chevron_left  उपगम्याव्रुवन्सर्वेarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय १७
शल्य उवाच
उपगम्याव्रुवन्सर्वे दिष्ट्या वर्धसि शत्रुहन् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ११८
नारद उवाच
उपगम्याश्रमपदं गङ्गाय़मुनसङ्गमे ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
उपगाय़न्ति वीभत्सुमुपनृत्यन्ति चाप्सराः |
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२१
नारद उवाच
उपगीतोपनृत्तश्च गन्धर्वाप्सरसां गणैः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
उपगीय़माना नारीभिरस्वपन्कुरुनन्दनाः ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
उपगीय़मानो गन्धर्वैः स्त्रीसहस्रसहाय़वान् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
उपगीय़मानो गन्धर्वैरास्ते स्म कुरुनन्दनः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
उपगुह्य हि वैराणि सान्त्वय़न्ति नराधिपाः |
६९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
अष्टावक्र उवाच
उपगूह च मां विप्र कामार्ताहं भृशं त्वय़ि ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
उपघातैर्यथा भृत्या दूषिता निधनं गताः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
उपचक्राम भर्तारं तामुवाचाथ कश्यपः ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय ११३
पाण्डुरु उवाच
उपचाराभिचाराभ्यां धर्ममाराधय़स्व वै ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
उपचारेण च रहस्तुतोष जगतीपतिः ||
३८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५२
वासुदेव उवाच
उपचीर्णाः कुरुश्रेष्ठा यस्त्वेतान्समुपेक्षथाः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
उपचीर्णो गुरुर्मिथ्या भवता राज्यकारणात् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय १६३
अर्जुन उवाच
उपचीय़मानश्च मय़ा महास्त्रेण व्यवर्धत ||
३३ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
उपच्छन्नं प्रकाशं वा वृत्त्या तान्प्रतिपादय़ |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय ५
नारद उवाच
उपच्छन्नानि रत्नानि प्रय़च्छसि यथार्हतः ||
४९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
उपजह्रुः शरीरेषु हेमचित्राण्यनेकशः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
उपजह्रुर्नरास्तत्र वस्त्राण्याभरणानि च ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
उपजह्रुर्महार्हाणि प्रेष्याः शुभ्राणि सर्वशः ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८७
वैशम्पाय़न उवाच
उपजह्रुर्यथान्याय़ं धृतराष्ट्रपुरोहिताः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय १०६
वैशम्पाय़न उवाच
उपजह्रुर्वनान्तेषु धृतराष्ट्रेण चोदिताः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
उपजह्रेऽथ विधिवद्वार्ष्णेय़ाय़ार्घ्यमुत्तमम् ||
३० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
उपजाता व्यसनजा येय़मद्य मतिर्मम |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
उपजापश्च भृत्यानामात्मनः परदर्शनात् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय २३
सूत उवाच
उपजिघ्रद्भिराकाशं वृक्षैर्मलय़जैरपि |
४ क
वन पर्व
अध्याय २९७
यक्ष उवाच
उपजीवनं किं स्विदस्य किं स्विदस्य पराय़णम् ||
५० ख
वन पर्व
अध्याय २९७
युधिष्ठिर उवाच
उपजीवनं च पर्जन्यो दानमस्य पराय़णम् ||
५१ ख
विराट पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
उपजीवन्ति राजानमेनं सुचरितव्रतम् ||
१६ ख
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
उपजीवी भवेद्राज्ञो विषय़े चापि यो वसेत् ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपजीव्य रणे रुद्रं शक्रं वैश्रवणं यमम् |
२९ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुः प्रकृतय़ः समस्ता व्राह्मणैः सह ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्नरश्रेष्ठ तत्तीर्थं लाङ्गली ततः |
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय १३४
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्नरश्रेष्ठा वैश्यशूद्रगृहानपि ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्महात्मानं कार्त्तिकेय़ं यशस्विनम् ||
१०८ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्महात्मानं गन्धर्वाप्सरसो नृपम् |
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
उपतस्थुर्महात्मानं प्रजापतिमिवामराः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
उपतस्थुर्महात्मानं विविशुश्चासनेषु ते ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्महात्मानं सप्तरात्रं युधिष्ठिरम् ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्महात्मानं सर्वलोकपितामहम् ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्महात्मानो मातरं च यथाविधि ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
उपतस्थुर्महाराज ध्यातमात्राणि सर्वशः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३११
भीष्म उवाच
उपतस्थुर्महाराज यथास्य पितरं तथा ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १४७
हनूमानु उवाच
उपतस्थुर्महावीर्या मम चामित्रकर्शन |
२६ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्महावीर्या माल्यवन्तं महागिरिम् ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थुर्यथोद्यन्तमादित्यं मन्त्रकोविदाः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
उपतस्थे च भर्तारं न चान्यं मनसाप्यगात् |
३२ क
सभा पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थे जरासन्धं युय़ुत्सुं वै पुरोहितः ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
उपतस्थे जरासन्धो विस्मितश्चाभवत्तदा ||
३२ ख