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विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
यथास्वं क्षत्रिय़ाः शूरा रथेषु समय़ोजय़न् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २०२
व्याध उवाच
यथास्वं ग्राहकान्येषां शव्दादीनामिमानि तु |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ३२
शेष उवाच
यथाह देवो वरदः प्रजापति; र्महीपतिर्भूतपतिर्जगत्पतिः |
२० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
यथाह भगवान्व्यासस्तथा तत्कर्तुमर्हसि ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
यथाह भरतश्रेष्ठ नारदस्तत्तथा कुरु |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४८
वासुदेव उवाच
यथाह राजा गाङ्गेय़ो विदुरश्च तथास्तु तत् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ९
व्यास उवाच
यथाह विदुरः प्राज्ञो यथा भीष्मो यथा वय़म् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
यथाहं जघ्निवान्पूर्वं हितार्थं नरकं तथा ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
मुनिरु उवाच
यथाहं तं निय़ोक्ष्यामि तत्करिष्यत्यसंशय़म् ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
यथाहं त्वा विजानामि यथा चाहं भवन्मनाः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय २८४
कर्ण उवाच
यथाहं द्विजमुख्येभ्यो दद्यां प्राणानपि ध्रुवम् ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
यथाहं धृतराष्ट्रेण शिष्टः पूर्वमितो गतः |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
यथाहं नाभिजानामि विजय़ेन कदाचन |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ६०
वृहदश्व उवाच
यथाहं नैषधादन्यं मनसापि न चिन्तय़े |
३७ क
वन पर्व
अध्याय १३८
लोमश उवाच
यथाहं पुत्रशोकेन देहं त्यक्ष्यामि किल्विषी |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
यथाहं भीमसेनेन व्युत्क्रम्य समय़ं हतः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १२३
लोमश उवाच
यथाहं रूपसम्पन्नो वय़सा च समन्वितः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय १५
युधिष्ठिर उवाच
यथाहं विमृशाम्येकस्तत्तावच्छ्रूय़तां मम ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४५
व्यास उवाच
यथाहनि तथा रात्रौ यथा रात्रौ तथाहनि |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
यथाहमनवद्याङ्गि पुत्रदर्शनलालसः ||
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय १४
द्रौपद्यु उवाच
यथाहमन्यं पाण्डुभ्यो नाभिजानामि कञ्चन |
१८ क
वन पर्व
अध्याय ५४
वृहदश्व उवाच
यथाहमभिजानीय़ां पुण्यश्लोकं नराधिपम् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय २४
गरुड उवाच
यथाहमभिजानीय़ां व्राह्मणं लक्षणैः शुभैः |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
यथाहमेवं जानामि वलवन्तं दुरासदम् |
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
युधिष्ठिर उवाच
यथाय़ं पुरुषो धर्ममिह च प्रेत्य चाप्नुय़ात् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय १८८
व्यास उवाच
यथाय़ं विहितो धर्मो यतश्चाय़ं सनातनः |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
यथाय़ं सर्वथा सार्थः क्षेमी शीघ्रमितो व्रजेत् |
११६ क
आदि पर्व
अध्याय ६५
शकुन्तलो उवाच
यथाय़मागमो मह्यं यथा चेदमभूत्पुरा |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
यथाय़ुक्तमनीकं हि धार्तराष्ट्रस्य पाण्डव |
११ क
वन पर्व
अध्याय १२१
वैशम्पाय़न उवाच
यथाय़ोगं यथाप्रीति प्रय़यौ भ्रातृभिः सह |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
यथाय़ोगं यथाप्रीति विजह्रुः कुरुवृष्णय़ः ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
यथाय़ोगं यथावीर्यं यथोत्साहं यथावय़ः |
३० क
वन पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
यथेच्छकं गच्छ वा तिष्ठ वा त्वं; सुसान्त्व्यमानाप्यसती स्त्री जहाति ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
यथेच्छकं स्वय़ङ्ग्राहाद्रथानतिरथांस्तथा |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
यथेच्छति तथा राजन्क्रीडते पुरुषोऽव्ययः ||
५६ ख
सभा पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
यथेच्छन्ति तथैवास्तु प्रत्यागच्छन्तु पाण्डवाः |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय १६५
वसिष्ठ उवाच
यथेच्छसि तथा क्षिप्रं कुरु त्वं मा विचारय़ ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
यथेदं कुरुतेऽध्यात्मं सुसूक्ष्मं विश्वमीश्वरः ||
७४ ख
वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
यथेदं मे त्वय़ा नाग वलं प्रतिहतं महत् ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
यथेदं व्यसनं प्राप्य नास्य सीदेन्महन्मनः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७
युधिष्ठिर उवाच
यथेद्धः प्रज्वलत्यग्निरसमिद्धः प्रशाम्यति |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
यथेध्यमानस्य समिद्धतेजसो; भूय़ो वलं वर्धते पावकस्य |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रं हरय़ो राजन्पुरा दैत्यवधोद्यतम् ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रः समरे दैत्यांस्तारकस्य वधे पुरा ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रः समरे राजन्प्राह विष्णुं यशस्विनम् ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रः समरे सर्वान्दैतेय़ान्वै समागतान् ||
३८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रभय़वित्रस्ता दानवास्तारकामय़े ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रस्तारकं पूर्वं स्कन्देन सह जघ्निवान् ||
५६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रस्य महाराज महत्या दैत्यसेनय़ा ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
यथेन्द्रस्य रणात्पूर्वं नमुचिर्दैत्यसत्तमः ||
३९ ख