द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
यदा गाण्डीवधन्वानं भीमसेनं च कौरव |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
यदा गृध्येत्परभूमिं नृशंसो; विधिप्रकोपाद्वलमाददानः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
७३
वृहदश्व उवाच
यदा च किञ्चित्कुर्यात्स कारणं तत्र भामिनि |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
यदा च त्वां महावाहो गन्धर्वैर्हृतमोजसा |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
यदा च द्रौपदी कृष्णा मद्विनाशाय़ दुःखिता |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१५४
व्राह्मण उवाच
यदा च पाण्डवाः सर्वे कृतास्त्राः कृतनिश्रमाः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३५३
भीष्म उवाच
यदा च मम रामेण युद्धमासीत्सुदारुणम् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
२०९
व्राह्मण उवाच
यदा च वो ग्राहभूता गृह्णन्तीः पुरुषाञ्जले |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२३८
वैशम्पाय़न उवाच
यदा च शोचतः शोको व्यसनं नापकर्षति |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
यदा च सुरकार्यं ते अविषह्यं भविष्यति |
८५ क
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
यदा चन्द्रश्च सूर्यश्च तथा तिष्यवृहस्पती |
८७ क
शल्य पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
यदा चापि न शक्नोति राष्ट्रं मोचय़ितुं नृप |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
यदा चास्मान्न मुमुचुर्गन्धर्वाः सान्त्विता अपि |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४३
व्यास उवाच
यदा चाय़ं न विभेति यदा चास्मान्न विभ्यति |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
यदा चाय़ं न विभेति यदा चास्मान्न विभ्यति |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
यदा चिरमृतः पाण्डुः कथं तस्येति चापरे ||
७४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
यदा चैते प्रदुष्यन्ति राजन्ये कीर्तिता मय़ा |
१४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
यदा छिनत्त्ययोऽश्मानमग्निश्चापोऽभिपद्यते |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
यदा जनौघः कुरुजाङ्गलानां; कृष्णां सभाय़ामवशामपश्यत् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
ईश्वर उवाच
यदा जानासि देवेश पात्रं मामस्त्रधारणे |
१३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
यदा ज्येष्ठः पाण्डवः संशितात्मा; क्रोधं यत्तं वर्षपूगान्सुघोरम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
यदा तत्त्वेन तुष्टोऽभूत्तत एनमपूजय़त् ||
४८ ख
विराट पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
यदा तत्पावको दावमदहत्खाण्डवं महत् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१७१
और्व उवाच
यदा तदा दधारेय़मूरुणैकेन मां शुभा ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
यदा तदा दशरथः प्रीतिमानभवत्सुखी ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१९३
उत्तङ्क उवाच
यदा तदा भूश्चलति सशैलवनकानना ||
२१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
सञ्जय़ उवाच
यदा तदा हतः शूरः सौमदत्तिः प्रतापवान् ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
२९३
वैशम्पाय़न उवाच
यदा तु कर्णो राजेन्द्र भानुमन्तं दिवाकरम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२३२
युधिष्ठिर उवाच
यदा तु कश्चिज्ज्ञातीनां वाह्यः प्रार्थय़ते कुलम् |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१३३
वैशम्पाय़न उवाच
यदा तु कार्यमस्माकं भवद्भिरुपपत्स्यते |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
यदा तु कौरवो राजा पुत्रं सस्मार वालिशम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
यदा तु गुणजालं तत्प्राकृतं विजुगुप्सते |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
यदा तु गुणजालं तदव्यक्तात्मनि सङ्क्षिपेत् |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
यदा तु तपसोग्रेण चकर्ष वसुधां नृपः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
८५
अष्टक उवाच
यदा तु तान्वितुदन्ते वय़ांसि; तथा गृध्राः शितिकण्ठाः पतङ्गाः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भृगुरु उवाच
यदा तु दिव्यं तद्रूपं ह्रसते वर्धते पुनः |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
यदा तु धनधाराभिस्तर्पय़त्युपकारिणः |
४६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
यदा तु परमामार्तिं गतोऽसौ सपुरो नृपः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१८९
व्यास उवाच
यदा तु पर्याप्तमिहास्य क्रीडय़ा; तदा देवीं रुदतीं तामुवाच |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
यदा तु पश्यतेऽत्यन्तमहन्यहनि काश्यप |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
१२०
वासुदेव उवाच
यदा तु पाञ्चालपतिर्महात्मा; सकेकय़श्चेदिपतिर्वय़ं च |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
यदा तु पाण्डवः शूरः खाण्डवेऽग्निमतर्पय़त् |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
यदा तु पाण्डवाः सर्वे सुपरिश्रान्तवाहनाः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
यदा तु पीडितो राजा भवेद्राज्ञा वलीय़सा |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१६
शक्र उवाच
यदा तु पृथिवीं सर्वां यजमानोऽनुपर्ययाः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१७१
और्व उवाच
यदा तु प्रतिषेद्धारं पापो न लभते क्वचित् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
द्रुपद उवाच
यदा तु मन्यते वीरः कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
यदा तु मन्यतेऽन्योऽहमन्य एष इति द्विजः |
७४ क
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
यदा तु मन्यसे कालं यस्मिन्देशे यथा यथा |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
शकुन्तलो उवाच
यदा तु मुखमादर्शे विकृतं सोऽभिवीक्षते |
७ क