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अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
य उच्छिष्टः प्रवदति स्वाध्याय़ं चाधिगच्छति |
४० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४१
व्रह्मो उवाच
य उत्पन्नो महान्पूर्वमहङ्कारः स उच्यते |
१ क
वन पर्व
अध्याय ७९
नकुल उवाच
य उदीचीं दिशं गत्वा जित्वा युधि महावलान् |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
य ऋषभस्त्वय़ा पथि गच्छता दृष्टः स ऐरावतो नागराजः |
१७४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
व्रह्मो उवाच
य एकं भक्तमश्नीय़ाद्दद्यादेकं गवां च यत् |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
य एकः पाण्डवीं सेनां शरौघैः समवेष्टय़त् |
९६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७४
वैशम्पाय़न उवाच
य एतत्प्राप्य मुच्येत न तं पश्यामि पूरुषम् ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
य एतां दक्षिणां दद्यादक्षय़ां पृथिवीपतिः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
य एतां वेद गाय़त्रीं पुण्यां सर्वगुणान्विताम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
य एतानाक्षिपद्राष्ट्रात्सह मात्राविहिंसकान् |
७१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६५
भीष्म उवाच
य एतान्प्रज्ञय़ा दोषान्पूर्वमेवानुपश्यति |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ५८
जनमेजय़ उवाच
य एते कीर्तिता व्रह्मन्ये चान्ये नानुकीर्तिताः |
१ क
वन पर्व
अध्याय २५९
व्रह्मो उवाच
य एते कीर्तिताः सर्वे न तेभ्योऽस्ति भय़ं तव |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
व्रह्मो उवाच
य एनं विन्दतेऽऽत्मानमग्राह्यममृताशिनम् |
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
य एनं शरवर्षाणि वर्षन्तमुदिय़ाद्रथी ||
३६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १११
भीष्म उवाच
य एनं संश्रय़न्तीह भक्त्या नाराय़णं हरिम् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
य एनमभिजानन्ति न भय़ं तेषु विद्यते ||
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५५
वासुदेव उवाच
य एनमभितस्तिष्ठेत्कार्त्तिकेय़मिवाहवे ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १८३
सनत्कुमार उवाच
य एभिः स्तूय़ते शव्दैः कस्तं नार्चितुमर्हति ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय २३२
युधिष्ठिर उवाच
य एव कश्चिद्राजन्यः शरणार्थमिहागतम् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
य एव चैषां शेषः स्यात्स एवास्मान्न शेषय़ेत् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७३
भीष्म उवाच
य एव तु सतो रक्षेदसतश्च निवर्हय़ेत् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
य एव देवा हन्तारस्ताँल्लोकोऽर्चय़ते भृशम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
य एव धर्मः सोऽधर्मोऽदेशेऽकाले प्रतिष्ठितः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
य एव नो न कुप्यन्ति न लुभ्यन्ति तृणेष्वपि |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
कपिल उवाच
य एव प्रथमः कल्पस्तमेवाभ्याचरन्सह |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
य एव यत्नः क्रिय़ते परराष्ट्रावमर्दने |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
य एव सत्यान्नापैति स ज्ञेय़ो व्राह्मणस्त्वय़ा ||
२९ ग
विराट पर्व
अध्याय १९
द्रौपद्यु उवाच
य एव हेतुर्भवति पुरुषस्य जय़ावहः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
य एवं कुरुते कर्म शुभाशुभफलात्मकम् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२२
भीष्म उवाच
य एवं कुर्वते मर्त्याः सुखं जीवन्ति सर्वदा |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७५
भगवानु उवाच
य एवं कृतवुद्धिः सन्कर्मस्वेव प्रवर्तते |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय ६७
विराट उवाच
य एवं धर्मनित्यश्च जातज्ञानश्च पाण्डवः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
भीष्म उवाच
य एवं वर्तते नित्यं ज्ञातिसम्वन्धिमण्डले |
४१ क
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
य एवं वर्तते पार्थ पुरुषः सर्वकर्मसु |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
भीष्म उवाच
य एवं वर्तते राजा पौरजानपदेष्विह |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१
देवस्थान उवाच
य एवं वर्तते राजा राजधर्मविनिश्चितः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
श्रीभगवानु उवाच
य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
य एवं वेत्ति वै नित्यं निरात्मात्मगुणैर्वृतः |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १००
भीष्म उवाच
य एवं व्यूहते राजा स नित्यं जय़ते द्विषः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २३१
व्यास उवाच
य एवं सततं वेद सोऽमृतत्वाय़ कल्पते ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
य एवं सततं व्रूय़ात्सोऽपि पापैः प्रमुच्यते ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
य एवं स्तूय़ते शव्दैः कस्तं नार्चितुमिच्छति ||
५४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
यतिरु उवाच
य एवमनुमन्येरंस्तान्भवान्प्रष्टुमर्हति |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
य एवमुपसम्प्राप्तः स्थानं देवनमस्कृतम् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३४
मातो उवाच
य एवात्यन्तसुहृदस्त एनं पर्युपासते |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५२
व्राह्मण उवाच
य एवाहं स एव त्वमेवमेतद्भुजङ्गम |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
य एवाहवजेतारस्त एषां लोकजित्तमाः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
शुक्र उवाच
य एवोक्ताः सुमनसां प्रदाने गुणहेतवः |
४३ क