वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
रंस्यन्ते वीरकर्माणि कीर्तय़न्तः पुनः पुनः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
रक्तं पुनः सह्यतरं सुखं तु; हारिद्रवर्णं सुसुखं च शुक्लम् ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
रक्तं शिरसि धार्यं तु तथा वानेय़मित्यपि |
७७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
रक्तचन्दनदिग्धाङ्गौ शरैः कृतमहाव्रणौ |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
रक्तचन्दनदिग्धाङ्गौ समदौ वृषभाविव |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
रक्ततुङ्गनखोपेते पीनश्रोणिपय़ोधरे ||
५४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
रक्तपद्मोदय़ं नाम विमानं साधय़ेन्नरः |
५६ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
रक्तपीतारुणाः पार्थ पादपाग्रगता द्विजाः |
७४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
रक्तभूय़िष्ठवर्णाश्च कृष्णाश्चैवोपहारय़ेत् ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
रक्तमाल्यं न धार्यं स्याच्छुक्लं धार्यं तु पण्डितैः |
७६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
रक्तमाल्याम्वरधरा तारेव नभसस्तलात् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७७
भीष्म उवाच
रक्तमूत्रपुरीषाणां दोषाणां सञ्चय़ं तथा |
३८ क
विराट पर्व
अध्याय
८
सुदेष्णो उवाच
रक्ता पञ्चसु रक्तेषु हंसगद्गदभाषिणी ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
रक्ताक्षं सुमहानासं सुकर्णं सुकटीतटम् |
१०८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
रक्ताक्षमूर्ध्वरोमाणं काकजङ्घाक्षिनासिकम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
रक्ताक्षा हेमसङ्काशा महाकाय़ा महावलाः ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
रक्ताक्षाः पिङ्गलाक्षाश्च शुक्तिकर्णाः प्रहारिणः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
रक्ताङ्गः सर्वसारङ्गः समृद्धः पाटराक्षसौ ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
रक्तानि वा शोधय़ितुं यथा नास्ति तथैव सः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०३
नारद उवाच
रक्तान्तानां विशालानां सहस्रं सर्वतोऽभवत् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
रक्ताम्वरधराः सर्वे सर्वे रक्तविभूषणाः |
१४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
रक्ताम्वरधरामेकां पाशहस्तां शिखण्डिनीम् ||
६४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
रक्ताम्वरस्रक्तपनीय़योगा; न्नारी प्रकाशा इव सर्वगम्या ||
३४ ख
विराट पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
रक्तारक्तानि देवानां समदृश्यन्त तिष्ठताम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
रक्तार्द्रवसना श्यामा नारीव मदविह्वला ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
रक्ताशोक इवोत्फुल्लो व्यभ्राजत रणाजिरे ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
रक्ताश्च नाभ्यजानन्त कार्याकार्यं युधिष्ठिर ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१८७
देव उवाच
रक्तो द्वापरमासाद्य कृष्णः कलिय़ुगे तथा ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
रक्तोक्षिता घोररूपा विरेजुर्दानवा इव ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
रक्तोक्षितैश्छिन्नभुजैरपकृष्टशिरोरुहैः |
५२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
रक्तोत्तमाङ्गः क्रव्यादो गृध्रः परमभीषणः ||
१५ ग
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
रक्तोत्पलवनानीव विभान्ति रुचिराणि वै |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
रक्तोत्पलवनैश्चैव मणिदण्डैर्हिरण्मय़ैः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
रक्तोष्ठं ताम्रजिह्वास्यं रक्तकर्णं चलद्भ्रुवम् |
६८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
रक्तोष्णीषाश्च दृश्यन्ते सर्वे माधव पार्थिवाः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
रक्ष कर्णं रणे यत्तो वृतः सैन्येन मानद ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
रक्ष त्वमपि चात्मानं चण्डालाज्जातिकिल्विषात् ||
१८९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
रक्ष दुर्योधनात्मानमात्मा सर्वस्य भाजनम् |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११
शल्य उवाच
रक्ष मां नहुषाद्व्रह्मंस्तवास्मि शरणं गता ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१००
लोमश उवाच
रक्ष लोकांश्च देवांश्च शक्रं च महतो भय़ात् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
रक्षःपिशाचदैत्यानां नागानां चाधिकः सदा |
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
रक्षःपिशाचान्हिमवान्गुह्यकान्गन्धमादनः |
७८ क
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
रक्षणं च करिष्येऽस्याः सर्वशक्त्या तपोधन ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
रक्षणं चात्मनः सङ्ख्ये शत्रवोऽप्यभ्यपूजय़न् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
रक्षणं चैव पौराणां स्वराष्ट्रस्य विवर्धनम् |
७० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
रक्षणं चैव मन्त्रस्य महिषी द्रुपदस्य सा |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
रक्षणं सर्वभूतानामिति क्षत्रे परं मतम् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
रक्षणाद्धर्मराजस्य सत्यस्य परिपालनात् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
शुनःसख उवाच
रक्षणार्थं च सर्वेषां भवतामहमागतः ||
७८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
रक्षणार्थं तु भूतानां प्रविशन्ति दिवाकरम् ||
२९ ख