द्रोण पर्व
अध्याय
१५५
वासुदेव उवाच
यमो वा नोत्सहेत्कर्णं रणे प्रतिसमासितुम् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
यमो वैवस्वतस्तस्य निर्यातय़ति दुष्कृतम् |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
यमो वैश्रवणश्चैव वरुणश्च यतोऽर्जुनः ||
४० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
यमोऽव्रवीद्विद्धि भोज्यास्त्वमेता; ये दातारः साधवो गोरसानाम् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
यमोऽव्रवीन्मां न मृतोऽसि सौम्य; यमं पश्येत्याह तु त्वां तपस्वी |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
यमौ च कृष्णा च पुरोहितश्च; रथान्महार्हान्परमाश्वय़ुक्तान् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२२५
वैशम्पाय़न उवाच
यमौ च कृष्णां च युधिष्ठिरं च; भीमं च दृष्ट्वा सुखविप्रय़ुक्तान् |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
यमौ च चक्ररक्षौ ते भवितारौ महावलौ |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
यमौ च चेकितानश्च केकय़ाः पञ्च चैव ह |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३
सात्यकिरु उवाच
यमौ च दृढधन्वानौ यमकल्पौ महाद्युती |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
कृप उवाच
यमौ च द्रौपदेय़ाश्च राक्षसश्च घटोत्कचः |
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
यमौ च द्रौपदेय़ाश्च साधु साध्विति चुक्रुशुः ||
७७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
यमौ च पुरुषव्याघ्रौ मन्त्री च मधुसूदनः ||
४० ग
वन पर्व
अध्याय
१२५
लोमश उवाच
यमौ च भीमसेनश्च कृष्णा चामित्रकर्शन |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
यमौ च भीमसेनश्च प्राक्रोशन्त धनञ्जय़म् ||
५५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
यमौ च भीमसेनश्च शिशुपालस्य चात्मजः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
यमौ च युधि द्रष्टासि तदा त्वं किं करिष्यसि ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
यमौ च युय़ुधानश्च पाण्डवश्च वृकोदरः ||
४९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
यमौ च युय़ुधानश्च सहिताः कर्णमभ्ययुः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२५३
वैशम्पाय़न उवाच
यमौ च राजा च महाधनुर्धरा; स्ततो दिशः संमुमुहुः परेषाम् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८७
वैशम्पाय़न उवाच
यमौ च राज्ञा सन्दिष्टौ विविशुर्भवनं महत् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१७३
वैशम्पाय़न उवाच
यमौ च वीरौ सुरराजकल्पा; वेकान्तमास्थाय़ हितं प्रिय़ं च ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८७
युधिष्ठिर उवाच
यमौ तु तत्र राजेन्द्र यत्र कृष्णा प्रतिष्ठिता |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
यमौ यमोपमौ चैव ददौ दानान्यनेकशः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२
कर्ण उवाच
यमौ रणे यत्र यमोपमौ वले; ससात्यकिर्यत्र च देवकीसुतः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
यमौ वा पुरुषव्याघ्रौ घोररूपाविमौ रणे ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
यमय़न्मूर्धजांस्तत्र वीक्ष्य चैव दिशो दश ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४२
युधिष्ठिर उवाच
यमय़ोः पूर्वजः पार्थः श्वेताश्वोऽमितविक्रमः ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
यमय़ोः प्रहसन्राजन्विव्याधैव च सप्तभिः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
यमय़ोरार्ययाप्रमत्तय़ा भवितव्यमिति ||
७६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
यमय़ोर्धर्मपुत्रस्य पार्षतस्य च पश्यतः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
यमय़ोर्धर्मपुत्रस्य विजय़स्याच्युतस्य च ||
११५ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
यवक्रीः पितरं दृष्ट्वा तपस्विनमसत्कृतम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१३७
लोमश उवाच
यवक्रीः सहसोत्थाय़ प्राद्रवद्येन वै सरः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१३७
लोमश उवाच
यवक्रीतं स हत्वा तु राक्षसो रैभ्यमागमत् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
यवक्रीतमथोक्त्वैवं देवाः साग्निपुरोगमाः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
पराशर उवाच
यवक्रीतश्च नृपते द्रोणश्च वदतां वरः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
यवक्रीतस्य यत्तीर्थमुचितं शौचकर्मणि |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
यवक्रीतोऽथ रैभ्यश्च अर्वावसुपरावसू |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
यवक्रीतोऽथ रैभ्यश्च कक्षीवानौशिजस्तथा |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
१३७
लोमश उवाच
यवक्रीस्तामुवाचेदमुपतिष्ठस्व मामिति |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
मान्धातो उवाच
यवनाः किराता गान्धाराश्चीनाः शवरवर्वराः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
यवनाः पारदाश्चैव शकाश्च सुनिकैः सह ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
यवनानां च तत्सैन्यं शकानां च महद्वलम् ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
यवनाश्च सकाम्वोजा दारुणा म्लेच्छजातय़ः |
६४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
यवनो जनकश्चैव तथा दृढरथो नृपः |
४३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
यवप्रस्थं च ते सक्तूनकुर्वन्त तपस्विनः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
यवमध्यः कृशग्रीवो ह्रस्वपादो महाहनुः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
यवसेन्धनदिग्धानां कारय़ेत च सञ्चय़ान् ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८८
धृष्टद्युम्न उवाच
यवीय़सः कथं भार्यां ज्येष्ठो भ्राता द्विजर्षभ |
१० क