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विराट पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
यमग्निर्व्राह्मणो भूत्वा समागच्छन्नृणां वरम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय १४१
युधिष्ठिर उवाच
यमजौ चापि भद्रं ते नैतदन्यत्र विद्यते |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
यमदंष्ट्रान्तरं प्राप्तो मुच्येतापि हि मानवः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
यमदण्डप्रतीकाशं ततस्तं तस्य मूर्धनि |
४३ क
शल्य पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डप्रतीकाशां कालरात्रिमिवोद्यताम् |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
यमदण्डभय़ादेके परलोकभय़ादपि ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डोपमं घोरमुद्दिश्याशु घटोत्कचम् ||
१३० ग
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डोपमं घोरमुद्दिश्याशु घटोत्कचम् ||
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डोपमां गुर्वीमिन्द्राशनिमिवोद्यताम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डोपमां गुर्वीमिन्द्राशनिसमस्वनाम् |
५७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डोपमां घोरां प्राहिणोत्सात्यकाय़ वै ||
११ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डोपमान्घोराञ्ज्वलनाशीविषोपमान् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
यमदण्डोपमामुग्रामिन्द्राशनिसमस्वनाम् |
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
यमदूतसमान्वेगे निपाते पावकोपमान् |
२६ क
स्त्री पर्व
अध्याय ४
विदुर उवाच
यमदूतैर्विकृष्यंश्च मृत्युं कालेन गच्छति ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
यमनन्यो व्यपेताशीरात्मानं वीतकल्मषम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
भीष्म उवाच
यमनिय़मसमाहितो वनान्तं; परिगणितोञ्छशिलाशनः प्रविष्टः ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७२
वैशम्पाय़न उवाच
यमन्वेति महावाहुः संस्पृशन्धनुरुत्तमम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
यमन्वेषसि राजानं नलं पद्मनिभेक्षणम् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४२
सनत्सुजात उवाच
यमप्रय़तमानं तु मानय़न्ति स मानितः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
यमभ्यषिञ्चन्सम्भूय़ महारण्ये महर्षय़ः ||
१२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
यमराष्ट्राय़ महते परलोकाय़ दीक्षिताः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
यमराष्ट्रोपमं घोरमासीदाय़ोधनं तय़ोः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
यमर्थं शक्नुय़ात्प्राप्तुं तेन तुष्येद्धि पण्डितः ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २१९
नमुचिरु उवाच
यमर्थसिद्धिः परमा न हर्षय़े; त्तथैव काले व्यसनं न मोहय़ेत् |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
यमर्थान्नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
यमवरुणकुवेरवासवा वा; यदि युगपत्सगणा महाहवे |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
यमवैश्रवणादित्यमहेन्द्रवरुणोपमम् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
यमश्च मृत्युना सार्धं सर्वतः परिवारितः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८
शल्य उवाच
यमश्च वरुणश्चैव कुवेरश्च धनेश्वरः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८
संवर्त उवाच
यमश्च वरुणश्चैव कुवेरश्च सहानुगः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६५
मेनको उवाच
यमश्च सोमश्च महर्षय़श्च; साध्या विश्वे वालखिल्याश्च सर्वे |
३९ क
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
यमस्तु तं तथा वद्ध्वा प्रय़ातो दक्षिणामुखः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
व्राह्मण उवाच
यमस्तु पूजय़ित्वा मां ततो वचनमव्रवीत् |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
यमस्तु यानि श्राद्धानि प्रोवाच शशविन्दवे |
१ क
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
यमस्तु राजा धर्मात्मा सर्वप्राणभृतां प्रभुः |
८ क
वन पर्व
अध्याय ५४
वृहदश्व उवाच
यमस्त्वन्नरसं प्रादाद्धर्मे च परमां स्थितिम् |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
धृतराष्ट्र उवाच
यमस्य ते यातनां प्राप्नुवन्ति; परं गन्ता धृतराष्ट्रो न तत्र ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
यमस्य पुरुषैः क्लेशं यमस्य पुरुषैर्वधम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
यमस्य पृष्ठतश्चैव घोरस्त्रिशिखरः शितः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २५०
नारद उवाच
यमस्य भवने देव यात्यन्ते पापकर्मिणः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ५०
आस्तीक उवाच
यमस्य यज्ञो हरिमेधसश्च; यथा यज्ञो रन्तिदेवस्य राज्ञः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
यमस्य यत्पुरा वृत्तं कालस्य व्राह्मणस्य च ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
व्यास उवाच
यमस्य वशमाय़ान्ति काममूढाः पुनः पुनः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
यमस्य विषय़ं घोरं मर्त्यो लोकः प्रपद्यते ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
यमस्य विषय़े क्रुद्धैर्वधं प्राप्नोति दारुणम् ||
८० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
यमस्य सदनं तूर्णं प्रेषय़ामास भारत ||
८५ ख
आदि पर्व
अध्याय ४१
पितर ऊचुः
यमाखुं पश्यसि व्रह्मन्काल एष महावलः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३१
मातो उवाच
यमाजीवन्ति पुरुषं सर्वभूतानि सञ्जय़ |
४० क
वन पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
यमात्कुवेराद्वरुणादिन्द्राच्च कुरुनन्दन |
१२ ख