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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८७
वैशम्पाय़न उवाच
राजानः स्रग्विणश्चापि सुमृष्टमणिकुण्डलाः |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
राजानमद्य भवतां न्यासभूतं ददामि वै |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
राजानमनुवर्तन्तं धर्मपुत्रं महामतिम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९४
वामदेव उवाच
राजानमनुवर्तन्ते तं पापाभिप्रवर्तकम् |
२ क
विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
राजानमन्वय़ुः पश्चाच्चलन्त इव पर्वताः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
राजानमन्वय़ुः पश्चाच्चलन्त इव पर्वताः ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
राजानमन्वय़ुः सर्वे परिवार्य युधिष्ठिरम् ||
५९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
राजानमभि धावन्तं शरैरावृत्य रोदसी |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
राजानमभिसम्प्रेक्ष्य सर्वधर्मभृतां वरम् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
राजानमागतं दृष्ट्वा प्रतिसञ्जगृहुः प्रजाः ||
२७ ग
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
राजानमाहुकं चैव तथैवानकदुन्दुभिम् |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
राजानमुग्रधन्वानं दिलीपं सत्यवादिनम् |
७१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
राजानमुपतिष्ठस्व ज्येष्ठं भ्रातरमीश्वरम् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ५१
सूत उवाच
राजानमूचुः सहिता लभतां व्राह्मणो वरम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
कपिल उवाच
राजानश्च तथा युक्ता व्राह्मणाश्च यथाविधि ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २८५
सूर्य उवाच
राजानश्च नरव्याघ्र पौरुषेण निवोध तत् ||
४ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
राजानश्च महात्मानो नानाजनपदेश्वराः |
२८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
राजानश्च महाभागा नानादेशनिवासिनः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
राजानश्च ये विजिताः पुरस्ता; त्त्वामेव ते संश्रय़ेय़ुः समस्ताः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
राजानश्च समाहूताः पृथिव्यां भरतर्षभ |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
राजानश्च हताः शूराः समरेष्वनिवर्तिनः ||
४२ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
राजानश्चक्रुरासाद्य मोक्षिता महतो भय़ात् ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
राजानश्चान्वय़ुः पार्थान्वहवोऽन्येऽनुय़ाय़िनः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
राजानश्चाप्यसन्तुष्टाः परार्थान्मूढचेतसः |
३६ क
शल्य पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
राजानस्तस्य ये पूर्वे याज्या ह्यासन्महात्मनः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७५
वैशम्पाय़न उवाच
राजानस्ते न हन्तव्या धनञ्जय़ कथञ्चन ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
राजानीकमसम्वाधं प्राविशच्छत्रुकर्शनः ||
७९ ख
सभा पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
राजानुगः संसदि कौरवाणां; विनिष्क्रमन्वाक्यमुवाच भीमः ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
राजानुगो धर्मपाशानुवद्धो; दहन्निवैनं कोपविरक्तदृष्टिः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
राजानो निधनं प्राप्तास्तव पुत्रैर्महत्तमाः ||
१८० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
राजानो भरतश्रेष्ठ भोक्तुकामा वसुन्धराम् |
७२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
राजानो भीष्ममासाद्य गतास्ते यमसादनम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
राजानो भुञ्जते राज्यं प्रज्ञय़ा तुल्यलक्षणाः ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
राजानो मोक्षिताश्चेमे वन्धनान्नृपसत्तम ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
राजानो ये च तत्रासन्स्वय़ंवरदिदृक्षवः |
४० क
विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
राजानो राजपुत्राश्च तनुत्राण्यत्र भेजिरे |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
राजानो राजपुत्राश्च दुर्योधनवशानुगाः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
राजानो राजपुत्राश्च दुर्योधनवशानुगाः |
४ क
वन पर्व
अध्याय ३६
भीमसेन उवाच
राजानो राजपुत्राश्च धृतराष्ट्रमनुव्रताः ||
२८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
राजानो राजपुत्राश्च नागाश्च विनिपातिताः ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
राजानो राजपुत्राश्च नानाजनपदेश्वराः ||
१३ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
उमो उवाच
राजानो राजपुत्राश्च निर्धना वा महाधनाः |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
राजानो राजपुत्राश्च नीतिमन्तो महावलाः ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३८
वासुदेव उवाच
राजानो राजपुत्राश्च पाण्डवार्थे समागताः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय १७५
व्राह्मणा ऊचुः
राजानो राजपुत्राश्च यज्वानो भूरिदक्षिणाः |
१२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
राजानो राजपुत्राश्च ये मदर्थे हता रणे ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
राजानो राजपुत्राश्च शूराः परिघवाहवः ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
राजानो राजपुत्राश्च शूराः परिघवाहवः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
राजानो राजपुत्राश्च समन्तात्पर्यवारय़न् ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५३
नारद उवाच
राजानो राजपुत्राश्च समरेष्वनिवर्तिनः ||
२५ ख