chevron_left  युधिष्ठिरगतेarrow_drop_down
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरगते राज्ये प्राप्तश्चास्मि सुखं महत् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरनिय़ोगात्तु फल्गुनस्य महात्मनः |
१० क
वन पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरनिय़ोगात्स जगामामितविक्रमः |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरनिय़ोगेन दैवाच्च विधिनिर्मितात् ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरपुरोगांश्च विमुखांस्तान्महारथान् ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरपुरोगास्तु सर्वसैन्यमहारथाः |
५२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरपुरोगास्ते द्रौणिं शस्त्रभृतां वरम् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरपुरोगैश्च पाण्डवैः सह सङ्गतः ||
८८ ख
वन पर्व
अध्याय ४९
जनमेजय़ उवाच
युधिष्ठिरप्रभृतय़ः किमकुर्वन्त पाण्डवाः ||
१ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरप्रभृतय़ो यदकुर्वत तच्छृणु ||
३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिरभय़ाद्वेत्ति भृशं तप्यति पाण्डवः ||
११ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमतं ज्ञात्वा वृष्णिक्षय़मवेक्ष्य च ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय २३८
दुर्योधन उवाच
युधिष्ठिरमथागम्य गन्धर्वाः सह पाण्डवैः |
५ क
वन पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमथाभ्येत्य पूजय़ामास सञ्जय़ः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरमथाविध्यद्दशभिर्निशितैः शरैः ||
१६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमथाहूय़ वाग्मी वचनमव्रवीत् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरमथाय़ान्तं शारद्वतरथं प्रति |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरमनुज्ञाप्य भीमसेनं तथैव च ||
७९ ख
वन पर्व
अध्याय २५५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमभिप्रेक्ष्य वाग्मी वचनमव्रवीत् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमिदं वाक्यमुवाच वदतां वरः ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरमुखाः पार्था वैकर्तनमुखा वय़म् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरमुखाः पार्थाः पुरस्कृत्य शिखण्डिनम् |
४० क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरमुखाः पार्थाः सूतपुत्रमुखा वय़म् ||
८४ ख
वन पर्व
अध्याय २४५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमुदीक्षन्तः सेहुर्दुःखमनुत्तमम् ||
६ ग
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरमुदीक्षन्तो हृष्टा द्रोणमुपाद्रवन् ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमुवाचेदं तूष्णीम्भूतमचेतसम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमुवाचेदं धौम्यो धर्मभृतां वरः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १५६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमुवाचेदं वचनं सत्यवादिनी ||
२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमुवाचेदं वाष्पव्याकुललोचनः ||
३६ ख
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमुवाचेदं वासुदेवः प्रतापवान् ||
४५ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरमुवाचेदं सान्त्वपूर्वमिदं वचः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय २३३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरवचः श्रुत्वा भीमसेनपुरोगमाः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरवधप्रेप्सुर्व्राह्ममस्त्रमुदैरय़त् ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
शकुनिरु उवाच
युधिष्ठिरश्च कौन्तेय़ो न नः कोपं करिष्यति ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
कृप उवाच
युधिष्ठिरश्च पृथिवीं निर्दहेद्घोरचक्षुषा |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरश्च भीमश्च यमौ कृष्णस्तथापरे |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
द्रोण उवाच
युधिष्ठिरश्च मे ग्राह्यो मिषतां सर्वधन्विनाम् |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरश्चोग्रवलो महात्मा; समाय़यौ त्वरितो जातकोपः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरसमभ्याशे तस्थौ मृत्युरिवान्तकः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरसमाज्ञप्ताः सृञ्जय़ानां महारथाः |
८ क
विराट पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरसमादिष्टो निजघ्ने पुरुषर्षभः |
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरसमीपे तु कथान्ते मधुसूदनः |
७ क
सभा पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्ततः सर्वानर्चय़ित्वा सभासदः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तमावार्य वाहुना वाहुशालिनम् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय १५६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तमासाद्य तपसा दग्धकिल्विषम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय १७७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तमासाद्य सर्पभोगाभिवेष्टितम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु कर्णस्य द्रोणस्य च महात्मनः |
३ क
वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु कौन्तेय़ वभूवास्वस्थचेतनः |
४० क
वन पर्व
अध्याय १८८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु कौन्तेय़ो मार्कण्डेय़ं महामुनिम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्तु कौरव्य रथमारुह्य सत्वरः |
४४ क