भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
उपारमध्वं सङ्ग्रामाद्वैराण्युत्सृज्य पार्थिवाः ||
५० ग
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
उपारमन्त ज्याशव्दाः प्रेक्षका रथिनोऽभवन् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
उपारमन्त ते सर्वे योधास्माकं परे तथा |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
उपारमन्महाराज व्याजहार न कश्चन ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
उपारमस्व युद्धाय़ द्रोणाद्भरतसत्तम |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
उपारम्य च गच्छेम सहिताः पापकर्मणः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
उपारम्य च युद्धेभ्यः संनाहान्विप्रमुच्य च |
५ क
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
उपारुह्यार्जुनश्चापि चामरव्यजनं सितम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
धृतराष्ट्र उवाच
उपारोप्य रथे कर्णं निर्यातो मधुसूदनः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
उपारोहदनादृत्य तस्य वीर्यं महात्मनः ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
उपार्जनं च द्रव्याणां परमर्म च तानि षट् ||
६४ ख
वन पर्व
अध्याय
१९७
व्राह्मण उवाच
उपालम्भस्त्वय़ा ह्युक्तो मम निःश्रेय़सं परम् |
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३२
लोमश उवाच
उपालव्धः शिष्यमध्ये महर्षिः; स तं कोपादुदरस्थं शशाप |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
सत्यवानु उवाच
उपालव्धः सुवहुशश्चिरेणागच्छसीति ह ||
८३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
उपालीय़न्त सन्त्रासात्पाण्डवस्य महात्मनः ||
४० ख
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
उपावर्तत दुर्मेधा रत्नान्यादाय़ सर्वशः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५३
भीष्म उवाच
उपावर्तन्त तत्रैव निवासार्थं शकुन्तकाः ||
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
उपावर्तस्व कल्याण पर्याप्तमिदमच्युत ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
उपावर्त्य ततः शीघ्रैर्हय़ैः प्राय़ात्परन्तपः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
उपावर्तय़दव्यग्रस्तानश्वान्पुष्करेक्षणः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उपाविशन्द्रौपदेय़ाः कुमाराः; सुवर्णचित्रेषु वरासनेषु ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपाविशन्पाण्डवेय़ा मन्त्राय़ पुनरेव हि ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
उपाविशन्पुरस्कृत्य सप्तर्षय़ इव ध्रुवम् ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
उपावृत्तमदः क्षिप्रं स न्यवर्तत वेगतः ||
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
उपावृत्ता महाराज त्वामद्य निहतद्विषम् ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
उपावृत्ताश्च तुरगाः शिक्षिताश्चाश्वसादिनः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
उपावृत्ताश्च पीताश्च पुनर्युज्यन्तु मे रथे ||
५२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
उपावृत्तेषु पार्थेषु सर्वेष्वन्तःपुरेषु च |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
उपावृत्य तु पाण्डुभ्यः कैतव्यो धृतराष्ट्रजम् |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
उपावृत्य यथान्याय़ं पाय़यामास वारि सः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
उपावृश्चानुपावृश्चसुराष्ट्राः केकय़ास्तथा |
४७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
उपाशाम्यत्ततस्तीव्रं तद्रजो घोरदर्शनम् ||
४२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
उपाशाम्यद्रजो भौमं भीरून्कश्मलमाविशत् ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
उपासङ्गादुद्धरन्दक्षिणेन; परःशतान्नकुलश्चित्रय़ोधी |
२० क
विराट पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपासङ्गादुपादाय़ कर्णो वाणानथापरान् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२
कर्ण उवाच
उपासङ्गान्षोडश योजय़न्तु; धनूंषि दिव्यानि तथाहरन्तु |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
उपासङ्गाश्च शक्त्यश्च सर्वप्रहरणानि च ||
१२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
कृप उवाच
उपासत नृपाः पूर्वमर्थहेतोर्यमीश्वरम् |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
उपासते धर्मराजं मूर्तिमन्तो निरामय़ाः ||
२९ ग
सभा पर्व
अध्याय
७
नारद उवाच
उपासते महात्मानं देवराजमरिन्दमम् ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
उपासते महात्मानं रूपय़ुक्ता मनस्विनः ||
३७ ख
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
उपासते महात्मानं वरुणं विगतक्लमाः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
उपासते महात्मानं सभाय़ामृषिसत्तमाः |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
उपासते महात्मानं सर्वे जलचरास्तथा ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
उपासते महात्मानं सर्वे सुचरितव्रताः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५७
भीष्म उवाच
उपासते महाराज समस्ताः पुरुषानिह ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय
१७
द्रौपद्यु उवाच
उपासते महाराजमिन्द्रप्रस्थे युधिष्ठिरम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
उपासते महावृक्षं सुलुव्धास्तं फलेप्सवः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
उपासते यत्र सत्रं सहस्रय़ुगपर्यये ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
उपासते यत्र सत्रं सहस्रय़ुगपर्यये ||
४६ ख