chevron_left  युधिष्ठिरarrow_drop_down
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
युधिष्ठिर तव प्रज्ञा न सम्यगिति मे मतिः |
१ क
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
युधिष्ठिर धृतिर्दाक्ष्यं देशकालौ पराक्रमः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १५०
कुन्त्यु उवाच
युधिष्ठिर न सन्तापः कार्यः प्रति वृकोदरम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४५
भीष्म उवाच
युधिष्ठिर महानेष धर्मो धर्मभृतां वर |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिर महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारद |
१३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिर महावाहो कच्चित्तात कुशल्यसि |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर महावाहो दिष्ट्या जय़सि पाण्डव |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर महावाहो नैनं शोचितुमर्हसि |
४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर महावाहो प्रीता देवगणास्तव |
१० क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर महावाहो भीमसेन परन्तप |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
युधिष्ठिर महावाहो महाभाग्यं महात्मनः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
युधिष्ठिर महावाहो महावाहुर्जनार्दनः ||
१२० ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर महावाहो मैवं वोचः कथञ्चन |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिर महावाहो यत्त्वा वक्ष्यामि तच्छृणु ||
४४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ८
व्यास उवाच
युधिष्ठिर महावाहो यदाह कुरुनन्दनः |
१ क
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर महावाहो वेद्मि ते हृदि मानसम् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय २४५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर महावाहो शृणु धर्मभृतां वर |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
पराशर उवाच
युधिष्ठिर महाय़ोगी वीर्यवानक्षय़ोऽव्ययः ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिर यमौ भीम मनसा कुरुतार्जवम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
युधिष्ठिर वहून्मासान्पुण्यश्लोकस्त्वजीय़त ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय ६९
विदुर उवाच
युधिष्ठिर विजानीहि ममेदं भरतर्षभ |
७ क
सभा पर्व
अध्याय ९
नारद उवाच
युधिष्ठिर सभा दिव्या वरुणस्य सितप्रभा |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं कथं पश्चादनुय़ास्यामि दासवत् ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं केशवसृञ्जय़ांश्च; धनञ्जय़ं माद्रवतीसुतौ च ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं च कौन्तेय़मिदं वचनमव्रवीत् ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं च कौरव्य विव्याध दशभिः शरैः ||
२६ ख
सभा पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं च ते सर्वे समुदैक्षन्त पार्थिवाः |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं च प्रशशंसुराजौ; पुरा सुरा वृत्रवधे यथेन्द्रम् |
८७ क
विराट पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं च भीमं च माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४४
कर्ण उवाच
युधिष्ठिरं च भीमं च यमौ चैवार्जुनादृते ||
२० ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं च राजानं भीमादींश्चापि पाण्डवान् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं च सप्तत्या ततः शेषानपानुदत् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं च समरे पर्यवारय़दस्त्रवित् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १९०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं चाप्युपनीय़ मन्त्रवि; न्निय़ोजय़ामास सहैव कृष्णय़ा ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं चाभिभवन्नसपव्यं चकार ह ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय ६३
दुर्योधन उवाच
युधिष्ठिरं चेत्प्रवदन्त्यनीश; मथो दास्यान्मोक्ष्यसे याज्ञसेनि ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं जिघांसन्तः पाण्डूनां प्राविशन्वलम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं तस्य भार्या प्रपेदे शरणार्थिनी |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं त्रिभिर्विद्ध्वा भीमसेनं च सप्तभिः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं त्रिभिर्विद्ध्वा सहदेवं च सप्तभिः ||
१२ ग
वन पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
युधिष्ठिरं त्वं परिसान्त्वय़स्व; राज्ये चैनं स्थापय़स्वाभिपूज्य |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं द्वादशभिर्द्रौपदेय़ांस्त्रिभिस्त्रिभिः |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं द्वादशभिर्वाह्वोरुरसि चार्पय़त् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरं धर्मनित्यं पुरुहूतमिवेश्वरः ||
४६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं धर्मभृतां वरिष्ठं; शृणुष्व राजन्निति शक्रसूनुः ||
९२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं धार्तराष्ट्रा रत्नोत्तममिवार्थिनः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं परिप्रेप्सुमाचार्यं समुपाद्रवत् ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं परीप्सन्तः समन्तात्पर्यवारय़न् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरं परीप्सन्तस्तदासीत्तुमुलं महत् ||
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५७
दुर्योधन उवाच
युधिष्ठिरं पशुं कृत्वा दीक्षितौ भरतर्षभ ||
१२ ख