शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
राजा भवति तं जित्वा दासस्तेन पराजितः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
राजा भवति भूतानां विश्वास्यो हिमवानिव ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
राजा भोजो विराट्सम्राट्क्षत्रिय़ो भूपतिर्नृपः |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
राजा मनीषी निपुणो लोके दृष्टपरावरः ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय
५२
विदुर उवाच
राजा महात्मा कुशली सपुत्र; आस्ते वृतो ज्ञातिभिरिन्द्रकल्पैः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
राजा मित्रसहश्चापि वसिष्ठाय़ महात्मने |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
राजा मूलं त्रिवर्गस्य अप्रमत्तोऽनुपालय़न् ||
९५ ख
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
राजा मृगप्रसङ्गेन वनमन्यद्विवेश ह ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
राजा यदा सत्कुरुते मनुष्यं; सर्वान्गुणानेष गुणोऽतिभाति ||
४६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
राजा यदाह तत्कार्यं त्वय़ा पुत्र पितुर्वचः ||
२६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
राजा यात्वेष धर्मात्मा तपसे धृतनिश्चय़ः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भृगुरु उवाच
राजा युधिष्ठिरो नाम भविष्यति कुरूद्वहः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
२०५
व्राह्मण उवाच
राजा यय़ातिर्दौहित्रैः पतितस्तारितो यथा |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
राजा राज्ञः कथं साधून्हिंस्यान्नृपतिसत्तम |
८ क
वन पर्व
अध्याय
६५
सुदेव उवाच
राजा राज्यपरिभ्रष्टः पुनर्लव्ध्वेव मेदिनीम् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११४
युधिष्ठिर उवाच
राजा राज्यमनुप्राप्य दुर्वलो भरतर्षभ |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
राजा राष्ट्रं यथापत्सु द्रव्यौघैः परिरक्षति |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
राजा राष्ट्रेश्वरं कृत्वा धृतराष्ट्रोऽद्य शोचति ||
३२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
राजा रुचिरपद्माक्षैरासां चक्रे तदाश्रमे ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
राजा लक्षणसम्पन्नस्त्रैलोक्यस्यापि यो भवेत् |
८१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
राजा वर्षसहस्रेण तस्यान्तमधिगच्छति ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
राजा वसुमना नाम कौसल्यो धीमतां वरः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९३
भीष्म उवाच
राजा वसुमना नाम कौसल्यो वलवाञ्शुचिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४८
नागभार्यो उवाच
राजा वा राजपुत्रो वा भ्रूणहत्यैव युज्यते ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
राजा विदर्भाधिपतिः पिता मम महारथः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७३
वाय़ुरु उवाच
राजा विभर्ति रूपाणि राज्ञा सर्वमिदं धृतम् ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
राजा विभेति भद्रं ते गन्धर्वेभ्यः पराभवात् |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय
८
सुदेष्णो उवाच
राजा विराटः सुश्रोणि दृष्ट्वा वपुरमानुषम् |
२३ क
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
राजा विराटोऽथ भृशं प्रतप्तः; श्रुत्वा सुतं ह्येकरथेन यातम् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
राजा विवदमानेषु नित्यं मूर्खेषु पण्डिताः ||
७२ ख
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
राजा वृहद्रथो नाम मगधाधिपतिः पतिः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
सनत्कुमार उवाच
राजा वै प्रथमो धर्मः प्रजानां पतिरेव च |
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
राजा शत्रुन्तपो नाम सौवीराणां महारथः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
द्रोण उवाच
राजा शूरः कृती दक्षो वैरमुत्पाद्य पाण्डवैः |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
भीष्म उवाच
राजा शैव्यो वृषादर्भिः क्लिश्यमानान्ददर्श ह ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
राजा श्रान्तो जगतो विक्षतश्च; कर्णेन सङ्ख्ये निशितैर्वाणसङ्घैः |
६४ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
राजा संवरणस्तस्मात्पलाय़त महाभय़ात् ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
राजा सर्वगुणोपेतस्त्रैलोक्यस्यापि यो भवेत् |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
राजा सर्वस्य लोकस्य राजानमनुधावति ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
राजा स्मरति ते क्षत्तर्धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
राजा स्वय़ं सुवीराणां प्रवराणां प्रहारिणाम् |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
राजा हि धर्मकुशलः प्रथमं भूतिलक्षणम् ||
३७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
राजा हि यः स्थिरप्रज्ञः स्वय़ं दोषानवेक्षते |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
राजा हि हन्याद्दद्याच्च प्रजा रक्षेच्च धर्मतः ||
८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
राजा ह्येवाखिलं लोकं समुदीर्णं समुत्सुकम् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
राजातुरो नागमद्यत्किरीटी; वहूनि दुःखान्यभिजातोऽस्मि सूत ||
११ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
राजात्मानं गृहगतं पुरेव गजसाह्वय़े ||
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
राजाधिराजः सर्वासां विष्णुर्व्रह्ममय़ो महान् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
राजाधिराजो भवति तद्धि दानमनुत्तमम् ||
५८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
राजानं क्षेमधन्वानं विराटद्रुपदौ तथा ||
३३ ख