेष्ववस्थिताः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
योधाः समरशौटीराः कृतज्ञाः शस्त्रकोविदाः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
योधाः समृद्धास्तद्विद्वन्नाचक्षीथा यथातथम् ||
५१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
योधाः स्रौवास्तथा मौलास्तथैवान्येऽप्यवस्कृताः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
योधाक्षय़्यजलं भीमं वाहनोर्मितरङ्गिणम् |
१२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
योधानश्वान्द्विपांश्चैव प्राच्छिनत्स वरासिना |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
योधानां च महाशङ्खान्पाण्डुरांश्च प्रकीर्णकान् |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९४
भीष्म उवाच
योधानां दशसाहस्रं कृत्वा भागं महाद्युते |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
योधानां प्रीतिजननं द्रौणेश्च भरतर्षभ ||
११० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
योधानां सम्प्रहृष्टानां तथा समभवत्स्वनः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२९
सञ्जय़ उवाच
योधानामशिवा रौद्रा राजन्नन्तकगामिनी |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
योधानामसुखस्पर्शं दुर्धर्षमजय़ैषिणाम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
योधानामात्मनः सिद्धिमम्वरीषोऽभिपन्नवान् ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
योधानामय़ुतं हत्वा तस्मिन्स दशमेऽहनि |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
योधानुद्धर्षय़ामास तन्निवोध युधिष्ठिर ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
योधान्पञ्चशतान्मुख्यानग्रानीके व्यपोथय़त् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
योधान्स्वान्दर्शय़ामास स्वर्गं नरकमेव च ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
योधार्तरवनिर्घोषां क्षतजोर्मिसमाकुलाम् ||
१२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
योधाश्च भद्रकाराश्च शरदण्डानुदण्डजाः |
५८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
योधाश्च सर्वे कृतनिश्रमास्ते; भवन्तु हस्त्यश्वरथेषु यत्ताः |
३६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
योधाश्चापि न हन्तव्या धनञ्जय़ रणे त्वय़ा ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
योधाश्चापि हि मां दृष्ट्वा निवर्तन्ते ह्यधोमुखाः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६९
भीष्म उवाच
योधाश्चास्य परिख्याताः सर्वे युद्धविशारदाः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११८
भीष्म उवाच
योधाश्चैव मनुष्येन्द्र सर्वैर्गुणगुणैर्वृताः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
योधाश्चोभय़तः सर्वे कर्मभिः समपूजय़न् ||
१५९ ग
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
योधास्तत्र महाराज समासाद्य परस्परम् |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
योधास्त्वदीय़ा भय़नष्टसत्त्वा; दिशः प्रजग्मुः प्रगृहीतशस्त्राः ||
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
योधास्त्वदीय़ाश्च हि सोमकाश्च; वृत्रेन्द्रय़ोर्युद्धमिवामरौघाः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
योधितश्च महावीर्यैः सर्वैर्भारत भारतैः ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
दुर्योधन उवाच
योधे त्वय़ि रथस्थे च मद्रराजे च सारथौ |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
योधेषु चाप्याश्रममण्डलं तं; मुक्त्वा निविष्टेषु विमुच्य पत्रम् |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
योधैश्च निहतैस्तत्र पार्थवाणप्रपीडितैः |
५३ क