आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातिर्देवय़ान्यां तु पुत्रावजनय़न्नृपः |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
यय़ातिर्नहुषः पूरुर्मान्धाता सोमको नृगः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातिर्नहुषश्चापि मान्धाता भरतस्तथा |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
द्रोण उवाच
यय़ातिर्नहुषश्चैव धुन्धुमारो भगीरथः |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातिर्नहुषाच्चापि पूरुस्तस्माच्च लव्धवान् |
७३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११२
नारद उवाच
यय़ातिर्नाम राजर्षिर्नाहुषः सत्यविक्रमः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातिर्नाहुषः सम्राडासीत्सत्यपराक्रमः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातिर्नाहुषो राजा पूरुं पुत्रं कनीय़सम् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
यय़ातिर्मूढविज्ञानो विस्मय़ाविष्टचेतनः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११३
नारद उवाच
यय़ातिर्वत्सकाशीश इदं वचनमव्रवीत् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
यय़ातिर्वहुरत्नाढ्यैर्यत्रेन्द्रो मुदमभ्यगात् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातिसहिता राजन्निर्जगाम महावनम् ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
यय़ातीक्ष्वाकुवंशश्च राजर्षीणां च सर्वशः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
२२
वासुदेव उवाच
यय़ातेः क्षीणपुण्यस्य स्वर्गादिव महीतलम् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
यय़ातेरम्वरीषस्य मान्धातुर्नहुषस्य च ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
यय़ातेर्देवय़ान्यां तु यदुर्ज्येष्ठोऽभवत्सुतः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातेर्द्वे भार्ये वभूवतुः |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ातेर्यजमानस्य यत्र राजन्सरस्वती |
३२ क
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
यय़ातेस्त्वेव भोजानां विस्तरोऽतिगुणो महान् |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
यय़ावानय़ितुं भूय़ः साय़कानसितेक्षणा |
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
यय़ावेकरथेनाजौ हय़संस्कारवित्प्रभो ||
३७ ख
सभा पर्व
अध्याय
५९
विदुर उवाच
यय़ास्य वाचा पर उद्विजेत; न तां वदेद्रुशतीं पापलोक्याम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
८२
यय़ातिरु उवाच
यय़ास्य वाचा पर उद्विजेत; न तां वदेद्रुशतीं पापलोक्याम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
हंस उवाच
यय़ास्य वाचा पर उद्विजेत; न तां वदेद्रुशतीं पापलोक्याम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
यय़ास्य वाचा पर उद्विजेत; न तां वदेद्रुशतीं पापलोक्याम् ||
५६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
यय़ुः समेत्य सहिताः शक्रं कृत्वा पुरःसरम् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
यय़ुरश्वैर्महावेगैः शकाश्च यवनैः सह ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ुराशु कुरुक्षेत्रं वाजिभिः शीघ्रगामिभिः ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
यय़ुर्देवा यथाकामं गन्धर्वाप्सरसस्तथा |
५८ क
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ुर्नागपुरं तूर्णं सर्वमादाय़ तद्वचः ||
४० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
यय़ुर्मनुष्याः सम्भ्रान्ता भीमसेनभय़ार्दिताः ||
७३ ख
वन पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ुर्वनेनैव वनं सततं पश्चिमां दिशम् ||
२ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ुश्च पाण्डवा वीरास्ततस्ते दक्षिणामुखाः ||
४१ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
यय़ुश्च शिविरं तेषां सम्प्रसुप्तजनं विभो |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ुस्ते नगराकारै रथैः पाण्डवय़ादवाः ||
१ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ुस्ते परिवार्याथ कलत्रं पार्थशासनात् ||
३४ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ोरन्तरमासाद्य धार्तराष्ट्राः क्षय़ं गताः ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय
४१
शिशुपाल उवाच
यय़ोरन्यतरो भीष्म सङ्क्रुद्धः सचराचराम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
द्रुपद उवाच
यय़ोरेव समं वित्तं यय़ोरेव समं कुलम् |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
यय़ोर्विवरमापन्नां न रतिर्मां पुराजहत् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
यय़ोश्चित्तेन वा चित्तं नैभृतं नैभृतेन वा |
३४ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ोस्ते नामनी लोके हंसेति डिभकेति च |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ौ क्रमेणाप्रतिमप्रभाव; स्ततः कुरुक्षेत्रमुदारवृत्तः ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ौ क्रोधवशं सद्यः शशाप च वसूंस्तदा ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
यय़ौ गान्धारकैः सार्धं विमलप्रासय़ोधिभिः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
यय़ौ ततो भीमवलो मनस्वी; गाङ्गेय़माजौ शरचापपाणिः ||
११ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
यय़ौ तदाय़ोधनमुग्रधन्वा; यत्रावसानं भरतर्षभस्य ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
यय़ौ तन्मद्रकानीकं केकय़ांश्च परन्तपः ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ौ तीर्थं महावाहुर्याय़ातं पृथिवीपते ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
यय़ौ द्वारवतीं राजन्पाण्डवानुमते तदा ||
५० ख