आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
यथेन्द्राणी हरिहय़े स्वाहा चैव विभावसौ |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९६
मनुरु उवाच
यथेन्द्रिय़ार्थान्युगपत्समस्ता; न्नावेक्षते कृत्स्नमतुल्यकालम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७७
वासुदेव उवाच
यथेन्द्रेण हतः पूर्वं जम्भो देवासुरे मृधे ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
यथेप्सितेषु देशेषु विजह्रातेऽमराविव ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
यथेममात्मनो दोषं न निय़च्छस्युपेक्षसे ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
यथेमां क्षमसे वीर वध्यमानां वरूथिनीम् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
यथेमानि निमित्तानि भय़ाय़ाद्योपलक्षय़े ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४९
स्थाणुरु उवाच
यथेमे जन्तवः सर्वे निवर्तेरन्परन्तप ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१३६
वालधिरु उवाच
यथेमे पर्वताः शश्वत्तिष्ठन्ति सुरसत्तमाः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
यथेष्टं गच्छ दैत्येन्द्र स्वस्ति तेऽस्तु महासुर |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७
युधिष्ठिर उवाच
यथेष्टं गम्यतां काममनुजाने प्रसाद्य वः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
राम उवाच
यथेष्टं गम्यतां भद्रे किमन्यद्वा करोमि ते ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
यथेष्टं गम्यतां भद्रे मा ते कालोऽत्यगादय़म् ||
७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
यथेष्टं तानि रत्नानि जगृहुर्व्राह्मणर्षभाः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
७०
वृहदश्व उवाच
यथेष्टं त्वं गृहाणेदमक्षाणां हृदय़ं परम् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५
वासुदेव उवाच
यथेष्टं वर्तमानेषु पाण्डवेषु च तेषु च ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
यथेष्टगुणसम्पन्नं प्रवर्तकमिति स्मृतम् ||
६७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
यथेष्टमश्मवर्षेण प्रवर्षिष्ये रणे स्थितः |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०५
गुरुरु उवाच
यथेह निय़तं कालो दर्शय़त्यार्तवान्गुणान् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
यथेह यत्कृतं शुभं विपाप्मभिः कृतात्मभिः |
५९ क
वन पर्व
अध्याय
१८१
मार्कण्डेय़ उवाच
यथेहामुत्र च नरः सुखदुःखमुपाश्नुते ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
यथेय़ं गौर्हता मूढ प्रमत्तेन त्वय़ा मम |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
१३२
वैशम्पाय़न उवाच
यथेय़ं मम तद्वत्ते स तां रक्षितुमर्हसि ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
६५
सुदेव उवाच
यथेय़ं मे पुरा दृष्टा तथारूपेय़मङ्गना |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७४
कश्यप उवाच
यथैकगेहे जातवेदाः प्रदीप्तः; कृत्स्नं ग्रामं प्रदहेत्स त्वरावान् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२१३
व्रह्मो उवाच
यथैतच्चिन्तितं कार्यं त्वय़ा दानवसूदन |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
यथैतत्प्रथितं लोके येन चैतत्प्रवर्तितम् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२३
सञ्जय़ उवाच
यथैतन्मम कौन्तेय़ तथा तव न संशय़ः ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
२०
भीमसेन उवाच
यथैताः कीर्तिता नार्यो रूपवत्यः पतिव्रताः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
यथैतानि वरिष्ठानि तथा भारतमुच्यते ||
२०२ ख
विराट पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
यथैतानि विशिष्टानि जात्यां जात्यां वृकोदर |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
यथैतान्यकृथाः पार्थ महाकर्माणि वै पुरा |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
यथैते धार्तराष्ट्रस्य योधाः सानुगवाहनाः |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
यथैधः स्वसमुत्थेन वह्निना नाशमृच्छति |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
यथैनमनुवर्तन्ते पाञ्चालाः सह पाण्डवैः |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४६
व्रह्मो उवाच
यथैनमवमन्येरन्परे सततमेव हि ||
५० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१३
गान्धार्यु उवाच
यथैव कुन्त्या कौन्तेय़ा रक्षितव्यास्तथा मय़ा |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१९०
द्रुपद उवाच
यथैव कृष्णोक्तवती पुरस्ता; न्नैकान्पतीन्मे भगवान्ददातु |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१७३
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव कृष्णोऽप्रतिमो वलेन; तथैव राजन्स शिनिप्रवीरः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
यथैव क्षेत्रनिर्दाता निर्दन्वै क्षेत्रमेकदा |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
यथैव च मम प्रीतिरर्जुने शत्रुसूदने |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
यथैव च सितो मेघः शक्रचापेन शोभितः ||
९२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१०९
भीष्म उवाच
यथैव ते गुरुभिर्भावनीय़ा; स्तथा तेषां गुरवोऽप्यर्चनीय़ाः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
६६
वृहदश्व उवाच
यथैव ते पितुर्गेहं तथेदमपि भामिनि |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
राजो उवाच
यथैव तेऽभ्यनुज्ञातं तथा गृह्णीष्व माचिरम् ||
९८ ख
वन पर्व
अध्याय
२६५
मार्कण्डेय़ उवाच
यथैव त्रिदशेशस्य तथैव मम भामिनि ||
१५ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव त्वं तथा भीमस्तथा पार्थो यमौ तथा |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव त्वं तथैवान्ये न भजन्ति विमोहिताः ||
८१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव त्वं तथैवाहं को वा माश्वासय़िष्यति |
२० क