अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु गाङ्गेय़ं विदुरश्च महामतिः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु गोवासनस्य शैव्यस्य देविकां नाम कन्यां स्वय़ंवरे लेभे |
८३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु तं राजा प्रत्युद्गम्याभ्यपूजय़त् ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु तच्छ्रुत्वा दुर्योधनचिकीर्षितम् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
युधिष्ठिरस्तु तच्छ्रुत्वा वचस्तस्य दुरात्मनः |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु तान्विप्रान्प्रत्युवाच महामनाः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु तान्वृक्षान्पश्यमानो नगोत्तमे |
६९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्तु त्वरितो द्रौणिं श्लिष्य महारथम् |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्तु दाशार्हं प्रहृष्टः प्रत्यपूजय़त् |
१९ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु देवेन्द्रमेवंवादिनमीश्वरम् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु धर्मात्मा तद्व्रह्म मनसा यतः |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु धर्मात्मा शोकव्याकुलचेतनः |
१ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु निर्विण्णस्तेन गन्धेन मूर्छितः |
३० क
सभा पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु निश्चेष्टो गतसत्त्व इवाभवत् |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु नृपतिर्नातिप्रीतमनास्तदा |
२७ क
सभा पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
युधिष्ठिरस्तु प्रश्नेऽस्मिन्प्रमाणमिति मे मतिः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्तु मद्रेशं सहदेवश्च मारिष |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्तु मद्रेशमभ्यधावदमर्षितः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु मां राजा धर्मान्समनुपृच्छतु |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु राजर्षिरात्मकर्मापराधजम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु राजर्षिर्दध्यौ शोकपरिप्लुतः ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्तु राजेन्द्र ह्रदं तं सह सोदरैः |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु रामेण समागच्छद्यथाविधि |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्तु विप्रांस्ताननुमान्य महामनाः |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्तु हार्दिक्यं विद्ध्वा पञ्चभिराशुगैः |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्त्रिसप्तत्या प्रतिविन्ध्यश्च सप्तभिः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्त्वभिप्राय़मुपलभ्य महीक्षिताम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्त्वां पाञ्चालि सुखे धास्यत्यनुत्तमे ||
३० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्त्वय़ं धीमान्भवन्तमनुरुध्यते |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्थां पृथिवीं द्रष्टासि द्रुपदात्मजे ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य कार्यार्थमिह वत्स्यामहे क्षपाम् ||
२३ ख
विराट पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य कोपात्तु ललाटे स्वेद आसजत् ||
३० ख
विराट पर्व
अध्याय
२
अर्जुन उवाच
युधिष्ठिरस्य गेहेऽस्मि द्रौपद्याः परिचारिका |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५२
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिरस्य च क्रोधादर्जुनस्य च विक्रमात् |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्य च क्रोधो भीष्मार्जुनसमागमः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्य चरणावभिवाद्य कृताञ्जलिः |
६४ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
युधिष्ठिरस्य चार्तस्य व्यसने परिदेवनम् ||
१०८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्य चिच्छेद ध्वजं कार्मुकमेव च ||
३८ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य जननी कुन्ती साधुव्रते स्थिता ||
२० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य जननी देवी साधु निवर्त्यताम् |
५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
युधिष्ठिरस्य जननी भीमस्य विजय़स्य च |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य जननी स हि धर्मः सनातनः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य तद्वाक्यं वाढमित्यभ्यपूजय़न् ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य तद्वाक्यं श्रुत्वा द्वैपाय़नस्तदा |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य तद्वाक्यं श्रुत्वा भीष्मो महामनाः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्य तैर्वाक्यैर्मर्मण्यपि च घट्टिते ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य दाशार्ह ह्रीमतः सन्धिमिच्छतः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरस्य धैर्येण कृष्णस्य चरितेन च |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य नृपतेर्गान्धारीपुत्रसंय़ुतः ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरस्य नृपतेर्दुर्योधनपितुस्तथा |
१ क