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सभा पर्व
अध्याय ५६
विदुर उवाच
युधिष्ठिरेण सफलः संस्तवोऽस्तु; साम्नः सुरिक्तोऽरिमतेः सुधन्वा ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
युधिष्ठिरेण सम्प्राप्तो राजसूय़ो महाक्रतुः ||
८५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरेण सहित उपाविशदरिन्दमः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरेणेन्द्रकल्पेन चैव; योऽपध्यानान्निर्दहेद्गां दिवं च ||
७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरेणैवमुक्तः कौन्तेय़ः श्वेतवाहनः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरेणैवमुक्तो भीष्मः शान्तनवस्तदा |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरेमं वीभत्सुं त्वं सान्त्वय़ितुमर्हसि |
२३ ख
वन पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरैवमर्थेषु न स्पृहां कर्तुमर्हसि |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो गुडाकेशं भ्राता भ्रातरमच्युतम् ||
२५ ग
विराट पर्व
अध्याय ४५
अश्वत्थामो उवाच
युधिष्ठिरो जितः कस्मिन्भीमश्च वलिनां वरः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो ददर्शाथ नैव पार्थं न माधवम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो द्वादशभिः प्रत्यविध्यत्पितामहम् ||
४ ग
उद्योग पर्व
अध्याय २९
वासुदेव उवाच
युधिष्ठिरो धर्ममय़ो महाद्रुमः; स्कन्धोऽर्जुनो भीमसेनोऽस्य शाखाः |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
युधिष्ठिरो धर्ममय़ो महाद्रुमः; स्कन्धोऽर्जुनो भीमसेनोऽस्य शाखाः |
६६ क
वन पर्व
अध्याय १९२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो धर्मराजः पप्रच्छ भरतर्षभ |
१ क
वन पर्व
अध्याय १७८
सर्प उवाच
युधिष्ठिरो धर्मराजः शापात्त्वां मोक्षय़िष्यति ||
४० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो धर्मसुतो व्यासं वचनमव्रवीत् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २
कर्ण उवाच
युधिष्ठिरो धृतिमतिधर्मतत्त्ववा; न्वृकोदरो गजशततुल्यविक्रमः |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो नरपतिः स चैनान्प्रत्यपूजय़त् ||
१७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
जनमेजय़ उवाच
युधिष्ठिरो नरपतिर्न्यवसत्सजनो द्विज ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो भीमसेनः शिखण्डी सात्यकिर्यमौ |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो भीमसेनः सव्यसाची यमौ तथा ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २५०
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो भीमसेनार्जुनौ च; माद्र्याश्च पुत्रौ पुरुषप्रवीरौ |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो भीमसेनो धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो भूतहिते सदा रतो; वृकोदरस्तद्वशगस्तथा यमौ ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १४
धृतराष्ट्र उवाच
युधिष्ठिरो महातेजा भवतः पालय़िष्यति ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो महातेजाः पप्रच्छेदं च धर्मवित् ||
७६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो महाराज गजानीकं महारथः |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो महाराज धृतराष्ट्रेऽभ्युपाहरत् ||
९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो महाराजः फल्गुनं व्यादिदेश ह ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो महेष्वासो मद्रराजानमाहवे |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो मय़ा दृष्टो ग्रसमानो वसुन्धराम् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो यत्र जटी महात्मा; वनाश्रय़ः क्लिश्यति चीरवासाः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो यत्र सैन्ये स्वय़मेव वलार्णवे |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो यमौ मत्स्या द्रुपदस्यात्मजास्तथा ||
४ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो यय़ावग्रे भीमस्तु तदनन्तरम् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो रथश्रेष्ठः सर्वत्र तु धनञ्जय़ः ||
४१ ग
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो राजपुत्रो ज्येष्ठो नः कुलवर्धनः |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
युधिष्ठिरो राजपुत्रो महात्मा; न्याय़ागतं राज्यमिदं च तस्य |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरो राजसूय़ं क्रतुमाहर्तुमिच्छति ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरो हि तावद्वै सन्धिस्ते तात युज्यताम् ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरोऽपि कौरव्यो भ्रातृभ्यां सहितस्तदा |
४६ क
वन पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरोऽपि धर्मात्मा तमेवार्थं विचिन्तय़न् |
११४ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरोऽपि धर्मात्मा भ्रातृभिः सहितो रणे |
५ क
वन पर्व
अध्याय १७८
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरोऽपि धर्मात्मा भ्रात्रा भीमेन सङ्गतः |
४६ क
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरोऽपि सङ्क्रुद्धो माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरोऽव्रवीत्तूर्णं पार्षतं पृतनापतिम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
युधिष्ठिरोऽव्रवीद्राजन्सर्वसैन्यानि भारत ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरोऽहं नृपते नमस्ते जाह्नवीसुत |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
युधिष्ठिरोऽहमस्मीति वाक्यमुक्त्वाग्रतः स्थितः |
२३ क