शान्ति पर्व
अध्याय
१५२
भीष्म उवाच
रसवेगश्च दुर्वारः श्रोत्रवेगश्च दुःसहः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७५
वरुण उवाच
रसा वै मत्प्रसूता हि भूतदेहेषु राघव |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
रसां पुनः प्रविष्टश्च योगं परममास्थितः |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
रसां विविशतुस्तूर्णमुदक्पूर्वे महोदधौ ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
रसांश्च तांस्तान्विप्रर्षे मद्यवर्जानहं वहून् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
रसाः सर्वे क्षय़ं यान्ति यदा नेच्छति भूमिपः |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
रसाः स्पर्शाश्च गन्धाश्च शव्दाश्चापि गुणान्विताः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
रसातलगतांश्चैव वराहस्त्रिदशद्विषः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
व्रह्मो उवाच
रसातलतले देवा वसत्यग्निरिति प्रभो |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भृगुरु उवाच
रसातलान्ते सलिलं जलान्ते पन्नगाधिपः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
रसातले विनिक्षिप्य यतः शव्दस्ततो द्रुतौ ||
५२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
रसातिय़ुक्तमन्नं वा दिवास्वप्नं निषेवते |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२४
नारद उवाच
रसात्सञ्जाय़ते चापि रूपादपि च जाय़ते ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
रसानां प्रतिसंहारात्सौभाग्यमिह विन्दति |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
रसानां प्रतिसंहारे सौभाग्यमनुगच्छति |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३५
व्यास उवाच
रसानां विक्रय़श्चापि तिर्यग्योनिवधस्तथा ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७६
भृगुरु उवाच
रसानां सर्वगन्धानां स्नेहानां प्राणिनां तथा |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
रसानामथ वीजानां धान्यानां च युधिष्ठिर |
९९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६४
भीष्म उवाच
रसानामुत्तमं चैतत्फलानां चैतदुत्तमम् ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
रसान्गन्धांश्च विविधान्रत्नानि च सहस्रशः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७८
भृगुरु उवाच
रसान्धातूंश्च दोषांश्च वर्तय़न्नवतिष्ठति ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
रसान्धातूंश्च दोषांश्च वर्तय़न्परिधावति ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
रसान्नानाप्रकारांश्च वन्यं च मुनिभोजनम् ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
रसालाकर्दमाः कुल्या वभूवुर्भरतर्षभ ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
रसालापूपकांश्चित्रान्मोदकानथ षाडवान् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
रसाश्च मनुजव्याघ्र न तथा स्वादुय़ोगिनः ||
३४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३०७
युधिष्ठिर उवाच
रसाय़नप्रय़ोगैर्वा कैर्नोपैति जरान्तकौ ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८
अश्मो उवाच
रसाय़नविदश्चैव सुप्रय़ुक्तरसाय़नाः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९४
मनुरु उवाच
रसैर्विय़ुक्तं विविधैश्च गन्धै; रशव्दमस्पर्शमरूपवच्च |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७७
भृगुरु उवाच
रसो वहुविधः प्रोक्तः सूरिभिः प्रथितात्मभिः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
रसोत्तमैर्विमिश्रं च ततः क्षीरादभूद्घृतम् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
व्यास उवाच
रसोऽथ रसनं स्नेहो गुणास्त्वेते त्रय़ोऽम्भसाम् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२९
श्रीभगवानु उवाच
रसोऽहमप्सु कौन्तेय़ प्रभास्मि शशिसूर्ययोः |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३९
श्रीभगवानु उवाच
रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रिय़ाः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
रहः समुपविश्यैकस्ततः पप्रच्छ मातरम् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
रहश्चैवोपचारेण भर्तारं पर्यतोषय़त् ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
रहस्तु केचिद्वार्ष्णेय़ं प्रशशंसुर्नराधिपाः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
रहस्यं खल्विदं राजन्देवानामिति नः श्रुतम् |
३ क
विराट पर्व
अध्याय
६७
अर्जुन उवाच
रहस्यं च प्रकाशं च विश्वस्ता पितृवन्मय़ि ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२८२
गौतम उवाच
रहस्यं यदि ते नास्ति किञ्चिदत्र वदस्व नः ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
रहस्यं यदृषीणां तु तच्छृणुष्व युधिष्ठिर |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३८
व्यास उवाच
रहस्यं सर्ववेदानामनैतिह्यमनागमम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३८
व्यास उवाच
रहस्यधर्मं वक्तव्यं नान्यस्मै तु कथञ्चन ||
१८ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
रहस्यमद्भुतं चैव शृणु वक्ष्यामि यत्त्वय़ि |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
रहस्यमरहस्यं वा न प्रवर्तामि सर्वथा ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
रहस्यश्रवणं धर्मो वेदव्रतनिषेवणम् |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
रहस्यात्मसमां दृष्ट्वा राजा राजीवलोचनाम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
रहस्येकः प्रतीतात्मा कृतोपसदनांस्तदा ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
रहितं धिष्ण्यमालोक्य समुत्सार्य च रक्षिणः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
६८
वृहदश्व उवाच
रहिता भर्तृभिश्चैव न क्रुध्यन्ति कदाचन ||
८ ग