भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
रथानीकं गाहमानं सहसा पृष्ठतोऽन्वय़ुः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
रथानीकं नरव्याघ्राः केचिदभ्यपतन्रथैः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
रथानीकं परित्यज्य शूराः सुदृढधन्विनः ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
२५४
वैशम्पाय़न उवाच
रथानीकं शरवर्षान्धकारं; चक्रुः क्रुद्धाः सर्वतः संनिगृह्य ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
रथानीकमहं रक्ष्ये पाञ्चालसहितोऽनघ ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
रथानीकान्यदृश्यन्त नगराणीव भूरिशः |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
रथानीकावगाढश्च वारणाश्वशतैर्वृतः |
६६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
रथानीकेन महता निर्ययौ कुरुनन्दनः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
रथानीकेन महता सर्वतः पर्यवारय़त् ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
रथानेव रथा यान्तु कुञ्जराः कुञ्जरानपि ||
५८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
रथान्मे वहुसाहस्रान्दिव्यैरस्त्रैर्महावलः |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
रथान्वहुविधान्भग्नान्हेमकिङ्किणिनः शुभान् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
रथान्विपरिकर्षन्तो हतेषु रथय़ोधिषु ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
रथान्विमानप्रतिमान्सज्जय़न्त्राय़ुधध्वजान् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
रथान्विशकलीकुर्वन्महाभ्राणीव मारुतः ||
१२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
भीम उवाच
रथान्विशीर्णाञ्शरशक्तिताडिता; न्पश्यस्वैतान्रथिनश्चैव सूत ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
रथान्सप्तशतान्हत्वा कुरूणामातताय़िनाम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
रथान्ससूतान्सहय़ान्गजांश्च; सर्वानरीन्मृत्युवशं शरौघैः |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
रथान्हेमपरिष्कारान्सुय़ुक्ताञ्जवनैर्हय़ैः |
११० क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
रथान्हय़ान्पदातांश्च ममृदुः शतशो रणे ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
रथाभ्यां चेरतुस्तत्र मण्डलानि सहस्रशः ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
रथाभ्यां नादय़न्तौ च दिशः सर्वा विचेरतुः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
रथाभ्यां रथिनां श्रेष्ठौ यथा वै देवदानवौ |
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
रथाभ्याशे चकाशेते चन्द्रस्येव पुनर्वसू ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
रथारूढांश्च सुवहून्पदातींश्चाप्यपातय़त् ||
१५ ग
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
रथार्धं केचिदादाय़ दिशो दश विवभ्रमुः |
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च दन्तिनश्चैव पत्तिभिस्तत्र सूदिताः ||
७३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च निहता नागैर्नागा हय़पदातिभिः ||
१२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च मुख्या राजेन्द्र युक्ता वाजिभिरुत्तमैः |
५२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च रथिभिः सार्धं हय़ाश्च हय़सादिभिः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च रथिभिर्हीना निर्मनुष्याश्च वाजिनः |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च रथिभिर्हीना हतसारथय़स्तथा |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च वहवो भग्ना हय़ाश्च शतशो हताः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
रथाश्च वहुसाहस्राः शोभमाना महाध्वजाः ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६९
भीष्म उवाच
रथाश्चातिरथाश्चैव ये चाप्यर्धरथा मताः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्चानेकसाहस्रा ये तेषामनुय़ाय़िनः |
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वगजनादांश्च शस्त्रशव्दांश्च दारुणान् ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वगजपत्तीनां पदनेमिसमुद्धतम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वगजपत्त्योघैर्द्रोणेन विहितः स्वय़म् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वद्विपपत्त्योघाः सलिलौघा इवाद्भुताः |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वद्विपहीनांस्तु तान्भीमो गदय़ा वली |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वनरनागानां प्रवृत्तमधरोत्तरम् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वनरनागानामलङ्कारैश्च सुप्रभैः |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
रथाश्वनरमातङ्गा नावतिष्ठन्ति संय़ुगे ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वनरमातङ्गान्विनिहत्य सहस्रशः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वनागकलिलं शरशक्त्यूर्मिमालिनम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वनागाकुलदीपदीप्तं; संरव्धय़ोधाहतविद्रुताश्वम् |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वनागासुहरैर्वध्यतामर्जुनेषुभिः ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वपत्तय़ो नागै रथैर्नागाश्च पत्तय़ः |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
रथाश्वमातङ्गगणाञ्जघान; प्रच्छादय़ामास दिशः शरैश्च ||
१४ ख