कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
रथिभिर्वाजिभिः सूतैः पत्तिभिश्च तथा गजैः |
७३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
रथिभिर्वारणैरश्वैः पदातैश्च समीरितम् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
रथी च रथिना योध्यो गजेन गजधूर्गतः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
रथी जघान सम्प्राप्य वाणगोचरमागतान् ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
रथी द्विपस्थेन हतोऽपतच्छरैः; क्राथाधिपः पर्वतजेन दुर्जय़ः |
४७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
रथी नागं समासाद्य विचरन्रणमूर्धनि |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
रथी यत्कुरुते कृष्ण सारथिर्यत्नमास्थितः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
रथी रथिनमासाद्य प्राहिणोद्यमसादनम् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
रथी रथिनमासाद्य शरैः कनकभूषणैः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
रथी रथेनाभिहतः ससूतः; पपात साश्वः सरथः सकेतुः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
रथे कुर्वन्तु मे राजन्यथावद्रथकल्पकाः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
रथे क्रोशमतिक्रान्ते तस्य ते घ्नन्ति शात्रवान् ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
रथे चरत्येष रथप्रवीरः; शीघ्रैर्हय़ैः कौरवराजपुत्रः |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
रथे चारु चरन्वीरः प्रत्यविध्यदरिन्दमः ||
७३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
रथे प्रास्थापय़द्राजा शस्त्राणि विविधानि च ||
५३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
रथे रथे शतं नागाः पद्मिनो हेममालिनः ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
रथे वातजवा युक्ताः सर्वशव्दातिगा रणे ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
रथे वैवाहिके युक्ताः प्रतोदेन कृतव्रणाः ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
रथे श्वेतहय़े तिष्ठन्नर्जुनो वह्वशोभत ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
रथे समुच्छ्रितो भाति कालाग्निरिव लोहितः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
रथेन कर्णस्तेजस्वी जगामाभिमुखो रिपून् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४
नारद उवाच
रथेन काञ्चनाङ्गेन कर्णेन सहितो यय़ौ ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१२
वैशम्पाय़न उवाच
रथेन काञ्चनाङ्गेन कल्पितेन यथाविधि |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
२१०
वैशम्पाय़न उवाच
रथेन काञ्चनाङ्गेन द्वारकामभिजग्मिवान् ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
रथेन काञ्चनाङ्गेन सहदेवः समभ्ययात् |
४४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
रथेन जाम्वूनदभूषणेन; व्यवस्थितः समरे योद्धुकामः ||
९८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
रथेन तु रथाग्र्याणामकरोत्तां मृषा तदा ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
रथेन तेन तं कृष्ण उपारुह्य यय़ौ तदा ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
रथेन तेन दिव्येन हरिय़ुक्तेन मातलिः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
रथेन तेनानलवर्चसा च; विद्रावय़न्पाण्डववाहिनीं ताम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
रथेन तेनाशु यय़ौ यथार्को; विशन्प्रभाभिर्भगवांस्त्रिलोकम् ||
८० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
रथेन पातय़ामास श्रीमान्दृप्तस्तपस्विनम् ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
रथेन प्रय़यौ क्षिप्रं सङ्ग्रामे केशवाज्ञय़ा ||
५२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
रथेन मेघघोषेण ददृशुर्नान्तरं जनाः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
रथेन मेघघोषेण द्रौणिमेवाभ्यधावत ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
रथेन यत्तः कौन्तेय़ो वेगेन प्रय़यौ तदा ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
रथेन रथिनं पश्येत्क्लिश्यमानमचेतनम् ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
रथेन वा महावाहुः क्षपय़ञ्शत्रुवाहिनीम् ||
२५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
रथेन शिविरं प्राय़ाज्जिघांसुर्द्विषतो वली ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
रथेन सङ्ग्रामनदीं तरत्येष कपिध्वजः ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
रथेन हरिय़ुक्तेन तं देशमुपजग्मिवान् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
रथेन हर्यश्वय़ुजा सुरर्षभः; सदः सुराणामभिसत्कृतो यय़ौ ||
८७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१२
वैशम्पाय़न उवाच
रथेनाकाशगेनैव प्रय़यौ स्वपुरं प्रति ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
रथेनातिपताकेन चन्द्रवर्णहय़ेन च ||
९८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
रथेनातिपताकेन पाण्डवं प्रत्यवारय़त् ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
रथेनातिपताकेन मनोमारुतरंहसा ||
५७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
रथेनातिपताकेन सूतपुत्रो व्यदृश्यत ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
रथेनादित्यवपुषा भीमः प्रहरतां वरः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
रथेनादित्यवर्णेन पार्वत्या सहितः प्रभुः ||
१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
रथेनादित्यवर्णेन भास्वरेण पताकिना ||
१६ ख