शान्ति पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
यथैव दंशमशकं यथा चाण्डपिपीलिकम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
यथैव द्विजशार्दूलस्तथैव प्राविशत्तदा ||
२५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१३
गान्धार्यु उवाच
यथैव धृतराष्ट्रेण रक्षितव्यास्तथा मय़ा ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९५
भीष्म उवाच
यथैव धृतराष्ट्रो मे तथा पाण्डुरसंशय़म् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव पाण्डवा भूमौ सुषुपुः सह वान्धवैः |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५२
धृतराष्ट्र उवाच
यथैव पाण्डवाः सर्वे पराक्रान्ता जिगीषवः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१९२
धृतराष्ट्र उवाच
यथैव पाण्डोः पुत्रास्ते तथैवाभ्यधिका मम |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१९८
धृतराष्ट्र उवाच
यथैव पाण्डोस्ते वीराः कुन्तीपुत्रा महारथाः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव पितृतो भीष्मस्तथा त्वमपि मातृतः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव पूर्णादुदधेः स्यन्दन्त्यापो दिशो दश |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
यथैव भगवान्व्रह्मा लोकधाता पितामहः |
१२५ क
वन पर्व
अध्याय
१३५
इन्द्र उवाच
यथैव भवता चेदं तपो वेदार्थमुद्यतम् |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
यथैव मत्तो मद्येन त्वं तथा न च वा तथा |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
द्रुपद उवाच
यथैव मन्यते वीरो दाशार्हः पुरुषोत्तमः |
७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
यथैव मम पुत्राणां लोकाः शस्त्रजिताः प्रभो |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
१९८
धृतराष्ट्र उवाच
यथैव मम पुत्राणामिदं राज्यं विधीय़ते |
३ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
विराट उवाच
यथैव मम रत्नानि युष्माकं तानि वै तथा |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
यथैव वुध्यते मत्स्यस्तथैषोऽप्यनुवुध्यते |
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
यथैव शरवर्षाणि द्रोणो वर्षति पार्षते |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६८
भीष्म उवाच
यथैव शृङ्गं गोः काले वर्धमानस्य वर्धते |
७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
यथैव संसुप्तजने शिविरे प्राविशन्निशि |
१३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४८
भीष्म उवाच
यथैव सदृशो रूपे मातापित्रोर्हि जाय़ते |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
यथैव सवितुस्तुल्यं ज्योतिरन्यन्न विद्यते ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
यथैव सुसमिद्धस्य पावकस्यात्ममण्डलम् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
यथैव सौवलः क्षिप्रं शरवर्षाणि मुञ्चति |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव हास्तिनपुरं तद्वच्छिविरमावभौ ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९६
वैशम्पाय़न उवाच
यथैव हास्तिनपुरं द्वितीय़ं समलङ्कृतम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
९२
लोमश उवाच
यथैव हि नृगो राजा शिविरौशीनरो यथा |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५३
भीष्म उवाच
यथैव हि भवन्तो मे तथैव मम पाण्डवाः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
६६
वृहदश्व उवाच
यथैव हि ममैश्वर्यं दमय़न्ति तथा तव ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९९
द्रुपद उवाच
यथैव हि महाभागाः कौन्तेय़ा मम साम्प्रतम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
यथैव हि मय़ा गुप्तस्त्वय़ा गुप्तो भवेत्तथा ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
यथैव हि शरैः पार्थः सूतपुत्रेण छादितः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
यथैवात्थ तथैवैतत्त्वय़ि सत्यं भविष्यति ||
१०३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४५
भीष्म उवाच
यथैवात्मा तथा पुत्रः पुत्रेण दुहिता समा |
१२ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१४
भीमसेन उवाच
यथैवात्मा तथा भ्राता विशेषो नास्ति कश्चन ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
यथैवात्र तथान्येषु ज्ञानज्ञेय़ेषु हेतवः ||
१०१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४४
वासुदेव उवाच
यथैवान्ने तथा तेषां त्वय़ि भावो भविष्यति ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१११
पाण्डुरु उवाच
यथैवाहं पितुः क्षेत्रे सृष्टस्तेन महात्मना |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
यथैवेन्द्रस्तथा राजा सम्पूज्यो भूतिमिच्छता ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
यथैवेन्द्रो मनुष्येन्द्र चिराय़ विगतज्वरः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
वैशम्पाय़न उवाच
यथैवेश्वरसृष्टोऽस्मि यद्भावि या च मे गतिः |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४८
शौनक उवाच
यथैवैनान्पुराक्षैप्सीस्तथैवैनान्प्रसादय़ |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
यथैवोत्पद्यते किञ्चित्पञ्चत्वं गच्छते तथा |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
यथैवोत्पलपद्मानि मत्तय़ोर्द्विपय़ोस्तथा ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
यथैष निनदो घोरः श्रूय़ते राक्षसेरितः |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
यथैष व्राह्मणः प्राह द्रोणः सर्वार्थतत्त्ववित् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
यथैषा नानृता वाणी मय़ाद्य समुदाहृता |
७४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३७
विदुर उवाच
यथैषां ज्ञातुमिच्छन्ति नैर्गुण्यं पापचेतसः ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
यथैषां मामकास्तात तथैषां पाण्डवा अपि |
४९ क