सभा पर्व
अध्याय
३४
शिशुपाल उवाच
यदि भीताश्च कौन्तेय़ाः कृपणाश्च तपस्विनः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
यदि भीमार्जुनौ कृष्ण कृपणौ सन्धिकामुकौ |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७९
सहदेव उवाच
यदि भीमार्जुनौ कृष्ण धर्मराजश्च धार्मिकः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
यदि भीष्मः स्त्रिय़ं हन्याद्धन्यादात्मानमप्युत |
६५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
यदि भीष्मविनाशाय़ काश्ये चरसि वै व्रतम् |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७७
भीष्म उवाच
यदि भीष्मस्त्वय़ाहूतो रणे राम महामुने |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
यदि भीष्मे हते राजञ्जय़ं पश्यसि पाण्डव |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७७
राम उवाच
यदि भीष्मो रणश्लाघी न करिष्यति मे वचः |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५६
सौदास उवाच
यदि मत्तस्त्वदाय़त्तो गुर्वर्थः कृत एव सः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६४
भीष्म उवाच
यदि मन्त्राङ्गहीनोऽय़ं यज्ञो भवति वैकृतः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
यदि मन्दः सहाय़ेन भ्रात्रा दुःशासनेन च |
८५ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
यदि मां चापि कर्णं च भीष्मद्रोणौ च संय़ुगे |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
५८
दमय़न्त्यु उवाच
यदि मां त्वं महाराज न विहातुमिहेच्छसि |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
यदि मां त्वं रणे हित्वा न यास्याचार्यवद्द्रुतम् ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
यदि मां देवताः सर्वा योधय़ेय़ुः सवासवाः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
७२
देवय़ान्यु उवाच
यदि मां धर्मकामार्थे प्रत्याख्यास्यसि चोदितः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
यदि मां धर्मराजश्च भीमसेनश्च पाण्डवः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
यदि मां नाभिगच्छेथा न ते श्रेय़ो भवेद्ध्रुवम् ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
द्रोण उवाच
यदि मां नाभिगच्छेथा युद्धाय़ कृतनिश्चय़ः |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
कृप उवाच
यदि मां नाभिगच्छेथा युद्धाय़ कृतनिश्चय़ः |
६५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
शल्य उवाच
यदि मां नाभिगच्छेथा युद्धाय़ कृतनिश्चय़ः |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११
शकुनिरु उवाच
यदि मां नाभिशङ्कध्वं विभज्यात्मानमात्मना |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
यदि मां मन्यसे वीर प्राप्तमर्हमिवातिथिम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
७१
दमय़न्त्यु उवाच
यदि मां मेघनिर्घोषो नोपगच्छति नैषधः |
११ क
वन पर्व
अध्याय
२८४
कर्ण उवाच
यदि मां वलवृत्रघ्नो भिक्षार्थमुपय़ास्यति ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
७१
दमय़न्त्यु उवाच
यदि मां सिंहविक्रान्तो मत्तवारणवारणः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
यदि मानुषतां देवि कदाचित्स निगच्छति |
५५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
यदि मामनुजानीय़ाद्भवान्गन्तुं तपोवनम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणय़ः |
४६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
यदि मे नाग्रजस्त्वन्यस्ततः स्रक्ष्याम्यहं प्रजाः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
यदि मे पश्यतः कालो भूतानि न विनाशय़ेत् |
२२ क
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
यदि मे प्रथमं द्रोणः शरीरे प्रहरिष्यति |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१९२
विष्णुरु उवाच
यदि मे भगवान्प्रीतः पुण्डरीकनिभेक्षणः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
यदि मे याचमानाय़ा वचनं न करिष्यसि |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
९९
व्यास उवाच
यदि मे सहते गन्धं रूपं वेषं तथा वपुः |
४३ क
विराट पर्व
अध्याय
३४
उत्तर उवाच
यदि मे सारथिः कश्चिद्भवेदश्वेषु कोविदः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
यदि मेऽस्ति तपस्तप्तं यदि दत्तं हुतं यदि |
९६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५७
भीष्म उवाच
यदि यज्ञांश्च वृक्षांश्च यूपांश्चोद्दिश्य मानवाः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४९
युधिष्ठिर उवाच
यदि यत्नो भवेन्मर्त्यः स सर्वं फलमाप्नुय़ात् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
यदि याप्यन्ति पुरुषाः स्त्रिय़ो नार्हन्ति याप्यताम् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
यदि यामि विना भीमं किं मां क्षत्रं वदिष्यति |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
यदि युद्धेन जेय़ाः स्युरिमे कौरवनन्दनाः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
व्राह्मण उवाच
यदि राजन्प्रसन्नस्त्वं मम चेच्छसि चेद्धितम् |
४१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
६
युधिष्ठिर उवाच
यदि राजा न भुङ्क्तेऽय़ं गान्धारी च यशस्विनी ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३७
सूत उवाच
यदि राजा न रक्षेत पीडा वै नः परा भवेत् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
यदि राजा मनुष्येषु त्राता भवति धार्मिकः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९५
भीष्म उवाच
यदि राज्यं न ते प्राप्ताः पाण्डवेय़ास्तपस्विनः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
यदि राज्यं यदि धनं यदि गाः संशितव्रत |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
यदि रुद्रो द्विधाकृत्य युध्येतात्मानमात्मना |
३९ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
यदि लोकानिमान्प्राप्तास्ते च सर्वे महारथाः |
४ क