chevron_left  रथमारुह्यarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
रथमारुह्य तेजस्वी प्रय़यौ जवनैर्हय़ैः |
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
रथमारुह्य पद्भ्यां वा विनामय़तु कार्मुकम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
रथमारोप्य कृष्णेन यत्र कर्णोऽनुमन्त्रितः |
१४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४
नारद उवाच
रथमारोप्य तां कन्यामाजुहाव नराधिपान् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
रथमारोप्य ताः कन्या भीष्मः प्रहरतां वरः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
रथमारोपय़च्चैनं सर्वसैन्यस्य पश्यतः ||
३१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
रथमारोपय़ां चक्रे कन्यास्ता भरतर्षभ ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
रथमारोपय़ामास पार्थः प्रहरतां वरः ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
रथमारोपय़ामास विकर्णस्तनय़स्तव ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
रथमारोपय़ामास विसञ्ज्ञं पांसुगुण्ठितम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
रथमार्गप्रमाणं तु कौन्तेय़ो निशितैः शरैः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
रथमार्गविघातार्थं व्याय़ुधः प्रविवेश ह ||
६२ ग
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
रथमार्गांस्ततश्चक्रे भीमसेनो महावलः |
५४ क
वन पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
रथमार्गाद्वहूंस्तत्र विचेरुर्वातरंहसः |
७ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
रथमार्गान्विचित्रांस्ते विचरन्तो महारथाः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
रथमार्गैर्विचित्रैश्च विचित्ररथसङ्कुलम् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
रथमावार्य गदय़ा केशवं समताडय़त् ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
रथमास्थाय़ च पुनर्माय़या निर्मितं पुनः ||
८७ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
रथमास्थाय़ तं दिव्यं निर्जगाम गिरिव्रजात् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७९
भीष्म उवाच
रथमास्थाय़ रुचिरं राजतं पाण्डुरैर्हय़ैः |
१० क
विराट पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
रथमास्थाय़ वीभत्सुः कौन्तेय़ः श्वेतवाहनः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
सञ्जय़ उवाच
रथमेकं समारुह्य भीमं वाणैरविध्यताम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
रथमोचनमादिश्य सन्ध्यामुपविवेश ह ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
रथर्षभः कृतवर्माणमार्च्छ; न्माद्रीपुत्रो नकुलश्चित्रय़ोधी |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
रथर्षभाणां सर्वेषां कथमासीत्तदा मनः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
रथर्षभाणामुग्राणां संनिपातममानुषम् ||
३४ ख
विराट पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
रथर्षभास्ते तु रथर्षभेण; वीरा रणे वीरतरेण भग्नाः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६३
भीष्म उवाच
रथवंशेन शत्रूणां कदनं वै करिष्यति ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
रथवन्धमिमं घोरं पृथिव्यां नास्ति कश्चन |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६३
सञ्जय़ उवाच
रथवेगेन तीव्रेण कम्पय़न्निव मेदिनीम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
रथव्रजाश्च निहता हताश्च वरवारणाः ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
रथव्रजास्ततो हृष्टाः साधु साध्विति चुक्रुशुः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
रथव्रजेन संरुद्धस्तैरमित्रैरथार्जुनिः |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
रथव्रातेन महता सर्वतः पर्यवारय़न् ||
१७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
रथशक्तिं मुमोचास्मै दीप्तामग्निशिखामिव ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
रथशक्तिभिरन्योन्यं विशिखैश्च ततक्षतुः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
रथशक्तिभिरन्योन्यं विशिखैश्चाप्यकृन्तताम् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
रथशक्तीः समुत्क्षिप्य भृशं सिंहा इवानदन् ||
५५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
रथशव्दधनुःशव्दैर्नादय़न्तं दिशो दश |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
रथशिक्षां तु दाशार्हो दर्शय़ामास वीर्यवान् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
धृतराष्ट्र उवाच
रथश्च कीदृशस्तस्य माय़ाः सर्वाय़ुधानि च ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
रथश्च चतुरन्ताय़ां यस्य नास्ति समस्त्विषा ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
रथश्च विहितोऽस्माभिर्विचित्राय़ुधसंवृतः |
९९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
रथश्चैव समासाद्य पदातिं तुरगं तथा ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २६
दुर्योधन उवाच
रथश्रेष्ठो ध्रुवं सङ्ख्ये पार्थो नाभिभविष्यति ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
रथश्रेष्ठो रथात्तूर्णं भूमौ पार्थो न्यपातय़त् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६२
दुर्योधन उवाच
रथसङ्ख्यां तु कार्त्स्न्येन परेषामात्मनस्तथा |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
रथसङ्ख्यां महावाहो सहैभिर्वसुधाधिपैः ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
रथसङ्गो न चेत्तस्य धनुर्वा न व्यशीर्यत |
७३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
रथसङ्घांस्तथा नागान्हय़ांश्च सह सादिभिः |
५३ क