द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ो दशभिर्वाणैः प्रत्यविध्यदजिह्मगैः ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ो निशितैर्वाणैर्व्यधमच्चर्म चोत्तमम् ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ो निशितैर्वाणैस्ततोऽभ्यार्च्छद्युधिष्ठिरम् ||
८० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ो रथमारुह्य प्राय़ात्तव सुतं प्रति ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ोऽपि महाराज पाञ्चालान्सह पाण्डवैः |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ोऽपि महाराज शरवर्षं समुत्सृजन् |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ोऽप्यन्यथा पार्थान्सृञ्जय़ांश्च महारथान् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
राधेय़ोऽहं कुरुश्रेष्ठ नित्यं चाष्किगतस्तव |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४३
कर्ण उवाच
राधेय़ोऽहमाधिरथिः कर्णस्त्वामभिवादय़े |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
ईश्वर उवाच
राम तुष्टोऽस्मि भद्रं ते विदितं मे तवेप्सितम् |
१३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२९
समुद्र उवाच
राम राम निवर्तस्व कं गुणं तात पश्यसि |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
राम राम निवर्तस्व युद्धादस्माद्द्विजोत्तम |
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
राम राम महाभाग प्रीताः स्म तव भार्गव |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
रामं कमलपत्राक्षं तुष्टुवुः सर्वदेवताः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
रामं क्षत्रिय़हन्तारं प्रदीप्तमिव पावकम् ||
२९ ग
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
रामं तु गतमाज्ञाय़ राजानं च तथागतम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
रामं दाशरथिं चैव मृतं शुश्रुम सृञ्जय़ |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
रामं दाशरथिं चैव शशविन्दुं भगीरथम् ||
१६८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
रामं द्रक्ष्यसि वत्से त्वं जामदग्न्यं महावने |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
युधिष्ठिर उवाच
रामं धर्मभृतां श्रेष्ठं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
रामं पुरस्कृत्य यय़ुर्वृष्ण्यन्धकमहारथाः |
५६ क
वन पर्व
अध्याय
२६२
मार्कण्डेय़ उवाच
रामं भर्तारमुत्सृज्य न त्वहं त्वां कथञ्चन |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
रामं भार्गवमाहूय़ सोऽभ्यभाषत शङ्करः ||
१४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
रामं श्रेष्ठं महर्षीणामपृच्छदकृतव्रणम् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
रामं संनिहितं दृष्ट्वा गदाय़ुद्ध उपस्थिते |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
रामः कर्णं तु सक्रोधमिदं वचनमव्रवीत् ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
रामः कृतस्वस्त्ययनः प्रय़यौ दानवान्प्रति ||
१४९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
रामः पादग्राहणिकं ददौ पार्थाय़ लाङ्गली |
४९ क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
रामः प्रहरतां श्रेष्ठश्चुक्रोध वलवद्वली ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
रामः शराणां सङ्क्रुद्धो मय़ि तूर्णमपातय़त् ||
३४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
रामः सुवर्णं दत्त्वा हि विमुक्तः सर्वकिल्विषैः |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
रामकीर्त्या समं पुत्र जीवितं ते भविष्यति ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
रामकृष्णप्रणीतानां वृष्णीनां सूतनन्दन |
७ क
मौसल पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
रामकृष्णमहाग्राहां द्वारकासरितं तदा |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
द्रुपद उवाच
रामकृष्णौ च धर्मज्ञौ तदा गच्छन्तु पाण्डवाः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
१३
धृष्टद्युम्न उवाच
रामकृष्णौ व्यपाश्रित्य अजेय़ाः स्म शुचिस्मिते |
११९ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
रामतीर्थे नरः स्नात्वा गोमत्यां कुरुनन्दन |
६६ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
रामतीर्थे नरः स्नात्वा वाजिमेधफलं लभेत् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
रामतीर्थे नरः स्नात्वा विन्द्याद्वहु सुवर्णकम् ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
रामतुल्यस्तथास्त्रे यः स कथं वै निषूदितः ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
रामनारदकण्वैश्च हितमुक्तं सभातले |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
१४७
भीम उवाच
रामपत्नीकृते येन शतय़ोजनमाय़तः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
रामप्रभृतय़ः सर्वे भजन्त्यन्धकवृष्णय़ः |
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
राममभ्यर्च्य राजेन्द्र लभेद्वहु सुवर्णकम् ||
३३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
राममभ्यागमद्भीतस्तदेव मनसा स्मरन् ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
रामरावणसैन्यानामन्योन्यमभिधावताम् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
रामरावणसैन्यानामन्योन्यमभिधावताम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२५८
मार्कण्डेय़ उवाच
रामलक्ष्मणशत्रुघ्ना भरतश्च महावलः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
२७२
मार्कण्डेय़ उवाच
रामलक्ष्मणसुग्रीवाः शरस्पर्शं न तेऽनघ |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
रामवाणैर्द्विधा छिन्नाः शतशोऽथ महाहवे ||
२१ ख